अरविंद चोटिया-
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का “कॉपी-पेस्ट कांड” देखकर तो हंसी भी आ रही है और थोड़ा तरस भी।
जनाब ने ट्वीट किया… लेकिन गलती से पूरा ड्राफ्ट ही चिपका दिया—जिसमें लिखा था: “Draft – Pakistan’s PM Message on X”
अब सवाल ये है कि उनके अपने स्टाफ उन्हें “Pakistan’s PM” क्यों कहेंगे? वो तो सीधा “Prime Minister” ही लिखते! मतलब साफ है—या तो कहीं से रेडीमेड मैसेज आया था… या फिर बिना पढ़े ही पोस्ट कर दिया गया।
डिजिटल जमाने में जहां हर शब्द की जांच होती है, वहां इस लेवल की गलती… वो भी प्रधानमंत्री से?
लगता है पाकिस्तान की पॉलिसी ही नहीं, ट्वीट भी “आउटसोर्स” हो रहे हैं। अगली बार शायद “Forwarded as received” भी लिख दें।
वैसे दुनिया की राजनीति एक तरफ और ये कॉपी-पेस्ट वाली कॉमेडी एक तरफ!
मुकेश माथुर-
शहबाज शरीफ ने ceasefire के प्रस्ताव का अपना ट्वीट एडिट किया और पोल खुल गई कि यह अमेरिका का भेजा मेसेज था जिसे Shehbaz sharif को कॉपी पेस्ट करना था।
क्या एडिट किया गया? ऊपर की यह लाइन- Draft – Pakistan’s PM Message on X
यही पूछा जा रहा है कि शरीफ या उनकी टीम ‘पाकिस्तान पीएम’ क्यों लिखेगी, पीएम ही लिखेगी। जरूर यह Trump एंड कंपनी का भेजा संदेश था जो शहबाज शरीफ से पोस्ट करवाया गया।
उमाशंकर सिंह-
दिलचस्प! पाकिस्तान का Draft ट्वीट और फिर Edited ट्वीट !
जिस तरह से ‘Draft : Pakistan’s PM message on X’ लिखा है, ये पाकिस्तान PM की टीम की तरफ़ से ड्राफ्टेड मैसेज नहीं बल्कि बाहर से आया ड्राफ़्टेड मैसेज लग रहा है। क्योंकि किसी देश के PM की टीम ड्राफ़्ट मैसेज में अपने देश का नाम नहीं लिखेंगी… सीधे ‘ड्राफ़्ट : PM का मैसेज’ लिख सकती है। सवाल है कि क्या ये मैसेज ट्रंप की टीम की तरफ़ से भेजा गया?
पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करते हुए कथित तौर पर Trump को सीज़फायर के लिए राज़ी किया। यह भारत के लिए एक कड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अपनी रणनीति सही तरीके से नहीं खेली।
बताया जा रहा है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अपनी नाराज़गी “दलाल नेशन” जैसे तीखे शब्दों के जरिए जाहिर की। -संजय के झा
अभिसार शर्मा-
भारत के पास गांधी जैसा बड़ा ब्रांड था। हम आसानी से ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता में बड़ा रोल निभा सकते थे। हमारे रिश्ते हर पक्ष से अच्छे हैं, चाहे इज़राइल हो या ईरान। लेकिन कमजोर नेतृत्व कभी पहल ही नहीं कर पाया। हमारे पीएम ने खामेनेई की हत्या तक की निंदा नहीं की। उन्होंने ईरान में स्कूल के बच्चों की हत्या पर भी एक शब्द नहीं कहा, और हमारे “लेज़र आईज़” वाले विदेश मंत्री हमें ये यकीन दिलाना चाहते हैं कि दुनिया हर कदम से पहले भारत से सलाह लेती है। फिर सवाल है—इतने अच्छे रिश्तों के बावजूद भारत है कहां?
जब आपकी विदेश नीति सिर्फ रिएक्शन देने वाली हो और उसमें कोई विज़न न हो, जब आप अपनी ही ताकत जैसे गांधी को साइडलाइन कर दें, तो यही होता है। ये मत भूलिए कि ईरान में गांधी के नाम का एक अस्पताल भी है।
अब एक तरह का आतंकवादी देश मुख्य मध्यस्थ बना हुआ है। पीएम शहबाज़ शरीफ, जो ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की बात कर रहे थे, वही अब मध्यस्थ हैं? एस. जयशंकर और बीजेपी सरकार की छोटी सोच ने हमें एक सुनहरा मौका गंवा दिया। हम सच में विश्वगुरु बन सकते थे।
शकील अख्तर-
भारत की विदेश नीति पूरी तरह ध्वस्त कर दी! निश्चित तौर पर भारत के पूर्व और वर्तमान राजनयिकों के लिए पिछली रात उनके जीवन की सबसे निराशाजनक रातों में से एक होगी। भारत के संदर्भ में।
जिन डिप्लोमेट्स ने रात दिन पाकिस्तान को कॉर्नर करने में अपनी पूरी जिंदगी खपा दी वे कभी इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते थे की विश्व शांति के लिए इस्लामाबाद सम्मेलन होने जा रहा है।
अगर विदेश मंत्री एस जयशंकर में जरा सी भी शर्म हो तो उन्हें तुरंत अपना इस्तीफा दे देना चाहिए। नहीं तो वह आश्चर्य भी उन्हें देखना होगा कि देश के पूर्व डिप्लोमेट्स उनसे इस्तीफे की मांग करेंगे और कहेंगे कि यह हमारी विदेश सेवा के सबसे निकृष्ट राजनयिकों में निकला। दलाल!
मोदी जी क्या करेंगे? नेहरू इंदिरा राहुल गांधी पर नया हमला! देश के लिए समस्याएं बहुत बढ़ गई हैं।
मोदी जी को जो करना है वह करें लेकिन जनता को सोचना होगा कि पाकिस्तान का इस तरह अंतरराष्ट्रीय महत्व पा लेना हमारे लिए कितनी बड़ी चुनौती बन रहा है। खासतौर से कश्मीर के लिए!
दीपक शर्मा-
अगर वाजपेई प्रधानमंत्री होते या इंदिरा गांधी होती तो इस महायुद्ध का समझौता भारत करा रहा होता। भारत निसंदेह ईरान से लेकर GCC देशों का सबसे प्रिय और पुराना मित्र रहा है।
अफसोस है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश दुनिया के इस बड़े फैसले में कहीं नहीं है?
हमारी गलत विदेश नीतियों के कारण जो मुल्क आज दिवालिया है वो हैसियत से बढ़कर रोल निभा रहा है! और हम तमाशबीन बनकर खड़े हैं।
चलिये आईपीएल का मजा लीजिये और चुनावी रैलियां करिये! यही आपके बस में है। यही आपका लक्ष्य भी है।
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