जन्मना मुसलमान वानखेड़े साहब क्या फर्जीवाड़े में जेल जाएँगे!

पंकज मिश्रा-

ऐसा लगता है , नवाब मलिक ने खासा होमवर्क कर रखा है | उनके खुलासे एक दिन में जुटाई सामग्री के आधार पर नही है | जिसके दामाद को कमर्शियल क्वांटिटी के ऐसे केस में बुक किया गया हो , जिसमें बाद में पता चले कि जब्तशुदा माल गांजा नही बल्कि सुगंधित तम्बाकू है , यानी वह न तो नारकोटिक्स ड्रग है न साईकोट्रॉपिक substance अर्थात NDPS ACT applicable ही नही है और इस बिना पर उसे 8 महीने जेल में रखा गया हो तब कोई भी ससुर हो , वह अपनी हैसियत भर तो अगले के खिलाफ सुबूत इकट्ठा करेगा ही |

हालिया नारकोटिक्स केस का तो NCB जैसी प्रीमियर एजेंसी पूरा कबाड़ा कर दिया है , SOP FOLLOW करना तो दूर , बेसिक लेवल यानी मिनिमम mandatory रिक्वायरमेंट में भी तमाम ब्लंडर्स किये है | मेरिट पर तो वह केस एक दिन भी सस्टेन नही करेगा | फिलहाल उंस पर कुछ नही कहना …नवाब मलिक द्वारा प्रस्तुत किये जा रहे केस से सम्बंधित खुलासों को छोड़ दे वह मैटर तो कोर्ट में है ही …..

लेकिन , लेकिन लेकिन , उनके बर्थ सर्टिफिकेट वाले आरोप में यदि जरा भी सच्चाई है यानी वानखेड़े साहब जन्मना मुसलमान थे और बाद में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिये नौकरी पा ली तो यह सबसे गम्भीर आरोप है | यह सही सिद्ध हुआ तो नौकरी तो जाएगी , जाली सर्टिफिकेट में IPC का अपराध बनेगा , तनख्वाह रिकवर होगी और भी अन्य अनेक मुकदमे बनेंगे , कहीं इनके द्वारा पकड़े गए बरी हुए आरोपी उल्टा मुकदमा करे , हर्जाने से लेकर NDPS ACT में prosecution तक तब स्थितियां पता नही क्या करवट लेंगी ….

मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा बड़ा सच छिपाने की कूवत इस स्तर पर जनरली कोई नही रखता , फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर नौकरी के हजारों केसेस रोज सुनाई देते है मगर वह सब प्राइमरी स्कूल के मास्टरों , किसी विभाग में बाबू और चपरासी लेवल पर तो सुनाई और दिखाई देता है परंतु UPSC में मैंने कभी नही सुना | फिर कोई भी IRS इतना समझदार तो होगा ही कि यदि वह जाली सर्टिफिकेट पर सेलेक्ट हुआ हो तो वह कत्तई किसी भी कंट्रोवर्सी में नही पड़ेगा , MEDIA GLARE और LIME LIGHT से दूर रहेगा , किसी भी सेंसिटिव POSTING से दूर रहेगा क्योंकि वह खुद ही खोटा सिक्का है जो जब तक बैंक में जमा है तब तक ठीक , उंस पर ब्याज मिलेगा लेकिन यदि वह चलन में आया तो तत्काल उसका खोटापन जाहिर हो जाएगा …

कोई भी IRS ऐसा ब्लंडर नही करेगा , नौकरी सबको प्यारी होती है , इससे ही लगता है कि प्रथम दृष्टया समीर वानखेड़े पर जो सबसे संगीन आरोप लगता है वह बाद में PROVE न हो सके ….

और यदि ऐसा नही होता तो यह फर्जीवाड़े का अब तक का सबसे चौंकाने वाला दृष्टांत बनेगा ..


शीतल पी सिंह-

शादी की तब मुसलमान थे। नौकरी की दरख्वास्त में दलित हो गये। रिजर्व कोटे से अफसर बन गए। मामला फंस गया है, समीर दाऊद वाकड़े साहेब!

आपके ख़िलाफ़ सचमुच के ज़िंदा सबूत मौजूद हैं समीर दाऊद वानखेड़े साहेब! जब 2006 में आपका निकाह पढ़ाया गया तब आप ही नहीं बल्कि आपके बाप यानि दाऊद सीनियर भी मुसलमान थे। नौकरी हासिल करते समय आपने चोला बदला।

आपने “दलित” होने का सर्टिफिकेट बनवाया और कोटे से IRS चुन लिए गए। 2016 में दो बच्चों की माँ को आपने तलाक़ दिया और 2017 में ही एक अभिनेत्री से विवाह करके पूरे हिंदू बन गए!

जब तथ्य सबूतों के साथ आवाज़ दे रहे हैं तब आप दिल्ली में आक़ाओं से बचाने की गुहार करते मिल रहे हैं!

इतना क़ानून तो आप जानते ही होंगे कि जालसाज़ी के जाति प्रमाण पत्र पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में कौन कौन सी धाराओं में आप उसी जेल में पहुँच सकते हैं जहां बड़े बड़े लोगों को छोटी छोटी बात को बड़ी करके आप भेजा करते थे!

