भारत के किसी मीडिया संस्थान में विविधता दूर-दूर तक नहीं… (संदर्भ- रामनाथ गोयनका एवार्ड)

Prashant Tandon : रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार की इस लिस्ट को गौर से देखिये. पत्रकारिता में समाज में किस वर्ग का वर्चस्व है और किन्हें बाहर रखा गया, ये लिस्ट उसकी गवाही दे रही है. जब पत्रकारिका के गिरते स्तर पर बहस होती है तब ये भी देखना चाहिये कि न्यूज़रूम में सामाजिक संतुलन कैसा है.

अमेरिका या यूरोप के न्यूज़ चैनल देखिये वहां के घोर दक्षिणपंथी समाचार माध्यमों में भी आपको अफ्रीकी और एशियाई मूल के तमाम एंकर और पत्रकार दिखेंगे. भारत दुनिया भर में अपनी विविधता का नगाड़ा पीटता है पर यहां किसी भी मीडिया संस्थान में विविधता दूर दूर तक नहीं दिखाई देगी.

बने हैं अहल-ए-हवस मुद्दई भी मुंसिफ़ भी
किसे वकील करें किस से मुंसिफ़ी चाहें

वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन की एफबी वॉल से.

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