गुरुडम से सावधान : लंपट गुरुओं ने तो अपनी पुत्री समान युवा शिष्याओं को भी नहीं छोड़ा!

यह सत्य है कि सद्गुरु के बिना आत्मज्ञान संभव नहीं है, अतः आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए इनकी शरणागति अत्यावश्यक है, परंतु यह भी सत्य है कि वर्तमान समय में कलि के दुष्प्रभाव के फलस्वरूप सर्वत्र छाये घटाटोप अंधकार के कारण मनुष्य अत्यंत विचारहीन हो चला है। उसे सत्य असत्य, और असत्य सत्य भासता है जिससे वह न करने योग्य कर्म तो तुरन्त कर डालता है और करने योग्य कर्म का उसको किंचित्मात्र भान तक नहीं हो पाता।

उच्चतम न्यायालय को ठेंगा दिखाया उत्तराखण्ड सरकार ने

शराब के कारण होने वाली सड़क-दुर्घटनाओं को कम करने की मंशा से उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये हालिया फैसले के बाद जिस प्रकार शराब-लॉबी के दबाव में उत्तराखण्ड की प्रदेश सरकार ने आनन-फानन प्रदेश के राष्ट्रीय राज-मार्गों को राज्य और राज्य-स्तरिय सड़कों को जिला-मार्ग घोषित कर दिया उससे निश्चित रूप से न्य़ायालय का मान घटा है। इससे न केवल न्याय का मूल भाव ही समाप्त हो गया, बल्कि न्यायालय की सारी प्रतिष्ठा ही धूल-धूसरित कर दी गई। आश्चर्य की बात तो यह है कि उच्चतम न्यायालय भी इस मनमानी को मूक-दर्शक बन आँख-कान मूँद कर अनदेखा-अनसुना कर रहा है। क्या सरकार का यह कृत्य न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं है?

पत्रकारिता में शौक से आये हो या इसे अपना करियर बनाना चाहते हो?

‘भ्रष्ट इंडिया कंपनी’ से मुक्ति का मार्ग ‘आजादी का दूसरा संघर्ष’ है…  छब्बीस जनवरी बीते एक माह गुजर गया है और पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव का अंतिम दौर चल रहा है। इस एक महीने के अंतराल में भारतीय लोकतंत्र के मौजूदा स्वरूप को लेकर अनेक तरह के विचार हवा में तैरते रहे। यह पहला मौका है जब चुनाव में न तो राष्ट्रीय फलक पर और न क्षेत्रीय या स्थानीय स्तर पर ही कोई मुद्दा चर्चा में है। इसके बरअक्स निचले स्तर के सामान्य चुनावी प्रचारकों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के बडे़ नेताओं, यहाँ तक कि प्रधानमंत्री की भी, भाषा-शैली के घटते स्तर को लेकर हर जागरूक व्यक्ति चिंतित और शर्मसार नजर आ रहा है।

Snapdeal जैसी कंपनियां कैसे ठग रही हैं भारतीयों को, सुनिए एक पीड़ित पत्रकार की जुबानी

देश में कॉरपोरेट अंधेरगर्दी के जरिए अरबों का धन्धा ग्राहक से अपना पता, पहचान और चेहरा छिपा कर किया जा रहा है!

क्या आपको पता है देश में ई-बिजनैस की दिग्गज कंपनी स्नैपडील अपना पता, पहचान और चेहरा छिपाते हुए सालाना अरबों रुपए का कारोबार कैसे कर रही है? कमाल तो यह कि इसके व्यापार में सहयोगी कंपनियों का भी यही हाल है। कॉरपोरेट क्षेत्र में (खास तौर पर स्नैपडील में) इन दिनों एक अजीब गोरखधंधा चल रहा है जिसकी जानकारी केवल भुक्तभोगी को ही हो सकती है, लेकिन उसके पास इसका कोई इलाज नहीं है।

संवेदनशून्य हो चुकी राजनैतिक व्यवस्था का नमूना है देहरादून में प्रस्तावित एक नया विधानसभा भवन!