मिलिए उन क़ाज़ी साहेब से जिन्होंने समीर दाऊद का निकाह पढ़ाया था। ये है लिंक- https://www.facebook.com/100003230068807/posts/4438119509639007/?d=n

अमरेन्द्र सिंह-

वैसे इस डॉक्युमेंट का NCB के केस से क्या लेना देना? समीर वमखेड़े ने एक शादी मुस्लिम महिला से की थी, जिसका बाद में डिवोर्स हो गया। उसके बाद उनका विवाह उनकी वर्तमान पत्नी के साथ पूरे हिन्दू रीतिरिवाजों के साथ हुआ।

शेष समीर के पिता जी का बयान भी आ चुका है। जिससे यह मामला खत्म हो चुका है।

समीर चूंकि पिछड़ी जाति से है और उन्होंने मजबूत जातियों वालो पर कानूनी कार्यवाही की है इसी लिए ये शक्तिशाली लोग एक पिछड़ी जाति के अधिकारी पर अनुचित दबाव बना रहे हैं!

वैसे क्या कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष बताएंगी कि उनके विवाह के समय उनका धर्म क्या था? वर्तमान में उनका और उनके पुत्र का धर्म क्या है?

प्रदीप जैन-

कानून को धता बता बार बार अपने फायदे को इस्तेमाल करना अपराध नहीं क्या? जब मौका लगे सेक्युलर परिवार बनने की दुहाई दो जब मौका लगे संघी राष्ट्रभक्त बन जाओ। ये काफी है आदमी के गिरे चरित्र को समझने को।

जब बाप ने मुस्लिम बन शादी की तो औलाद भी मुस्लिम पैदा हुई फिर मुस्लिम से ही शादी की, फिर नौकरी करने को हिन्दू बन जाना (और शादी करना) और दलित बन जाना क्या कहलायेगा?
तमाशा समझ रखा है कानून को!

अमरेन्द्र सिंह-

ये आप महाराष्ट्र के समीर वानखेड़े मंत्रायल के मंत्री नवाब मलिक का नरेटिव बोल रहे हैं। यदि इतना ही ये सब गैर कानूनी है तो मन्त्री जी कोर्ट क्यो नही जाते!

बाकी बातोलेबाज़ी करनी है तो प्रेस कांफ्रेंस और 4-5 कार ले।

यदि देश में क्रिश्चियन मां और पारसी पिता की संतानें दत्तात्रेय गोत्र वाले ब्राह्मण हो सकते है तो समीर वानखेड़े हिन्दू क्यो नही हो सकते?

इस नेहरू गांधी परिवार से कोई सवाल नही क्योकि वे बड़े लोग है लेकिन एक पिछड़ी जाति के हिन्दू समीर वानखेड़े से प्रश्न किये जा रहे है!

समीर वानखेड़े को टारगेट सिर्फ इस लिए किया जा रहा है क्योकि उसने मुम्बई के ड्रग्स सिंडिकेट की बड़ी मछलियों पर हाथ डाला है। समीर वानखेड़े पर वही लोग आरोप लगा रहे है जिनके घर वाले खुद नशे की इस काले कारोबार में शामिल है।

नवाब मलिक का दामाद जी अभी ड्रग केस में ही जमानत पर बाहर आये हैं, नवाब मलिक के रिश्तेदारों के घर पढ़े छापो में करोड़ो की अवैध संपत्ति का पता चला है। सूप बोले तो बोले यहां चलनी बोल रही है जिसके खुद 72 छेद हैं। गजब की हिप्पोक्रेसी है।

राजेश शर्मा-

ऐसा क्या था समीर वानखेड़े में जिसे आईआरएस से आईपीएस में प्रमोट किया गया? कल कोर्ट में मुकुल रोहतगी ने जो सवाल उठाए हैं उसका जवाब एनसीबी को सिद्ध करना होगा, मुख्य गवाह खुद पुलिस से बचने को भाग गया, दूसरा पूरे घटना क्रम से मुकर गया, तीसरा उसकी बहन का साथी, पंचनामा क्रूज पर भरना था या एनसीबी के दफ्तर में?

रही बात उसके जाति धर्म की तो ये मामला नवाब मलिक ने उठाया है ना कि कोर्ट में बहस हो रही है, वो बाद की बात है, अभी तो एनसीबी को उन 26 केसों पर आना होगा जिन्हे फर्जी तरह से फंसा का उगाही की गई, और उस सबमें यही गवाह थे, जिसकी पुष्टि खुद एनसीबी के अधिकारी ने कर दी है।

गैंग बना कर वसूली कर रहे हैं पर मुंद्रा पोर्ट पर 25000 kg aur 3000 kg किसने मंगवाई इसका खुलासा टीवी पर क्यों नही करती एनसीबी। इसकी तो लंका लगनी तय है!

अनिल जैन-

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का अफसर समीर दाउद वानखेड़े जालसाजी के मामले में जेल जाने से अब नहीं बच सकेगा। अगर बच जाता है तो समझिए कि अब देश में कानून का राज नहीं बचा है।

UPSC में जब उसने अपने दलित (SC) यानी हिन्दू होने का सर्टिफिकेट दाखिल कर रखा था, उसी समय वह मुस्लिम बनकर निकाहनामे पर दस्तखत कर रहा था। उसका मुस्लिम बहनोई उस निकाहनामे पर गवाह है। वह यह तो कह नहीं सकता कि निकाह करते समय मुस्लिम था और बाद में हिन्दू बन गया और जब उसने अपना SC सर्टिफिकेट बनवाया था, तब हिन्दू था।

हैरानी की बात है कि उसकी यह धोखाधड़ी उजागर होने के बाद भी कुछ दलाल और भक्तिमार्गी पत्रकार उसका बचाव कर रहे हैं और वह खुद भी अपने खिलाफ सबूतों को अपनी पारिवारिक निजता का हनन बता रहा है।

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