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सुख-दुख

मेरठ के सीनियर रिपोर्टर अरविंद शुक्ला का कोरोना से निधन

दुखद खबर आ रही है मेरठ से। हिंदुस्तान अख़बार के सीनियर रिपोर्टर अरविंद शुक्ला का कोरोना से निधन हो गया है। वह मेरठ में ही सुभारती हॉस्पिटल में एडमिट थे।

नीरज करन सिंह-

मेरठ ने अब क्रांतिकारी पत्रकार अरविंद शुक्ला को खो दिया। हिंदुस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और Indian Institute of Mass Communication के पूर्व छात्र भाई अरविंद शुक्ला नहीं रहे। कोरोना की त्रासदी ने उनको भी अपने आगोश में ले लिया। भगवान महाकाल उन्हें अपने चरणों में उन्हें स्थान दें।

शालू अग्रवाल-

बहुत याद आओगे अरविंद, हिंदुस्तान का हमारा साथी, बेहद अल्हड़, बेखौफ और दिलचस्प इंसान था। ऐसे तो न जाना था यार, भरोसा नहीं हो रहा हमारा साथी यूं चला गया।

अनिल भास्कर-

उम्मीदों भरी नई सुबह और फिर एक मनहूस खबर। अरविंद नहीं रहा। चला गया। इस दुनिया को छोड़कर जिससे उसे हज़ारों शिकायतें थीं। जो इसे आदर्श लोक में बदल डालने के लिए निरंतर बेचैन रहा। उसकी इस बेचैनी को बड़ी शिद्दत से महसूस किया था जब मेरठ में वह मेरे साथ था। आज फिर कानों में सहसा गूंज उठे उसके शब्द- “सर, आप इन अफसरों को नहीं जानते। सब के सब कमीने हैं। किसी को पब्लिक की नहीं पड़ी। बस पब्लिक के पैसे पर ऐश चाहते हैं। मैं तो इनके खिलाफ हमेशा मोर्चे पर रहूंगा। आप तक कई शिकायतें आएंगी। देख लीजिएगा।” उसका यह संकल्प उसे भीड़ में अलग खड़ा कर देता था। वाकई व्यवस्था बदलने की सौगंध के साथ कितने पत्रकार हैं इस दलदल में? अरविंद था। हो सकता है उसने इस सौगंध की कीमत भी चुकाई हो। व्यवस्था के दामुल पर बलि भी चढ़ा हो। मग़र सच्चे सिपाही की वो पहचान छोड़ गया, जो हर बार उसूलों की याद दिलाएगा। भीतर एक टूटन महसूस कर रहा हूं। पर जनता हूं, तुम जहां भी रहोगे अच्छाई के लिए लड़ते रहोगे। बहुत याद आओगे मेरे भाई।

अनुरोध भारद्वाज-

शुक्ला जी का यूं चले जाना : हिंदुस्तान मेरठ में काम करते हुए अरविंद शुक्ला जी को जाना था, बेवाक अंदाज के साथ सिस्टम को आइना कैसे दिखाया जाता है, शुक्ला जी को देखते ही पता लग जाता था, अखबारी तनाव उनके आसपास से भी नहीं गुजरता था, डरना या टेंशन लेना उनके शब्दकोश में नहीं था, नीति-राजनीति के ज्ञानी थे और फक्कड़ी उनका विशेष गुण, जिंदगी में क्रूर हादसे के बाद हमने मेरठ से नौकरी छोड़ दी तो उसके बाद शुक्ला जी से कई मौकों पर फोनिक बात हुई, शुक्ला जी के जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा था, और फिर मनहूस घड़ी में सब कुछ ठहर गया, शुक्ला जी असमय दुनिया छोड़ गए, कभी किसी से हार नहीं मानने वाला कलम का योद्धा बेरहम कोरोना से हार गया…बहुत याद आओगे शुक्ला जी…ॐ शांति

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