उत्तराखण्ड विधानसभा हेतु एक नया भवन देहरादून के रायपुर में बनाने के लिए एन.बी.सी.सी. द्वारा जारी टेंडर से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार का इरादा गैरसेंण को राजधानी बनाने का नहीं हैऔर वह देहरादून से राजधानी को अन्यत्र नहीं ले जाना चाहती। उसने न केवल रायपुर में विधानसभा भवन, बल्कि सचिवालय भवन बनाने के लिए भी टेंडर भी जारी कर दिया है। देहरादून में पहले से ही विधानसभा भवन और सचिवालय भवन होते हुए भी दोबारा देहरादून में ही विधानसभा भवन और सचिवालय भवन निर्माण के टेंडर जारी करने से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार का पक्का इरादा देहरादून को ही प्रदेश की स्थायी राजधानी बनाने का है। सरकार का यह फ़ैसला पर्वतीय क्षेत्र के विकास हेतु आमजन की गैरसेंण को राजधानी बनाने की इच्छा के खिलाफ़ है। 

‘सभ्यताओं के संघर्ष’ की शुरुआत हो चुकी है, मुस्लिम उग्रवाद बनेगा तृतीय विश्वयुद्ध का कारण!

क्या यूरोप पर इस्लामी शासन होगा और क्या अमेरिका वहाँ परमाणु हमला कर मुस्लिमों का सफाया कर देगा?

इस्तांबूल (तुर्की), क्वेटा (पाकिस्तान), जलालाबाद (अफगानिस्तान), जकार्ता (इंडोनेशिया) आदि में हुए हालिया आत्मघाती हमलों ने एक बार फिर साबित किया है कि इस्लामी आतंकवाद अभी समाप्त होने वाला नहीं है। हालांकि अभी कुछ दिन पहले ही इसके कमजोर होने के अनुमान लगाये जा रहे थे लेकिन ऐसे हल्के हमलों की निरंतरता से इन आशंकाओं को बल मिलता है कि कहीं यह भयंकर तूफान से पहले की चेतावनी तो नहीं है। यह बात निश्चित रूप से कही जा सकती है कि इन आत्मघाती हमलों के लिए कम समझ वाले युवाओं को तथाकथित जेहादी शहादत के आकर्षक भ्रम-जाल में फंसा कर धार्मिक उन्माद का जहर दुनिया भर में फैलाने का दुष्चक्र अभी आगे भी जारी रहेगा। यदि निकट भविष्य में कथित जेहादी ताकतें किसी तरह शक्ति बटोरने में सफल हो जाती हैं, जिसकी संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता, तो जल्दी ही ऐसी अमानवीय घटनाओं का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो सकता है।

यशवंत सिंह परमार के पासंग भी नहीं उत्तराखण्ड के पाखंडी नेता

पूरे पाँच वर्ष लोकसभा सदस्य और उससे पूर्व इतने ही साल विधायक रहते प्रदीप टम्टा ने गैरसैंण को उत्तराखण्ड की राजधानी बनाने के लिए कभी कुछ नहीं किया, परन्तु अब इन्हें उत्तराखण्ड की आत्मा के गैरसैंण में बसने के सपने आ रहे हैं। आजकल ये कहते हैं कि ‘राजधानी गैरसैंण में स्थापित किये बगैर प्रदेश के समग्र विकास व प्रदेश गठन की जनाकांक्षाओं को साकार नहीं किया जा सकता। उत्तराखण्ड की तमाम समस्याओं का समाधान प्रदेश की राजधानी गैरसैंण में बनाकर ही किया जा सकता है।’ जबकि इन्हीं महाशय की कारगुजारियों के कारण भाजपा ने वर्ष 2000 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पूरा हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र ‘उत्तरांचल’ में मिला कर इसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया था।