सहारा समय न्यूज चैनल की हालत बहुत खराब हो चुकी है… सैलरी दो महीने से नहीं आई… बताया जा रहा है कि इसरो का करीब 7 करोड़ से ज्यादा बकाया होने के चलते ब्यूरो और ओबी व्हीसेट बंद हो गए हैं… पहले ही टाटा स्काई सहित दूसरे केबिल ऑपरेटरों ने पैसा न मिलने पर डिस्टीब्यूशन बंद कर दिया है… पिछले एक हफ्ते से चैनल में तनाव जारी है…
बताया जा रहा है कि कल सीईओ अरूप घोष ने धमकी देते हुए कहा कि सहारा श्री से बात हुई है और उन्होंने कहा है कि चैनल की फिलहाल हालत ऐसे ही रहेगी… सैलरी कब आएगी या स्थिति कब सुधरेगी, पता नहीं… आप सब अनुशासनहीनता कर रहे हैं, दिन में दो तीन बुलेटिन लेकर. यदि ऐसा करेंगे तो हमें चैनल लॉक डाउन करना पड़ेगा…
इस पर चैनल कर्मियों ने भी काम बंद कर दिया है और कहा है कि हमारा 17 महीनों का जो बकाया है, उसे दे दिया जाए और चैनल बंद कर दिया जाए… हालत यह हैकि चैनल सीईओ अरूप घोष और एडिटर विजय त्रिवेदी का बुलेटिन एक हफ्ते से नहीं गया है…
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durga kumar
June 5, 2018 at 12:58 pm
ब्रेकिंग … सहारा मीडिया में अप्रैल व मई दो माह बीत जाने के बाद भी वेतन नहीं मिला.कर्मचारी त्राहिमाम कर रहे हैं. दूसरी तरफ सुब्रत राय के जन्म दिन 10 जून को भव्य तरीके से मुम्बई में 5 स्टार होटल में मनाने के लिए 100 करोड़ खर्च करने की तैयारी चल रही है. लखनऊ से कई जहाज बुक होकर कार्यकर्ता व एजेन्टों को मुम्बई ले जाने की तैयारी चल रही है.
सुनील कुमार
June 5, 2018 at 4:18 pm
सहाराकर्मियों को सबसे पहले चैनल के भीतर बैठे सबसे घटिया और निम्न स्तर के लोगों को बाहर फेंकना होगा…वो दल्ला खुद तो कमीशन लेकर मस्त रहता है और दूसरों की सैलरी के मामले की जब बात आती है तब वह, प्रबंधन को चाटने लगता है।
Bharat Mata
June 6, 2018 at 3:46 am
Sahara ke shirsh padadhikariyon/abhibhawkon ka asli chehra samne aa gaya hai. Desh ke sabse bade pariwar ke malik sabse bada shoshak sabit ho gaya hai. sabhi karamchariyon ka ek ek pai ka hisab kijiye aur tala lagayiye. paisa nahi dengen to badi ghatna hone ki aashanka hai.
पुष्कर सिन्हा
June 6, 2018 at 4:18 am
सहारा में ये हालात एक हफ्ते से नहीं बल्कि कई सालों से हैं..ज्यादातर कम सैलरी वाले लोग जो वाकई ईमानदारी से काम करते थे..ग्रुप को छोड़कर जा चुके हैं…अब सहारा में केवल वही लोग टिके हुए हैं जिनकी सैलरी काफी मोटी है..जिन्हें सिर्फ आराम चाहिए…जिन्हें और कहीं काम नहीं है…ये मैनेजमेंट भी काफी अच्छी तरह से समझ रहा है..जिसकी वजह से ये धमकियां दी जा रही हैं…सच्चाई तो ये है कि नौकरी छोड़ने के बाद भी सहारा लोगों को परेशान करना नहीं छोड़ रहा है…कर्मचारी की बकाया सैलरी तो दूर की बात है उसका पीएफ भी नहीं दिया जा रहा है….ज्यादातर अधिकारी अपना सारा ड्यूस क्लियर कर चुके हैं बल्कि कंपनी का ही एडवांस पैसा अधिकारियों ने उठा रखा है….अभी फिलहाल जो भी मारपीट और गाली गलौच की घटनाएं हो रही है वो भी सिर्फ अधिकारियों का खेल है…दो ग्रुप सिर्फ मेरा बच जाए इसी जुगत में लगे हुए हैं….
अरुण श्रीवास्तव
June 7, 2018 at 9:46 pm
सहारा में सैलरी का है तो अब यह बनाया गया है या वास्तव में है कहा नहीं जा सकता। जबसे मुखिया जेल में गए हैं तबसे यह संकट है। टीवी चैनल की कह नहीं सकते प्रिंट में बहुतों का वेतन काफी कम है। 11-12 साल से काम करनेवाले स्ट्रिंगर का मानदेय बामुश्किल 15 हजार होगा। उन्हें भी ना समय पर मानदेय मिल रहा है और ना पूरा। बड़ी संख्या में लोगों को निकाल दिया गया या ऐसे हालात पैदा कर दिये गए कि वो खुद छोडकर चले जाएं। जो बचे हैं वे कहीं जाने की स्थिति में हैं नहीं। बहुत से कर्मचारी रिटायर होने के करीब हैं। हलांकि समय-समय पर सब्जबाग दिखाया जाता रहा।
बेवकूफ बनाने की “काबिलियत अगर किसी में है तो वह है सहारा प्रबंधन। इसने महीनों से वेतन ना देने के बावजूद अपने कर्मचारियों से हजारों रुपए प्रति कर्मचारी से जमा करा लिये कि तीन साल बाद 15-18% ब्याज के साथ वापस करेंगे किया बहुत कम लोगों का वो भी मूलधन। ब्याज के लिए फिर सब्जबाग दिखा दिया।
देनदारी से क ई गुना ज्यादा चल-अचल संपत्ति का दावा करने वाला सहारा इंडिया परिवार की माली हालत इतनी खराब है कि छोटे छोटे कर्मचारियों को भी वेतन ना दे सके। टीवी पर विज्ञापन देने के लिए पैसे हैं पर परिवार के सदस्यों के लिए नहीं।
अरुण श्रीवास्तव।