
अजय शुक्ला-
जब मैं चंडीगढ़ आया, तो मेरी अपने अखबार Dainik Bhaskar, क्षेत्र की पुलिस चौकी प्रभारी Sanjiv Kumar Sharma से मुलाकात हुई। मुझे वो एक ईमानदार और अच्छे इंसान लगे। उनसे हमने नशे के खिलाफ मुहिम में हिस्सा बनने का आग्रह किया, तो उन्होंने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई।
दैनिक भास्कर ने मुझे और संजीव को मंच पर सम्मानित भी किया। हालांकि इससे Citizen First Chandigarh Police महकमें के माफिया नाराज हो गये। उनका तबादला सेक्टर-17 पुलिस चौकी पर कर दिया गया। वहां उन्हें झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची गई। मैं तब Amar Ujala अखबार में आ चुका था और रिपोर्टर्स की मीटिंग ले रहा था कि खबर आई कि संजीव को CBI ने पकड़ा है। मैं पहुंचा तो देखा सीबीआई वाले जबरन उसके हाथ में नोट पकड़ाने की कोशिश कर रहे थे। मैंने विरोध किया और सार्वजनिक रूप से सेक्टर-17 के लोगों को चिल्ला चिल्लाकर सच बताया।

सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी भगवान लाल सोनी को कॉल किया। चंडीगढ़ पुलिस के तत्कालीन एसएसपी सुधांशु श्रीवास्तव और आईजीपी शांति कुमार जैन को कॉल किया। इस अन्याय के बारे में बताया। जनता एकत्र हो गई और संजीव के पक्ष में बवाल हो गया। सीबीआई के एसपी ने मुझे धमकाने की कोशिश की, जिसमें मेरा हाथ उसको लग गया। उसने मेरे और Sunil Chopra सहित दर्जन भर लोगों के खिलाफ एफआईआर करवा दी। मैंने पुलिस चौकी के दरवाजे पर लात मारी जिससे उसका दरवाजा टूट गया और सच सबने देख लिया।
बहराल, संजीव को कड़ियां जोड़ते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। आज मुझे सुखद अनुभूति है कि 16 साल की कानूनी लड़ाई के बाद वो साजिश के उस झूठे आरोप से बरी हो गये। उनके साथ के सभी अब डीएसपी हैं। संजीव ने बेहद तकलीफ सही मगर बगैर दुख प्रदर्शित किये लड़ते रहे।
हालांकि सच के लिए इस तरह लड़ने को मेरे अखबार ने मेरे कंडक्ट का दोष माना और दंड भी दिया मगर मैं हर बार यही कहता रहा कि मैं गलत बर्दास्त नहीं कर सकता, चाहे मुझे कोई भी सजा मिले।
आज खुश हूं किदेर से ही सही बहुत दिनों बाद सत्य की जीत देख रहा हूं। जय हिंद!


