‘सभ्यताओं के संघर्ष’ की शुरुआत हो चुकी है, मुस्लिम उग्रवाद बनेगा तृतीय विश्वयुद्ध का कारण!

क्या यूरोप पर इस्लामी शासन होगा और क्या अमेरिका वहाँ परमाणु हमला कर मुस्लिमों का सफाया कर देगा?

इस्तांबूल (तुर्की), क्वेटा (पाकिस्तान), जलालाबाद (अफगानिस्तान), जकार्ता (इंडोनेशिया) आदि में हुए हालिया आत्मघाती हमलों ने एक बार फिर साबित किया है कि इस्लामी आतंकवाद अभी समाप्त होने वाला नहीं है। हालांकि अभी कुछ दिन पहले ही इसके कमजोर होने के अनुमान लगाये जा रहे थे लेकिन ऐसे हल्के हमलों की निरंतरता से इन आशंकाओं को बल मिलता है कि कहीं यह भयंकर तूफान से पहले की चेतावनी तो नहीं है। यह बात निश्चित रूप से कही जा सकती है कि इन आत्मघाती हमलों के लिए कम समझ वाले युवाओं को तथाकथित जेहादी शहादत के आकर्षक भ्रम-जाल में फंसा कर धार्मिक उन्माद का जहर दुनिया भर में फैलाने का दुष्चक्र अभी आगे भी जारी रहेगा। यदि निकट भविष्य में कथित जेहादी ताकतें किसी तरह शक्ति बटोरने में सफल हो जाती हैं, जिसकी संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता, तो जल्दी ही ऐसी अमानवीय घटनाओं का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो सकता है।

नया ईस्वी सन प्रारंभ हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है। इसके साथ ही इस साल को लेकर तमाम दुनिया भर के लिए चिंता का कारण बनी कुछेक भविष्यवाणियां भी लोगों का ध्यान अपनी ओर बरबस आकर्षित करती हैं। जिनमें प्रमुख रूप से अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे तथा राजनीतिक विश्लेषक सैमुअल फिलिप्स हटिंग्टन, सदियों पहले अपनी इन्द्रियातीत अनुभूतियों के आधार पर भविष्यवाणी करने वाले फ्राँसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस तथा आध्यात्मिक ज्ञान सम्पन्न भविष्यवक्ता बुल्गारिया की बाबा वेंगा के नाम से अधिक प्रसिद्ध नेत्रहीन महिला वेंगेलिया पांडेवा दिमित्रोवा के पूर्व-कथन शामिल हैं।

प्रो. सैमुअल फिलिप्स हटिंग्टन एक राजनीतिक विश्लेषक थे, अतः उनके पूर्वानुमान इसी पर आधारित थे। जबकि सदियों पहले फ्राँसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने धार्मिक उन्माद के रास्ते दुनिया के लिए तबाही लेकर आने वाले जिस तीसरे विश्वयुद्ध की भविष्यवाणी की थी, वह इन्द्रियातीत आध्यात्मिक अनुभूति पर आधारित थी। इसी प्रकार आध्यात्मिक अनुभूतिजन्य ज्ञान के आधार पर भविष्य बताने वाली बाबा वेंगा के अनुसार भी तृतीय विश्वयुद्ध का समय वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार सन्निकट ही दिखाई देता है।

प्रोफेसर सैमुअल फिलिप्स हटिंग्टन का अमेरिकी कूटनीति और राजनीति पर गहरा प्रभाव रहा है। अमेरिकी शासन व्यवस्था, लोकतंत्र, कूटनीति, सत्ता-परिवर्तन एवं आप्रवासी समस्या आदि विषयों पर 17 से अधिक पुस्तकें लिखने वाले हटिंग्टन की 1993 में प्रकाशित सबसे चर्चित और आज भी सामयिक पुस्तक ‘क्लैश ऑफ सिविलाइजेशन एण्ड रिमेकिंग ऑफ वर्ल्ड ऑर्डर’ (सभ्यताओं का संघर्ष) ही कही जाएगी।

18 अप्रैल, 1927 को न्यूयार्क में जन्मे हटिंग्टन अपने विचारों के कारण प्रारंभ से ही चर्चा में रहे। उनकी 1957 में सैनिकों और नागरिकों के सम्बंधों को व्याख्यायित करने वाली पहली प्रमुख पुस्तक ‘दि सोल्जर एण्ड दि स्टेट’ भारी विवादों के घेरे में रही किन्तु आज वह सैन्य-नागरिक सम्बंधों पर विचारण के लिए सबसे प्रभावशाली पुस्तक मानी जाती है। हटिंग्टन का 24 दिसम्बर, 2014 को 81 वर्ष की आयु में अमेरिका के मैसाचुसेट्स में निधन हो गया।

