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रेवाड़ी जिला अस्पताल के नेत्र विभाग को कवर करने गए पत्रकारों से कर्मचारी ने की बदसलूकी

रेवाड़ी, 18 जुलाई। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में कवरेज करने गए कुछ पत्रकारों के साथ वहां मौजूद कर्मचारी ने न सिर्फ बदसलूकी की बल्कि उनके कैमरों को भी तोड़ने की कोशिश की। यही नहीं पत्रकारों को अस्पताल में न घुसने की हिदायत देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कभी कोई पत्रकार अस्पताल में घुसेगा तो उसके साथ इसी तरह का व्यवहार किया जाएगा। नेत्र विभाग के उक्त कर्मचारी ने पत्रकारों को कोई भी कार्रवाई करने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

रेवाड़ी, 18 जुलाई। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में कवरेज करने गए कुछ पत्रकारों के साथ वहां मौजूद कर्मचारी ने न सिर्फ बदसलूकी की बल्कि उनके कैमरों को भी तोड़ने की कोशिश की। यही नहीं पत्रकारों को अस्पताल में न घुसने की हिदायत देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कभी कोई पत्रकार अस्पताल में घुसेगा तो उसके साथ इसी तरह का व्यवहार किया जाएगा। नेत्र विभाग के उक्त कर्मचारी ने पत्रकारों को कोई भी कार्रवाई करने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

आज सुबह पत्रकारों को सूचना मिली कि जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में एक बाहरी व्यक्ति मरीजों की नेत्र जांच कर रहा है और जांच के बाद एक पर्ची काटकर अस्पताल के समीप ही अपनी दुकान से चश्में बनवाने को मजबूर कर रहा है। इस पर पत्रकार जैसे ही नेत्र विभाग में गए तो यह देखकर दंग रह गए कि अस्पताल के सामने चश्में की दुकान चलाने वाला एक व्यक्ति मरीजों की जांच कर रहा है। जैसे ही पत्रकार कवरेज करने लगे तो वहां मौजूद ओपथैलमिक असिसटेंट गजराज ने पत्रकारों के साथ बदसूलकी करनी शुरू कर दी और उन्हें इसके परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। इसके बाद सूचना पाकर जिले के सभी पत्रकारों ने इस मामले की सूचना गोकल गेट पुलिस को दी। जिला उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक व सिविल सर्जन को भी इसकी सूचना दी गई।
 
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ यादव, रमेश अरोड़ा, सुरेन्द्र गौड़, सुरेन्द्र इन्दौरा, अमित सैनी, मुकेश शर्मा, रामजीलाल कटारिया, अशोक नागपाल, अनिल सिहाग, पवन वत्स, अजय सागर अत्री, प्रीतम आर्य, हर्ष सैनी, सुरेन्द्र मेहंदीरत्ता सहित अनेक पत्रकार मौजूद थे।

गौरतलब है कि अस्पताल में पिछले कई वर्षों से आंखों की जांच का यह खेल बदस्तूर जारी है और जांच के नाम पर लाखों के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं। विभाग के उक्त कर्मचारी की शह पर अस्पताल के बाहर दुकान चला रहे एक व्यक्ति को बुलाकर धड़ल्ले से आंखों की जांच कराई जाती है। उसके बाद मरीज को अपनी दुकान का विजिटिंग कर्ड दे दिया जाता है तथा साफ हिदायत दे दी जाती है कि चश्मा वहीं से लें।

क्या कहते हैं अधिकारी:

जब इस संबंध में अस्पताल के आला अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जांच कर रहे व्यक्ति को नहीं बुलाया जाता और न ही वह अस्पताल का कोई कर्मचारी है।

हो चुकी है कई बार शिकायत

ऐसा नहीं है कि अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों को इसकी कोई सूचना न हो। कई बार लोगों ने इसकी शिकायत अस्पताल के उच्चाधिकारी से लेकर स्वास्थ्य निदेशक से की जा चुकी है, लेकिन स्थानीय चिकित्सकों व कर्मचारियों के रहमो करम के चलते आज तक जाच करने वाले व्यक्ति का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका है।

 

रेवाड़ी से महेन्द्र भारती की रिपोर्ट।

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