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सियासत

रेलवे में इस्तेमाल किए बेडरोल को दोबारा पैक कर यात्रियों को परोसा जा रहा!

भारतीय रेलवे, जो लाखों यात्रियों के लिए परिवहन का प्रमुख साधन है, इन दिनों एक बड़ी आलोचना का सामना कर रहा है। खबरें सामने आ रही हैं कि रेलवे में हर दिन इस्तेमाल किए हुए बेडरोल (चादर, तकिया, कंबल) को साफ किए बिना ही दोबारा पैक कर यात्रियों को दिया जा रहा है। यह न केवल यात्रियों की स्वच्छता और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

यात्रियों का आरोप : स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़

यात्रियों का कहना है कि बेडरोल को ठीक से धोया नहीं जा रहा है। इसे वापस से पैक कर यात्रियों को दिया जा रहा है, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा है। इस मुद्दे पर जब कुछ यात्रियों ने आवाज उठाई, तो उन्हें रेलवे अधिकारियों से संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

रेलवे की अन्य समस्याएं जो यात्रियों को कर रही परेशान-

  1. खाने की गुणवत्ता: रेलवे में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि उन्हें महंगे दामों पर खराब क्वालिटी का खाना दिया जाता है।
  2. ट्रेनों में गंदगी: कई ट्रेनों में शौचालय और डिब्बों की सफाई की स्थिति दयनीय है। यात्रियों को गंदे शौचालयों और गंदे डिब्बों में सफर करना पड़ता है।
  3. समय पर ट्रेनों का संचालन: समय पर ट्रेनों का नहीं चलना यात्रियों की एक और बड़ी समस्या है। कई बार ट्रेनों के घंटों देर होने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
  4. आरक्षण और टिकट दलालों का गोरखधंधा: टिकटों की बुकिंग में दलालों का कब्जा बना रहता है, जिससे आम यात्री को टिकट प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
  5. सुरक्षा का अभाव: रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा का उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। चोरी और अन्य आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं।

क्या हो सकता है समाधान?

  • रेलवे को बेडरोल धोने और साफ-सफाई के लिए नियमित निरीक्षण करना चाहिए।
  • खाने की गुणवत्ता को सुधारने के लिए सख्त मानक लागू किए जाने चाहिए।
  • ट्रेनों और स्टेशनों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेनों और स्टेशनों पर सीसीटीवी और सुरक्षा गार्ड की तैनाती होनी चाहिए।

यह मुद्दा यदि सही ढंग से उजागर किया जाए, तो इससे न केवल रेलवे के कामकाज में सुधार होगा, बल्कि यात्रियों को भी राहत मिलेगी। ऐसे में मीडिया और यात्रियों को मिलकर इसे एक अभियान के रूप में उठाना चाहिए।

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