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महाकुंभ में भटकती इस बुजुर्ग महिला रेखा द्विवेदी के घर की जो असली कहानी है, सुनकर आप भी कह पड़ेंगे- “दो शादी कभी न करना!”

https://x.com/askrajeshsahu/status/1892888946331259378?s=46

कुंभ की इस बुजुर्ग महिला रेखा द्विवेदी की तस्वीर / वीडियो आपने भी देखा होगा। बताया गया कि इनके 4 बेटे हैं, चारों आर्थिक रूप से संपन्न हैं, जिनमें 1 बेटा हाइकोर्ट का वकील है और दूसरा बेटा लेक्चरर है, लेकिन एक ने भी इन्हें महाकुंभ में खोजने की कोशिश नहीं की! अब इन्हीं के पुत्र सक्षम द्विवेदी ने घरेलू विवाद की पूरी कहानी विस्तार से भड़ास को भेजी है। पढ़िए-


सक्षम द्विवेदी-

विषय: बुजुर्ग महिला रेखा द्विवेदी के संबंध में वायरल समाचार में अपना पक्ष रखने के संदर्भ में

वर्तमान में कुंभ में श्रीमती रेखा द्विवेदी के संदर्भ में यह समचार प्रकाशित किया गया कि वह असहाय स्थिति में भर्ती हैं व उनके चार पुत्र व 2 पुत्रियां उनके प्रति उदासीन हैं। इस संदर्भ के वास्तविक तथ्य व सत्य निम्न है।

– रेखा द्विवेदी के पति चन्द्रशील द्विवेदी पूर्ण रूप से स्वस्थ व संपन्न हैं। अतः रेखा द्विवेदी का पूर्ण उत्तरदायित्व चन्द्रशील द्विवेदी का है

– चन्द्रशील द्विवेदी ने 2 विवाह कर रखे हैं। प्रथम रेखा सारस्वत निवासी कल्याणी देवी प्रयागराज द्वितीय रेखा शुक्ला निवासी उरई, जालौन

– चन्द्रशील द्विवेदी के पास नया कटरा प्रयागराज, तुलसी नगर उरई, नौकुचियाताल, नैनी ताल में अपनी अचल संपत्ति है।

– पैतृक संपत्ति खेत का सम्पूर्ण अनाज व आय चन्द्रशील द्विवेदी स्वयं रखते हैं।

– चन्द्रशील द्विवेदी ने अपने पुत्र सक्षम व दक्षम को घर से निकाल दिया है तथा शिवम वहां उत्पन्न तनाव व असुरक्षा के चलते परिवार संग घर त्याग कर किराए पर रहता है

– चन्द्रशील द्विवेदी ने 20 नया कटरा स्थित सम्पूर्ण घर का नियंत्रण मध्य प्रदेश में लेक्चरर प्रियम द्विवेदी को दे दिया है। वह और उसके ससुराल वालों का ही घर पर नियंत्रण है।

– चन्द्रशील द्विवेदी के किसी भी पुत्र के पास किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति नहीं है।

– सभी अपना जीवन निर्वहन किसी प्रकार से कर रहे हैं।

– चन्द्रशील द्विवेदी के द्वारा किए 2 विवाहों से सृजित तनावपूर्ण वातावरण के कारण सबसे छोटा पुत्र रक्षम 6 अप्रैल 2010 को घर छोड़कर चला गया। इस केस की सीबीआई जांच हुई जिसका स्पष्ट उल्लेख सीबीआई की रिपोर्ट में है।

– पिता के सन्दर्भ में ऐसे ही गैर जिम्मेदाराना रवैये की रिपोर्ट पूर्व में भी हो चुकी है।

– चन्द्रशील द्विवेदी के दो भाई  यानी हमारे चाचा इन्द्रशील द्विवेदी व विनयशील द्विवेदी अपने परिवार सहित बेली रोड स्थित घर में रहते हैं। अन्य जानकारी हेतु उनसे इन मोबाइल नम्बर्स पर सम्पर्क किया जा सकता है।


अब पूर्ण विवरण-

मेरे पिता श्री चन्द्रशील द्विवेदी एक अत्यंत गैरजिम्मेदार व लापरवाह प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। इन्होंने दो विवाह किए हैं। प्रथम विवाह श्रीमती रेखा सारस्वत निवासिनी कल्याणी देवी प्रयागराज व द्वितीय विवाह श्रीमती रेखा शुक्ला निवासिनी उरई, जालौन से किया है।