इस्लाम के प्रबल आलोचक रहे हटिंग्टन की मान्यता थी कि दुनिया के तीन चौथाई युद्ध मुस्लिमों के साथ दुनिया की विभिन्न सभ्यताओं को करने पड़े हैं। ईसाई, यहूदी, हिन्दू सभी के साथ मुस्लिम युद्धरत रहे हैं या अभी भी लड़ रहे हैं। इस्लाम एक युद्धोन्मत्त विचारधारा है और इसीलिए स्थानीय सेना तथा मुसलमानों के बीच अधिकांशतः दुरभिसंधि रहती है। सभ्यताओं के मध्य संघर्ष का उनका यह मत जहाँ दीर्घकाल से ईसाई-अमेरिका बनाम मुस्लिम-अरब के साथ हो रहे संघर्ष से पुष्ट होता है, वहीं ईरान-ईराक या ईराक के विभिन्न गुटों या फिर बहावी सुन्नी बनाम शिया, बोहरा, कादियानी आदि के मध्य निरंतर चल रहे संघर्षों से भी प्रमाणित होता है।

फिडेल कास्त्रो से लेकर चोमस्की व चे ग्वे वारा (जूनियर) आदि के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट तक इस्लाम को शाँति का धर्म बताने का असफल प्रयास करते रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति अहमदिनेजाद से हाथ मिलाने के बाद साम्यवादी बड़े तार्किक (?) तरीके से हटिंग्टन को गलत साबित करने के प्रयत्न करते रहे हैं। वस्तुतः इस्लाम और मार्क्सवाद में दो बड़ी विचित्र समानताएँ हैं—विस्तारवाद और खून-खराबा जिनका पृष्ठपोषण करने के लिए एक धर्म की ओट लेकर इस्लाम के प्रसार में जुटा हुआ है, तो दूसरा पूँजीवाद के विरोध के नाम पर। इन दोनों विस्तारवादियों की सत्ता दुनिया भर में जहाँ कहीं भी है क्या वहाँ लोकतंत्र और भिन्न मत रखने वालों का कोई अस्तित्व मिलता है? सत्ता प्राप्त करने के लिए दोनों ही विचारधाराऐं कत्ल-ओ-गारत से जरा भी परहेज नहीं करतीं; परन्तु यह बड़ी विचित्र बात है कि साम्यवाद जहाँ धर्म को अफीम बताता है, वहीं मुस्लिम कट्टरपंथी धर्म को अपरिहार्य मानते हैं।

मुस्लिम उग्रवादियों द्वारा अमेरिका पर 9/11 हमला, फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुई आतंकवादी घटनाऐं और रूसी विमान को मार गिराने की उग्रवादी कार्रवाई के बाद उत्पन्न स्थिति से हटिंग्टन की मान्यता और बढ़ गयी है। पहले ओसामा बिन लादेन और उसके बाद इस्लामिक स्टेट के कृत्यों ने हटिंग्टन की स्वीकार्यता को सर्वमान्य कर दिया है। मुस्लिम देशों में लोकतांत्रिक मान्यताओं के अभाव और विश्व के 30 से अधिक देशों में संघर्षरत मुस्लिमों के कारनामों से तो प्रो. हटिंग्टन, भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस तथा बाबा वेंगा की पूर्व घोषणाएं ही सही सिद्ध हो रही हैं।

बहरहाल, फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुए हमले को लेकर जिस तरह रूस ने इस्लामी आतंकी संगठन आइएस के विरुद्ध सैन्य अभियान की शुरुआत कर दी है और यूरोपीय यूनियन, अमेरिका, इंग्लैण्ड आदि देशों ने इस आतंकवादी घटना के विरुद्ध आवाज बुलंद की है, वह अभूतपूर्व है। हालांकि दुनिया के तीन दर्जन से भी अधिक मुस्लिम देशों ने पेरिस की इस घटना की न केवल निंदा की, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध प्रभावी तरीके से निपटने की जरूरत भी बताई है। फिर भी अभी यह कहना ठीक न होगा कि उग्र इस्लामी ताकतों के आगे नरम रुख वाले मुस्लिम देशों की नीयत बदलेगी नहीं।

बाबा वेंगा इन दिनों विशेष चर्चाओं में हैं। इस्लामिक स्टेट के खतरे के चलते उनकी तमाम भविष्यवाणियां चर्चा में आ गई हैं। उनको मानने वाले लोग खूंखार आतंकी संगठन आइएसआइएस. के उदय और प्रभाव को उनकी भविष्यवाणी के रूप में देख रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि आने वाला दशक यूरोप के लिए संकट भरा है।

