‘स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान’ सुधीर विद्यार्थी को

चित्तौड़गढ़। सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना के जन्म शताब्दी वर्ष में साहित्य संस्कृति के संस्थान संभावना द्वारा ‘स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान’ की घोषणा कर दी गई है। संभावना के अध्यक्ष डॉ के सी शर्मा ने बताया कि वर्ष 2020 के लिए ‘स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान’ बरेली (उत्तर प्रदेश) निवासी सुधीर विद्यार्थी को उनकी चर्चित कृति ‘क्रांतिकारी आन्दोलन : एक पुनर्पाठ’ पर दिया जाएगा।

डॉ शर्मा ने बताया कि बनारस निवासी वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार प्रो काशीनाथ सिंह, भोपाल निवासी वरिष्ठ हिंदी कवि राजेश जोशी और जयपुर निवासी वरिष्ठ लेखक डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल की चयन समिति ने सर्व सम्मति से भारतीय स्वाधीनता आंदोलन पर लिखी गई इस कृति को पुरस्कार के योग्य पाया।

काशीनाथ सिंह ने वक्तव्य में कहा कि स्वाधीनता संग्राम में भगतसिंह जैसे क्रांतिकारियों के आंदोलनात्मक अवदान पर विद्यार्थी की किताब नयी दृष्टि से विचार करती है। राजेश जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सुधीर विद्यार्थी ने अपने जीवन का बड़ा समय भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उपेक्षित पक्षों को रोशन करने के लिए किताबें लिखने में लगाया है और उनकी पुस्तक ‘क्रांतिकारी आन्दोलन : एक पुनर्पाठ’ उनके इसी लेखन का शिखर है। डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने अपनी अनुशंसा में इसे नयी पीढ़ी के लिए आवश्यक पठनीय पुस्तक माना जो स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक दृष्टिकोण से भी अवगत करवाती है।

डॉ शर्मा ने बताया कि ‘स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान’ में कृति के लेखक को ग्यारह हजार रुपये, शाल और प्रशस्ति पत्र भेंट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चित्तौड़गढ़ में आयोज्य समारोह में सुधीर विद्यार्थी को सम्मानित किया जाएगा। संभावना द्वारा स्थापित इस पुरस्कार के संयोजक डॉ कनक जैन ने बताया कि राष्ट्रीय महत्त्व के इस सम्मान के लिए देश भर से छब्बीस कृतियां प्राप्त हुई थीं, जिनके आधार पर चयन समिति ने अपनी अनुशंसा में ‘क्रांतिकारी आन्दोलन : एक पुनर्पाठ’ को श्रेष्ठतम कृति घोषित किया।

डॉ जैन ने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी पक्ष का इतिहास और उसकी स्मृतियों के लेखन के लिए सुधीर विद्यार्थी का हिंदी संसार में गहरा सम्मान है। वे स्वयं एक कवि और गद्यकार के रूप में भी सक्रिय रहे हैं तथापि अशफाक उल्ला खां, भगत सिंह, चंद्रशेखर, रामप्रसाद बिस्मिल, बटुकेश्वर दत्त, शहीद रोशन सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों पर लिखी उनकी पुस्तकों का महत्त्व इस तथ्य में है कि नयी पीढ़ी को उन्होंने हमारी विरासत का सही और जरूरी परिचय दिया। विद्यार्थी की पचास से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सेनानियों की स्मृति में अनेक स्मारकों का निर्माण करवाने तथा उनकी स्मृतियों को संरक्षित करने के बहुविध कार्य किये हैं। ‘संदर्श’ जैसी लघु पत्रिका के सम्पादन के साथ विद्यार्थी अपने डायरी लेखन के लिए भी जाने जाते हैं। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2019 का यह सम्मान विख्यात आलोचक प्रो माधव हाड़ा को उनकी कृति ‘पचरंग चोला पहर सखी री’ के लिए दिया गया था।

डॉ कनक जैन, चित्तौड़गढ़

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