प्रशांत द्विवेदी-
मैं अक्सर कहता ही रहता हूँ कि ज़ल्दी ही हमारे जीवन से स्क्रीन आधारित सभी चीज़ें या तो लुप्त हो जाएंगी या फिर वर्चुअल स्क्रीन/वीयरेबल स्क्रीन से रिप्लेस हो जाएगी।

आज अमिताभ बच्चन ने भी वही बात कह दी।
इसी टॉपिक पर कुछ पुरानी पोस्ट्स:
जिस स्क्रीन पर आप यह मैसेज पढ़ रहे हैं, या मैं लिख रहा हूँ या जिस स्क्रीन पर आप इस वक्त कोई डिस्प्ले देख रहे हैं चाहे वह टीवी हो या अन्य प्रकार का डिस्प्ले; आने वाले पाँच-सात सालों में वह स्क्रीन लुप्त होने वाली है।
लास्ट डिकेड में अपना कोई पहला हार्डवेयर लॉन्च करते हुए, कल Apple ने भी ऑगमेंटेड रिएलिटी (AR) आधारित हेडसेट Vision Pro ले आया है। CEO टिम कुक के अनुसार Vision Pro हेडसेट वर्चुअल और रीयल वर्ल्ड का भेद ख़त्म कर देगा। इसके पहले Meta अपना VR हेडसेड Holocake 2 और Quest ला ही चुका है।

इस समय पूरी दुनिया में तकनीकी दिग्गज जेनरेटिव आर्टिफ़ीशियल इंटेलिजेंस (G-AI), रोबोटिक्स, एक्सटेंडेड रिएलिटी या XR [जिसमें वर्चुअल रिअलिटी या VR, ऑगमेंटेड रिअलिटी या AR एवं मिक्स्ड रिअलिटी या MR शामिल होंगे], क्लाउड टेक्नोलॉजी, बिग डेटा, डीप मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स या आईओटी (IoA) के माध्यम से मानव-मानव & मानव-मशीन इंटरफ़ेस एवं आम आदमी के जीवन में तकनीक का पेनेट्रेशन बढ़ाकर आमूल चूल परिवर्तन की ओर अग्रसर हैं।
कुल मिलाकर संचार की अगली पीढ़ी (5G एवं WiFi 6) इस तरह विकसित होगी कि हम बहुत से उपकरणों से और भी बेहतर तरीके से अंतःक्रिया कर सकेंगे और एक ऐसी अगली औद्योगिक क्रांति का सूत्रपात होने जा रहा है जहाँ तकनीक एवं संचार की उन्नत पीढ़ी हमारे पाँच मूल ज्ञानेन्द्रियों के अधिक एवं बेहतर अनुरूपण (सिमुलेशन) में सहायता प्रदान करेगी।
इस तकनीक में यूज़र एक वर्चुअल दुनिया में वो सब कुछ वास्तविक तरीके से कर सकेंगे जो कुछ आज हम किसी रीयल स्क्रीन पर करते हैं।
हालांकि यह डिवाइसेज अपनी तरह की अभी पहली जनरेशन ही हैं लेकिन इन्हें टच और वॉइस के अलावा आँखों अर्थात विज़न से भी कंट्रोल किया जा सकता है। तो आइए मानव से मशीन बनने की तरफ हम थोड़ा और अग्रसर होते हैं और मशीन बनने की तरफ एक कदम और आगे बढ़ाते हैं।
फ़ेसबुक द्वारा लॉन्च करने के बाद, जिस मेटावर्स और उसके द्वारा लाए जाने वाले बदलाव की बात मैं अक्सर करता रहता हूँ मार्क ने उसकी शुरुआत कर दी है।
यह तकनीक सिंगल पर्दा और मल्टीपल पर्दा वाले सिनेमा हॉल, टीवी, मोबाइल और स्क्रीन पर चलने वाली हर एक तकनीक को ख़त्म करने जा रही।
और मेरा एक स्ट्रांग इनट्यूशन या प्रिडिक्शन है कि 2030 तक या उसके पहले ही हमारे जीवन में स्क्रीन का रोल खत्म हो जाएगा। यानी जो कुछ भी आज हमें स्क्रीन डिस्प्ले पर देखते हैं वह खत्म हो जाएगी। हमारे शरीर के किसी अंग जैसे हथेली पर या हवा में ही एक स्क्रीन बन जाएगी। वर्चुअल स्क्रीन। और उसी पर हम सब कुछ देख लेंगे। वहीं सब कुछ फंक्शन कर लेंगे।
ज़्यादा नहीं, बस 2030 तक या उसके पहले ही…

(Mark Zuckerberg wearing META VR HEAD SET HOLOCAKE 2 PROTOTYPE)