अपनी इन्द्रियातीत अनुभूतियों के आधार पर भविष्यवाणी करने वाली एक महिला ने जिस तरह भविष्य का बहुत ही स्पष्ट चित्रांकन किया है, वह अत्यंत डरावना है। बाबा वेंगा के नाम से प्रसिद्ध इस महिला ने नास्त्रेदमस की इस बात का समर्थन करते हुए बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में पूरे यूरोप पर उग्रवादी मुस्लिमों का कब्जा होगा। यूरोप के इस्लामीकरण की प्रक्रिया 2016 में शुरू होगी जो 2043 तक यूरोप को पूर्णतया मुस्लिम आबादी में बदल देगी और फिर 2066 में भीषण नर-संहार होगा। यूरोप में ऐसी तबाही होगी कि वहाँ रहने वाला कोई नहीं बचेगा।

उनके अनुसार 2016 में यूरोप पर कट्टरपंथी इस्लामी उग्रवादियों का हमला होगा और पूरे यूरोप में तबाही मच जाएगी। पूरे महाद्वीप में चले भीषण संघर्ष में विनाश का सिलसिला कई साल चलेगा जिसमें संपूर्ण यूरोप को न केवल जान-माल का भारी नुकसान होगा बल्कि वहाँ आबादी लगभग समाप्त हो जायेगी। उल्लेखनीय है कि अरब जगत के अनेक स्थानों पर कब्जा करने के साथ ही इस्लामिक स्टेट ने यूरोप के दरवाजे पर दस्तक दे दी है।

अतः कहा जा सकता है कि कट्टरपंथियों के युद्धोन्माद का यह सिलसिला यदि थमा नहीं तो यह निश्चित है कि प्रोफेसर सैमुअल फिलिप्स हटिंग्टन, नास्त्रेदमस तथा बाबा वेंगा की तीसरे विश्वयुद्ध सम्बंधी भविष्यवाणियां जल्दी ही सच साबित हो जायेंगी।

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Comments on “‘सभ्यताओं के संघर्ष’ की शुरुआत हो चुकी है, मुस्लिम उग्रवाद बनेगा तृतीय विश्वयुद्ध का कारण!

  • Dear Shyam ji,
    aapka lekh kafi acha laga keonki aap ne kafi mehnat ki hogi research karney me, 1-2 baten hain usko point out karna chahunga aap k lekh se aisa laga jaise puri muslaman kaoum zimedar hai aaj jo ho raha hai. Ek musalman honey k natey main kabhi aatankvad ko samarthan nahi kiya keonki ye zihad nahi kayrta hai jo ho raha hai arey zihad to samney se hota hai maidan e jang me ja k pichey se kiye huey war ko zihad kah dengey ye bas aatankvad hai jisey zihad bataya jaa raha hai…aur rahi baat sabhyataon ki aanat honey ki to ye to sabhyata ka itihas raha hai hai usey aant hona hi padta hai aur fir ek nai sabhyta ka uday hota, aaj musalman europe playan kar rahey hain per is k liye zimeddar koun hai thora isko bhi dhyan me rakhiye, Iraq, Kuwait, Libya ya Afghanistan me america ka bhumika ko bhi dhyan me rakhiye, acha khasa shanti se philistine ji raha tha us k shanti ko bhang kar ek naya country israel bananey walon k barey me bhi likhiye.

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  • ram awtar gupta says:

    lekh ka moolbhavishyawani hai jise rawat ji ne collect kiya hai,sartaj ji ,abhi ki paristhitiya to sabke samne hai sangarsh isai aur muslim atankwad ke bich hai is se puri kaum doshi nahi ho jati hai

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  • Shams Tamanna says:

    मुझे आज तक इन तथाकथित भविश्वेत्तयों की एक बात समझ में नहीं आई कि यह लोग इंसानियत की भलाई के लिए भविष्य बताते हैं या उसे मिटाने के लिए बोलते हैं. अगर इंसानियत की भलाई के लिए भविष्य बताते हैं तो क्यों नहीं बताते कि फलां दिन फलां देश में इतने बजकर इतने मिनट पर भूकम्प आएगा अथवा कोई प्राकृतिक आपदा आएगी। ताकि इंसान खुद को बचा सके या सरकार को उनके बचाव के लिए वक़्त मिल सके. सटीक समय नहीं बता सकते क्यूंकि यह भगवान नहीं हैं. जब नहीं कर सकते तो यह फ़ालतू बकवास क्यों करते हैं. सच मानिये मैं नास्त्रेदमस और उनके जैसे तथाकथित भविश्वेताओं की भविष्यवाणी को जोक्स से ज़्यादा कभी नहीं समझता। टाइम पास करने के लिए पढता हूँ और खूब हँसता हूँ. ऐसा लगता है सर्कस के जोकरों को लाइव देख रहा हूँ इस डायलॉग के साथ-हाँ जमूरे बता तुझे क्या नज़र आ रहा है, और जमूरा तोते की तरह बताना शुरू कर देता है.

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