साजिद सैफी जैसे सैकड़ों हरामियों को गोदी मीडिया ने जना है, ये जितने भी मुसलमान दाढ़ी टोपी लगा कर फलां और ढिकां संस्था या संगठन के चेयरमैन बन कर बैठते हैं, इन्हें इनका पड़ोसी भी नहीं जानता कि ये साहब मेरे बगल रहते हैं…

मोहम्मद अनस-
भाजपा और गोदी मीडिया की ताकत है जो उसने पुरानी दिल्ली के एक हज-उमरा वाले ट्रैवल एजेंट को दाढ़ी-टोपी में ऐसे पेश किया कि वह पूरे मुल्क के मुसलमानों का चेहरा बना दिया गया। साजिद सैफी से वह साजिद रशीदी बना और फिर टीवी ने लिखना शुरू किया मौलाना।
साजिद को पुरानी दिल्ली से खदेड़ा गया तो उसने नोएडा में ठौर लिया। वो दौर था, मीडिया का गोदी मीडिया में परिवर्तित होने का। 2016 में साजिद पर मैंने ऑल्ट न्यूज़ (तब नहीं था) के ज़ुबैर के साथ मिल कर उनके (सूसू स्वामी अनऑफिशियल) व्यंगात्मक पेज पर बारह मिनट का लाइव किया था। मैंने बताया था कि कैसे साजिद ने पुरानी दिल्ली में फ्रॉड किया, वहां से मारपीट कर भगाया गया तो एक एनजीओ (संस्था) बनाई। ऐसी संस्था जिसमें एक दर्जन लोग भी नहीं जुड़े उसे ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन का नाम गोदी मीडिया देने लगी।
जिस साजिद सैफी के साथ पांच मस्जिद के इमाम नहीं जुड़े उसे मीडिया ने पूरे भारत की मस्जिदों के इमामों का अध्यक्ष बना डाला। उस लाइव में मैंने बताया था कि साजिद सैफी ने फेसबुक पर पोर्न स्टॉर के पेज लाइक किए हुए हैं। और भी बहुत कुछ था, वह तब के दर्शक और जनता के लिए बिल्कुल अलग था कि ऐसे दाढ़ी टोपी वाला ‘मौलाना’ भला इतनी घटिया हरकत कैसे कर सकता है। लेकिन तब से लेकर अब तक गंगा में बहुत पानी बह चुका है। अब तो पूरा देश ही टीवी पैनल में बैठने वाले दाढ़ी टोपी और मुस्लिम स्कॉलर्स को पहचान चुके हैं।
साजिद सैफी द्वारा आदरणीया डिंपल यादव जी पर जो टिप्पणी की गई उसमें साजिद का रोल बस कठपुतली बराबर है, असली गुनाहगार है उस पैनल को होस्ट करने वाला अर्नव गोस्वामी के चैनल का एंकर ऐश्वर्य कपूर, फिर उसे वॉयरल करने वाले लोग। एक छुटभईये की बात को देश का विमर्श बना देना, हमारी मानसिक दरिद्रता है, कुछ और नहीं।
यह कोई ढकी छिपी बात नहीं है कि राजनैतिक दल के प्रवक्ता को छोड़ कर, पैनल में बैठने वाले हर प्रोपगेंडिस्ट को पांच हजार से लेकर बीस हजार रुपए तक चैनल देते हैं। पिक एंड ड्रॉप की सुविधा साथ में चाय नाश्ता। टीवी पर बैठ कर कोई भी नीच और गदहा, बिना किसी स्क्रूटनी के कुछ भी कह देगा, देश उस पर बहस करे, उसे महत्व दे, धन्य है ऐसा देश और देश के लोग।
आज मेरी एक बात नोट कर लीजिए, मीडिया के पास दिखाने और सुनाने के लिए कुछ नहीं बचा है, क्योंकि सरकार ने ऐसी सेंसरशिप लगाई है कि वे सिवाय हिंदू-मुस्लिम के कुछ और दिखा भी नहीं सकते। साजिद सैफी जैसे सैकड़ों हरामियों को गोदी मीडिया ने जना है, ये जितने भी मुसलमान दाढ़ी टोपी लगा कर फलां और ढिकां संस्था या संगठन के चेयरमैन बन कर बैठते हैं, इन्हें इनका पड़ोसी भी नहीं जानता कि ये साहब मेरे बगल रहते हैं।
फ्लैटों से निकल कर चैनल की भेजी कार में बैठ कर स्टूडियों तक जाना और फिर वापस फ्लैट आ जाना, बस इतनी इनकी पहचान है। न तो ये स्कॉलर हैं न तो मुसलमानों की किसी जमात या मुस्लिमों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधित्वकर्ता, ये स्याले गोदी मीडिया की गंदी पैदाइश भर हैं।
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