सकारात्मक रहिये!

रामा शंकर सिंह-

खाँसी बुखार दर्द शुरु हुआ है? सकारात्मक रहिये, दवाई शुरु कर दीजिये!

दवाईयॉं बाज़ार से ग़ायब हैं या बहुत महँगी मिल रही हैं ?
सकारात्मक रहिये , लाइन में लगे रहिये , जगह जगह ढूंडिये, विधायक सांसद जी से गुहार करिये ! घर का एक सदस्य इसी काम पर लगाये रखिये, चार पाँच दिन में मिल ही जायेंगी । सकारात्मक बने रहिये।

बुखार बढ़ गया है , साँस लेने में तकलीफ़ हो रही है ?
सकारात्मक रहिये , ऐंबुलेंस बुलाइये आठ दस घंटे में भी न आये तो कार में , ठेले पर रेहडी पर रिक्शा पर जैसे भी हो अस्पताल पहुंचियें । सकारात्मक रहिये। लाइन में लगे रहिये।नकद एडवांस भुगतान का इंतज़ाम करिये।

बैड नहीं मिल रहा?
सकारात्मक रहिये। मिल जायेगा । सब्र करिये , धीरज रखना ज़रूरी है। जैसे बैड ख़ाली होगा आपको मिल जायेगा। तब तक बाहर सड़क पर लेटे रहिये ।सकारात्मक बने रहिये

सांसे टूट रही है , बेहद तकलीफ़ है ?
सकारात्मक बने रहिये । ऑक्सीजन का इंतज़ाम हो रहा है। तब तक फेफड़ों का सीटी स्कैन करा लाइये । अस्पताल को किया अग्रिम भुगतान ख़त्म हो गया है। दो लाख अभी और जमा कराइये , अभी तत्काल ।

हालतगंभीर है , क्रिटिकल हैं ?
सकारात्मक बने रहिये। वेंटिलेटर पर रख दिया है। अब ईश्वर से प्रार्थना करिये । परिवार के सदस्यों को बाहर जा कर बैठने के लिये कहिये। आईसीयू में कोई नहीं आ सकता( सिवाय अंजना ओम कश्यप के ) । वेंटिलेटर का प्रतिदिन साठ हज़ार का ख़र्चा अलग से जमा करवा दीजिये जल्दी से। सकारात्मक बने रहिये

——-: देखिये हमने तीन दिन वेंटिलेटर पर रखा , पूरी कोशिश की पर होनी को नहीं टाल पाये। मृत्यु का आख़िरी कारण हार्ट अटैक है, कोरोना का सर्टिफिकेट भी मिल जायेगा। बिल देकर लाश ले जाइये। लेकिन सकारात्मक बने रहना जरूरीहै। अंतिम संस्कार आजकल सरकार करवा रही है। दाह संस्कार की जगह जलसमाधि की भी सुविधा है।

सर! डॉक्टर सर! हमारे परिवार का वो सदस्य भी बुखार खॉंसी से पीड़ित हो गया है जो इनकी देख भाल करता था , दवाई , भोजन लाता था !

सकारात्मक बने रहिये ! लाइन में आइये , बैड का इंतज़ार करिये , एडवांस जमा कर दीजिये। सकारात्मकता बेहद ज़रूरी है। नकारात्मकता से विचलित हो जाते हैं दूसरे मरीज इसलिये हर मरीज़ को सकारात्मक होना ज़रूरी है।

( इस देश ने जब जब दिशाहीन सकारात्मकता ओढ़ी , यह ग़ुलाम होता गया है।
जिसे नकारात्मकता कहा जाता है उस नागरिक बोध ने आज़ादी दिलाई , सरकारें बदलीं और लोकतंत्र मज़बूत हुआ है। इसलिये फ़र्ज़ी सकारात्मकता को एक जोर की लात मारिये और अपने अधिकारों को सदैव की तरह लड़ कर लीजिये। जब सरकारें जनता की नकारात्मकता की चिंता करेंगी तभी समाज सही मायनों में सकारात्मक परिणाम देने वाली सरकारों को बनाता बिगाड़ता रहेगा। सरकारें बनें या बिगड़े पर देश समाज हमेशा बना रहना चाहिये )

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