
वरिष्ठ पत्रकार शशि सिंह ने द स्टेट्समैन के झारखंड ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। यह उनकी मुख्यधारा की पत्रकारिता में एक लंबी अवधि के बाद वापसी है। अपनी पहली पारी में उन्होंने नवभारत टाइम्स, मुम्बई में कार्य किया था। पत्रकारिता के अलावा, उन्होंने कॉरपोरेट और उद्यमिता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अपने बहुआयामी अनुभव व विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए पहचाने जाते हैं।
शशि सिंह ने पत्रकारिता से अंतराल के दौरान हचिसन एस्सार, ज़ी नेटवर्क और वोडाफोन इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों में कार्य किया। इसके साथ ही, उन्होंने सलपर्णी मीडिया नाम से अपनी खुद की कंपनी भी चलाई। सरल स्वभाव के शशि, जुझारू और गहन चिंतनशील अध्येता रहे हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।
मीडिया में अपनी वापसी पर उन्होंने कहा, “मीडिया का बाहरी परिदृश्य भले ही बदला हो, लेकिन इसकी मूल प्रवृत्ति और जिम्मेदारियाँ हमेशा समान रहती हैं। झारखंड पत्रकारिता के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण और रोचक क्षेत्र है। मैं फिर से पत्रकारिता में आकर उत्साहित हूँ और पूरी निष्ठा के साथ सार्थक पत्रकारिता करने के लिए तत्पर हूँ।”
झारखंड ब्यूरो प्रमुख के रूप में शशि सिंह राज्य की राजनीति, जनजातीय मामलों, प्रशासन और विकास से जुड़े विषयों पर विशेष रूप से ध्यान देंगे। उनकी अगुवाई में द स्टेट्समैन की झारखंड में पकड़ और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
शशि सिंह से X (ट्विटर) पर @shashiksingh हैंडल पर जुड़ा जा सकता है।
द स्टेट्समैन के बारे में…
1875 में स्थापित, द स्टेट्समैन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित अंग्रेज़ी समाचार पत्रों में से एक है, जो अपनी निडर रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और संपादकीय निष्पक्षता के लिए जाना जाता है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला अग्रणी अखबार रहा है। अपनी स्वतंत्र और खोजी पत्रकारिता की परंपरा को बनाए रखते हुए, यह उन गिने-चुने भारतीय समाचार पत्रों में शामिल है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी संपादकीय गुणवत्ता के लिए पहचाने जाते हैं।
आज, द स्टेट्समैन राजनीति, व्यापार और वैश्विक मामलों की विश्वसनीय रिपोर्टिंग के साथ प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सशक्त उपस्थिति बनाए हुए है। इसकी जड़ें 1818 में स्थापित ‘द इंग्लिशमैन’ से जुड़ी हैं, जो 1875 में ‘द स्टेट्समैन’ में विलय हो गया, इस तरह निडर पत्रकारिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए।


