“रवीश जी निश्चिंत रहिए, शाक्यों पर भरोसा कीजिए”

संजय कुमार सिंह-

भारत में मीडिया और मीडिया वालों की जो दशा है वह किसी से छिपी नहीं है। मुनाफा कमाने के लिए कारोबार के रूप में चलाए जाने वाले संस्थानों को विज्ञापनों के दम पर खरीद लिया गया है। सरकार के खिलाफ लिखने-बोलने वाले पत्रकारों को परेशान करने और समर्थकों को ईनाम देने के ढेरों मामलों के बीच एक प्रमुख मीडिया संस्थान को सरकार समर्थक द्वारा खरीदने की कोशिश की भी खबर है। इस बीच, संबंधित मीडिया संस्थान, एनडीटीवी में कार्यरत रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता रवीश कुमार ने इस्तीफे की घोषणा का वीडियो यू ट्यूब पर अपलोड किया तो उसे कुछ ही घंटे में लाखों लोगों ने देखा। ऐसे समय में भारत में मीडिया की आजादी को नापने के लिए 2500 साल पुराना उदाहरण दिया जा रहा है।

यूनाइटेड नेशन में भारत की प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने दावा किया कि देश में लोकतंत्र के चारो स्तंभ – विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और चौथा स्तंभ सब दुरुस्त है। अंग्रेजी अखबार, ‘द टेलीग्राफ’ ने इसकी कायदे से खबर ली है। इसके अनुसार, “भारत में चौथा स्तंभ दुरुस्त” संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज। सबकी तरफ से, सबके लिए यह दावा उसी हफ्ते किया गया जब पत्रकार रवीश कुमार ने एनडीटीवी से इस्तीफा दिया। लिहाजा द टेलीग्राफ का मुख्य शीर्षक था- “रवीश जी निश्चिंत रहिए, शाक्यों पर भरोसा कीजिए।”



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