इनका प्रथम विवाह प्रेम विवाह था, जिससे 8 संतानें हुईं। जिनके नाम सत्यम, शिवम, प्रियम, सक्षम, दक्षम व रक्षम हैं। दो बहनें भूमिका व समीक्षा हैं। द्वितीय पत्नी श्रीमती रेखा शुक्ला से एक पुत्री मेखला द्विवेदी है।

पिता जी के दो विवाह करने एवं लापरवाह व गैरजिम्मेदार रवैये के चलते घर में सदैव विवाद रहता था।

इसी कारण सबसे बड़े भाई सत्यम की कुपोषण से मृत्यु हो गई। घर के सदस्यों ने कई बार आत्महत्या के प्रयास भी किए। जब तक हमारे बाबा डॉ. रामशंकर द्विवेदी जीवित थे उनके कारण सभी संतानों का किसी तरह से पालन पोषण हो सका।

हमारा सबसे छोटा भाई रक्षम घर के इसी विषाक्त वातावरण के चलते घर छोड़कर चला गया और आज तक लापता है। जिसका विवरण सीबीआई की रिपोर्ट में है।

वर्तमान में पिता जी ने मुझे व छोटे भाई दक्षम को घर से निकाल दिया है। सबसे बड़े भाई अधिवक्ता शिवम द्विवेदी घर के विषाक्त व असुरक्षित परिवेश के कारण सपरिवार किराए में रहने को मजबूर हैं।

पिता जी ने हमारे जन्मस्थान 20 नया कटरा दिलकुशा पार्क का पूरा नियंत्रण मध्यप्रदेश में लेक्चरर प्रियम द्विवेदी को दे दिया है। प्रियम व उनके ससुराल का ही वर्तमान में पूरे घर में नियंत्रण है।

मैं व छोटा भाई दक्षम निजी क्षेत्र में कार्य कर किसी प्रकार जीवन निर्वहन कर रहे हैं।

पिता जी अपनी पत्नी व पुत्रों की जिम्मेदारी से अनवरत पल्ला झाड़ते आए हैं। इसकी शिकायत पूर्व में भी की गई। हर बार कहते हैं कि मैं सब सही कर दूंगा परंतु फिर वे गायब हो जाते हैं।

मेरे पिता जी के पास नया कटरा प्रयागराज, तुलसी नगर उरई, नौकुचियाताल, नैनीताल में अपनी अचल संपत्ति है। पैतृक खेती का सारा धन व अनाज पिता जी स्वयं लेते हैं।

पिता जी के पुत्रों के पास किसी भी तरह की अचल संपत्ति नहीं है। वह तनाव व अवसाद में रहते हैं। मैं स्वयं डिप्रेशन से पीड़ित हूँ व मेरी औषधि चल रही है।

पिता जी के दो भाई अर्थात मेरे चाचा श्री इन्द्रशील द्विवेदी व श्री विनयशील द्विवेदी स्टेनली रोड प्रयागराज में सपरिवार सुखपूर्वक रहते हैं। उन्हें इन सभी घटनाओं व पिता जी स्वभाव की पूर्ण जानकारी है।

पिता जी अगर अपनी दोनों पत्नियों व संतानों के प्रति सद्भावना रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं तो ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना हो सकती है। जिसके पूरे जिम्मेदार मेरे पिता श्री चन्द्रशील द्विवेदी होंगे।

संलग्नक – 

1- सीबीआई रिपोर्ट की वह खबर जिसमें घर का वातावरण तनावपूर्ण उल्लिखित है.

2- राशन कार्ड की फोटोकॉपी जिसमें घर के सदस्यों व मुखिया का उल्लेख है।

लेखक सक्षम द्विवेदी से संपर्क [email protected] के ज़रिए किया जा सकता है!

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1 Comment

1 Comment

  1. Akhilesh K Singh

    March 1, 2025 at 10:20 am

    बहुत ही दुःखद! मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि जल्द ही सबकुछ अच्छा हो जाय। पत्नी को उनका सम्मान मिले और बेटे-बेटियों को माता-पिता का स्नेह और अधिकार मिले।

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