आज की चर्चा हिंदी के एक शब्द के बारे में है जिसे मीडिया में ‘साठगांठ’ भी लिखा जा रहा है और ‘सांठगांठ’ भी।
सही क्या है, इसके बारे में आगे बात करते हैं। पहले पता कर लेते हैं कि कौन सा संस्थान ‘साठगांठ’ लिख रहा है और कौनसा ‘सांठगांठ’।
मैंने ‘साठगांठ’ पर गूगल सर्च किया तो इन प्रमुख वेबसाइटों पर ‘साठगांठ’ लिखा हुआ पाया।
हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, जागरण, नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, आजतक और जनसत्ता।
इसके बाद मैंने पता किया कि सांठगांठ किन-किन वेबसाइटों पर लिखा जा रहा है तो ये वेबसाइटें सामने आईं।
हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, जागरण, नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, आजतक और जनसत्ता।
पढ़कर चौंक गए? मैं भी एक बार चौंक गया था यह जानकर कि जो-जो वेबसाइटें किसी एक ख़बर में ‘साठगांठ’ लिख रही हैं, वही-वही वेबसाइटें दूसरी ख़बर में ‘सांठगांठ’ लिख रही हैं।
लेकिन यही हाल है हिंदी मीडिया का। कोई स्टाइल बुक नहीं, कोई भाषानीति नहीं। जिसको जो सही लग रहा है, लिख रहा है।
आज से कोई तीस-चालीस साल पहले यह स्थिति नहीं थी। हिंदी के शब्दों के लिए बाक़ायदा शब्दकोश रखे जाते थे न्यूज़ डेस्क पर। देशी-विदेशी नामों के मामले में अलग-अलग फ़ाइलें रखी जाती थीं। लिस्टें अपडेट की जाती थीं।
आज तो हर डेस्क पर डिक्शनरी रखने की ज़रूरत भी नहीं है क्योंकि हर मोबाइल या डेस्कटॉप पर ऑनलाइन शब्दकोश मौजूद है। नामों के मामले में यूट्यूब है, उच्चारण साइटें हैं। और तो और, टेकनॉलजी ने हमें वह सुविधा दे रखी है कि कोई संस्थान चाहे तो अपने CMS में पूरी डिक्शनरी डाल सकता है, वे सारे शब्द डाल सकता है और उनको अपडेट करता रह सकता है जिन्हें वह सही मानता है ताकि जब कोई कॉपी एडिटर या रिपोर्टर अपनी स्टोरी में उन शब्दों से अलग स्पेलिंग (यानी ग़लत स्पेलिंग) लिखे तो उसके नीचे लाल रेखा आ जाए और साथ में सजेशन भी कि क्या सही है।
लेकिन नवभारत टाइम्स, जागरण, भास्कर और हिंदुस्तान जैसे बड़े-बड़े संस्थान भी यह टेकनॉलजी नहीं अपना रहे। अपना रहे होते तो उनके अख़बारों या वेबसाइटों में एक ही शब्द दो या तीन तरह से नहीं लिखा जा रहा होता।
अब आते हैं अपने मूल काम पर यानी यह पता लगाना कि ‘साठगांठ’ और ‘सांठगांठ’ में सही क्या है। सही है ‘सांठगांठ’। यानी ‘सा’ और ‘गा दोनों पर बिंदी लगेगी।
गाँठ का मतलब हम सब जानते हैं और उसका काम भी – रस्सी या कपड़े जैसी किन्हीं दो वस्तुओं को जोड़ना। इसी गाँठ में साँठ जोड़कर यह शब्द बना है – साँठगाँठ जिसे हिंदी मीडिया में साठगांठ या सांठगांठ लिखा जाता है यानी बिना चंद्रबिंदु के।
अब आप पूछ सकते हैं कि गाँठ का मतलब तो हम सबको मालूम है लेकिन साँठ का मतलब क्या है।
यह सवाल बहुत अहम है। क्योंकि बहुत संभव है कि साँठगाँठ के इस ‘साँठ का मतलब नहीं जानने के कारण कई लोग इसे ‘साठ मान लेते हैं। उनको लगता है कि यह साठ (60) गाँठ से बना है। 60 गाँठें मतलब बहुत ही मज़बूत गठजोड़।
लेकिन जैसा कि शब्दकोश बताते हैं, इस शब्द का साठ की संख्या से कोई लेना- देना नहीं है। यह साठ नहीं, साँठ है।
अब इस साँठ का क्या मतलब है, इसपर कोशकारों में मतभेद है। एक राय यह है कि गाँठ से मिलता-जुलता उच्चारण होने के कारण गाँठ के आगे साँठ लगा दिया यानी साँठ का अलग से कोई मतलब नहीं है।
लेकिन कुछ कोशकार मानते हैं कि साँठ सटना से बना है।
सच्चाई चाहे जो हो, सही है साँठगाँठ जिसे अगर बिना चंद्रबिंदु के लिखें तो होगा सांठगांठ। साठगांठ ग़लत है।
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