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राष्ट्रीय सहारा की छपाई से जुड़े सवाल पर वकील ने कोर्ट को क्या बताया? पढ़ें

लखनऊ। राष्ट्रीय सहारा अख़बार से जुड़े कर्मचारियों के वेतन बकाया और कथित अवैध बंदी को लेकर श्रम विभाग की कार्यवाही तेज हो गई है। डीएलसी (डिप्टी लेबर कमिश्नर) लखनऊ ने इस मामले में आदेश पारित करते हुए प्रबंधन और कर्मचारियों के पक्ष को सुना है। यह आदेश 19 जनवरी 2026 को पारित किया गया।

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय सहारा की ओर से उपस्थित वकील ने कोर्ट को बताया कि प्रबंधन ने राष्ट्रीय सहारा अख़बार को बंद नहीं किया है, बल्कि उसका प्रकाशन स्थगित (सस्पेंड) किया गया है। वकील के अनुसार अख़बार की मौजूदा वित्तीय स्थिति कमजोर होने के कारण यह कदम उठाया गया है और भविष्य में फाइनेंशियल पोजीशन मजबूत होने पर अख़बार को दोबारा शुरू किया जा सकता है।

वहीं, कर्मचारी पक्ष ने अख़बार के प्रकाशन को अवैध रूप से बंद किए जाने और लंबे समय से वेतन न दिए जाने का मुद्दा उठाया। कर्मचारियों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना और वैधानिक प्रक्रिया के काम बंद कराया गया, जिससे वे आर्थिक और मानसिक संकट में हैं। सुनवाई में यह भी बताया गया कि अक्टूबर 2025 से अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।

डीएलसी लखनऊ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में अगली सुनवाई की तारीख 28 जनवरी 2026 तय की है। अगली तिथि पर अवैध बंदी और वेतन बकाया से जुड़े बिंदुओं पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी और संबंधित दस्तावेजों पर विचार किया जाएगा।

मामले पर श्रम विभाग की निगरानी बनी हुई है और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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