आरएसएस के कारण भारत को अब गपोड़ियों का देश कहा जाने लगा है!

Jagdish Singh-

आर एस एस से जुड़े और उनसे प्रभावित जन, देश को बदनाम करना बंद करें।

नासा ने ये मान लिया, वो मान लिया; अब तो अमेरिका वाले भी मान गये; इंग्लैंड के डाक्टर भी मान गये। नासा ने रिकार्ड किया सूरज से निकलती ओम की आवाज़, अंतरिझ में गूँजती ओम की आवाज़। नक़ली वीडियो, झूठे लेख, बे सिर पैर की अफ़वाहें। विदेशियों के सामने झूठे दावे। पुराणों के नाम पर कोरे दावे।

आप लोग पूरे देश को हँसी मज़ाक़ का पात्र बनाकर रख दिये हैं। लोग हम पर हंस रहे हैं। देश का अपमान कर रहें हैं आप लोग।

इस्कान वाली यूक्रेन की चार गोरी औरतों/ बच्चों की फ़ोटो डालकर लिख देंगे- अब तो अमेरिका, यूरोप सब जगह हिंदू धर्म का डंका बज रहा है। हालैंड में संस्कृत पढ़ना अनिवार्य हो गया है, जापान में गीता कोर्स में डाल दी गयी है।

बंद कीजिये यह सब। पहले लोग हमें सपेंरो, भिखारियों का देश कहते थे। मुश्किल से हमारी छवि सुधरी थी। अब आप लोग इसे झूँठे मक्कारों, फरेबियों, पाखन्डियों, गपोड़ियों, धर्मान्ध मूर्खों का देश बनाने पर तुल गये हैं। हाथ जोड़ कर विनती है। देश को अपमानित मत करें। इस तरह हम लोग विश्व ढग बनते जा रहें हैं।

कोई मेरा यह विनम्र निवेदन आर एस एस के उच्च पदाधिकारियों तक पहुँचा कर देश की सेवा करे। पत्रकार बंधु विशेष ध्यान दें। इससे बड़ी कोई देश सेवा नहीं हो सकती।

यहां आर एस एस का नाम लेकर ज़िक्र इसलिए किया है, क्योंकि उसकी प्राइमरी पाठशाला से निकले मोदी, आदमी की गर्दन पर हाथी का सिर लगाने को प्लास्टिक सर्जरी बताते हैं। एक मुख्यमंत्री बताता है, महाभारत काल में सेटेलाइटें, इंटरनेट मौजूद थे। रावण के विमान को पहला हवाई जहाज़ बताते हैं। ऐसे तमाम उदाहरण है, जिसमें इस पाठशाला से निकले लोग, ऊलजलूल बयान देते रहते है।

आईआरएस अफसर रहे जगदीश सिंह की एफबी वॉल से.

कुछ प्रतिक्रियाएं देखें-

अनिल धर्मदेश- सादर प्रणाम सर! लेख का पूरा आवरण स्वीकारते हुए मुझे इसमें सीधे तौर पर आरएसएस का नाम लिखे जाने पर आपत्ति है।आपको इसके स्थान पर अतिवादी या कट्टर हिंदूवादी संगठनों का जिक्र करना चाहिए था। सोशल मीडिया, विशेषकर व्हाट्सएप्प पर कई अतिवादी AV आते रहते हैं। मगर, यह RSS द्वारा वायरल किया जा रहा है, इसका क्या साक्ष्य है आपके पास? बल्कि इससे यह स्पष्ट होता है कि आपने RSS को बहुत दूर से देखा-जाना है। हाँ! हम नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय की बात करते हैं। हम ऐतिहासिक वैमानिकी विज्ञान की भी बात करते हैं। हमारा दावा है कि श्रीराम ने लंका विजय के लिए रामसेतु बनाया था। मगर… हमने कभी किसी अंधविश्वास को हवा नहीं दी है। बल्कि हम हमेशा तार्किक और वैज्ञानिक तथ्यों पर युवा शक्ति को जाग्रत करते आए हैं। यहाँ फर्क सिर्फ इतना है कि आप ‘लील्यो तार मधुर फल जानूँ’ पर फोकस कर रहे हैं। जबकि हमारा फोकस ‘युग सहस्र योजन पर भानू’ पर है। सहर्ष स्मरण करना चाहूंगा कि आज का समस्त अंतरिक्ष विज्ञान जिस गणित और गणितीय सिद्धांतों पर आधारित है, वह हमारे ज्योतिष शास्त्र का महज 05% हिस्सा भर है।

Jagdish Singh- आर एस एस का ज़िक्र इस लिए है, क्योंकि उसकी प्राइमरी पाठशाला से निकले मोदी, आदमी की गर्दन पर हाथी का सिर लगाने को प्लास्टिक सर्जरी बताते हैं। एक मुख्यमंत्री बताता है, महाभारत काल में सेटेलाइटें, इंटरनेट मौजूद थे। रावण के विमान को पहला हवाई जहाज़ बताते हैं। ऐसे तमाम उदाहरण है, जिसमें इस पाठशाला से निकले लोग, ऊलजलूल बयान देते रहते है।

Mahesh Chaturvedi- अमरीकी हमसे भी आगे हैं। उन्होंने ट्रंप जैसा नमूना देश चलाने के लिए चुन लिया था। अपना देश शंकर जी की बारात हैं यहां बैराइटियों की कमीं नहीं है। आपको ही बदलना होगा सर। हम सही-सही लोगों में सुधार की कोई आवश्यकता दिखाई नहीं देती है।

Narayani Prasad Singh- वे अपने को हर तरह से उत्तम मानकर चल रहे हैं, किसी की बात सुनते नहीं, कहीं आईटी सेल है, वही नोटिस लेकर कुतर्क करेगी।


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  • भड़ास तक अपनी बात पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

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