देशभक्ति अब सवाल नहीं, चयन बन चुकी है। किसे गद्दार कहना है और किस पर चुप रहना है—यह फ़ैसला सत्ता के हित तय कर रहे हैं। एक ओर शाहरुख़ ख़ान पर बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में लेने का ठप्पा, दूसरी ओर बांग्लादेश से अरबों का कारोबार, बिजली सप्लाई और राजनीतिक मेहमान नवाज़ी पर मौन। यही दोहरा मापदंड आज विपक्ष के निशाने पर है—जहाँ संसद से लेकर सड़क तक पूछा जा रहा है कि देशभक्ति की परिभाषा आखिर सबके लिए एक जैसी क्यों नहीं? नीचे पढ़ें…
कंचना यादव-
शाहरुख़ ख़ान अगर बांग्लादेश के खिलाड़ी को खरीद लेते हैं तो वे गद्दार हो जाते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शेख़ हसीना को भारत में रखते हैं तो वो क्या हैं? अडानी बांग्लादेश को बिजली सप्लाई करते हैं, बांग्लादेश से व्यापार करते हैं, तो क्या वे गद्दार नहीं हैं?
एडवोकेट रॉकी-
“अडानी की बिजली बांग्लादेश को सप्लाई हो रही है, हज़ारों करोड़ का धंधा चल रहा है, तब कोई कुछ नहीं बोलता..
लेकिन शाहरुख़ खान ने एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में लिया तो वो ‘गद्दार’ हो गए? बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, फिर भी प्रधानमंत्री जी शेख हसीना को साथ रखते हैं..
क्या उनके लिए देशभक्ति की परिभाषा अलग है?” – संजय सिंह सांसद
संजय सिंह ने BJP के दोगलेपन की पोल खोल दी! संजय: IPL की परमिशन BCCI देती है। पाक खिलाड़ी बैन हैं, तो बांग्लादेश क्यों नहीं? SRK को टारगेट, अडानी बांग्लादेश से अरबों का धंधा – मोदी चुप। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इन्हीं ने Pak से क्रिकेट खेला! पूरा देश खिलाफ था – मि. सिन्हा
आईएनसी टीवी नामक एक्स हैंडल वीडियो शेयर कर लिखता है-
“जाति बचाओ, माटी बचाओ यात्रा” असम की उन सच्चाइयों को सामने लाएगी, जिन पर मोदी सरकार खामोश है, जहाँ ज़मीन, संसाधन और अधिकार अडानी को सौंपे जा रहे हैं।
यह सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि असम के युवाओं की बेरोज़गारी, अन्याय और शोषण के खिलाफ मज़बूत आवाज़ है।
इस ऐतिहासिक पहल के लिए असम युवा कांग्रेस की पूरी टीम और स्टेट प्रेसिडेंट ज़ुबेर का हार्दिक धन्यवाद, जिन्होंने इस यात्रा को शुरू करने की ज़िम्मेदारी उठाई।



