शेखर गुप्ता भी ‘गोदी’ हो गया!

Girish Malviya : आज भास्कर में छपा प्रतिष्ठित पत्रकार शेखर गुप्ता जी का इंटरव्यू पढ़ रहा हूँ. उनका कहना है कि ‘मोदी सरकार में भ्रष्टाचार का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है. राफेल में भी कोई ऐसा सबूत नहीं है कि भ्रष्टाचार लगे’ आगे वो कहते हैं कि ‘कोई बड़ा करप्शन के केस नही बना यह मोदी सरकार की उपलब्धि हैं’.

हम सब जानते हैं कि मोदी सरकार में RTI जैसे कानून की क्या हालत कर दी गयी है. सभी सरकारी विभागों को साफ निर्देश है कि RTI कानून के तहत कोई ऐसी सूचना बाहर न जाने पाए जिससे मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के मामले बाहर आ सकें. विभिन्न विभागों की एन्युअल रिपोर्ट में भी सरकार को परेशानी में डालने वाले आँकड़े एडजस्ट कर दिए जाते हैं. वैसे शेखर गुप्ता इतने बड़े पत्रकार है कि इन्हें रॉफेल में भी भ्रष्टाचार नजर नहीं आ रहा.

शेखर गुप्ता के बयान पर सैमुअल जॉनसन का एक प्रसिद्ध चुटकुला याद आया. चर्च के एक पादरी की मौत हो गयी. उसे दफनाने के लिए लोग सैमुअल जॉनसन के पास चन्दा लेने गए. उन्होंने सैमुअल जॉनसन से पादरी को दफनाने के लिए एक शिलिंग चन्दा देने को कहा. सैमुअल जॉनसन ने उन्हें दो शिलिंग देते हुए कहा कि दो पादरियों को दफना देना. आज की स्थिति में पादरियों की जगह पत्रकारों को रख लीजिए.

इंदौर के निवासी और सोशल मीडिया पर चर्चित गिरीश मालवीय की एफबी वॉल से.

पढ़िए उपरोक्त पोस्ट पर लोगों ने क्या क्या कमेंट किए हैं… कुछ खास टिप्पणियां पेश हैं….

Devpriya Awasthi शेखर गुप्ता धीरे-धीर अरनब के रास्ते पर बढ़ रहे हैं।

Praveen Malhotra शेखर गुप्ता जितने बड़े पत्रकार हैं उससे भी बड़े चापलूस हैं।

Faiyaz Siddiquie बिल्ली चूहे पे चूहा खा रही है और पत्रकार इसी में लगे हैं कि बिल्ली को हाजी कर दिया जाए .. आपका क़लम, आपकी हिम्मत और आपकी मेहनत यूँही क़ायम रहे Girish Malviya Sir ..

Atul K Mehta जिंदगी भर जो इज्जत कमाई शेखर गुप्ता ने, आज उससे हाथ धो दिया अंबानी/अडानी के गद्दार दल्ले को क्लीन चिट दे के..

Subhash Chandra Mehta इनके भी बीवी बच्चे हैं.. कोठी कार और राज्यसभा…

Mohan C. अब लो कल्लो बात शेखर गुप्ता भी मोदीमय हुए मालवीय जी कब घर लौटेंगे ?

Vivek Kumar ये पत्रकार नही, भाजपा और मोदीजी के प्रचारक हैं.

Sneha Baba पक्का कोई पद की डील हो गयी है इनकी साहेब से

Subhash Chandra Mehta अखबार-पत्रकार ही नहीं, कोर्ट तक सरकार के खिलाफ फैसले देने में हिचक रही हैं…

Kamlesh Varma आरटीआई की तो यह हालत कर दी है कि उसको बिल्कुल पंगु कर दिया गया है मेरा नान कंपलेंस का केस जो कि 15 अक्टूबर 2017 को सीआईसी में दर्ज करवाया था अभी तक उन्होंने मुझे उसकी तारीख ही नहीं दी है भगवान जाने कब होगा जब भी फोन लगाओ तब कहते हैं कि 2 महीने बाद 2 महीने बाद?

Subhash Chandra Mehta अब तो गेंद जनता के हाथ मे है…हम आप तो कर चुके

Badr E Alam अगर शेखर गुप्ता को राफेल जेट डील में भृष्टाचार और पछपात नज़र नहीं आता है,तो यह समझा जाए कि वह खुद भ्र्ष्टाचार के वकील हैं।

Ashok Jain मनमोहन सिंह के शासनकाल में सीएजी की रिपोर्ट पर भ्रष्टाचार के आंकड़े बता दिए जाते थे सरकार को बदनाम कर दिया गया मोदी सरकार में सीएजी की रिपोर्ट में उल्लेखित भ्रष्टाचार पर कोई बातचीत नहीं और न ही कार्यवाही नहीं क्योंकि मीडिया साथ है। गजब

Ajit S Rana एक वर्ष के लिये सिर्फ एक वर्ष के लिये यदि पत्रकारिता अपनी शुचिता अपना ले तो क्या नौकरशाही क्या सियासत सभी को R O की तरह शुद्ध कर देगी।

Javed Shekhar Gupta sir is well known for his biased views on Modi Gov.

Ritesh Joshi जी मैने भी पढा था …और मैं हंस कर रह गया ….इसकी छोड़िये जब एम जे अकबर जैसे इनकी रहनुमाई मे अपना नसीब देख रहे हैं तो औरो की क्या कहें ..

Satya Veer Singh प्रतिष्ठित विशेषण नाहक ही इस्तेमाल किया। ये सब अनुष्ठित हो चुके हैं।

Kameshwar Pandey शेखर गुप्ता भी पल्टीमार निकले। मोदी सरकार तो कांग्रेस से भी बड़ी भ्रष्ट है। यह तो चोर के साथ सीनाजोर भी है।

राज किशोर उपाध्याय पद्म पुरस्कार न मिला क्या अभी तक?

Izhar Sayyed Arif राज किशोर उपाध्याय sidhe Bharat Ratan milega

राज किशोर उपाध्याय पद्म तक ही औकात है ।

Uttam Agrawal मालवीय जी ने शेखर गुप्ता को गोदी मीडिया की नई खेप में डाल दिया. बिल्कुल जैसे मोदी भक्त हर किसी को देशद्रोही बोलकर निकल लेते हैं

राजेन्द्र हिन्दुस्तानी एक मुद्दा और बहुत गम्भीर है मालवीय जी? आधार कार्ड में करेक्शन को लेकर इसे भी उठाईये गहराई तक जायेंगे तो बहुत भ्रष्टाचार हो रहा है जरा इस पर गौर फरमाएं ?

Ramanand Soni कई बड़े पत्रकार सरकारों की कृपा से राज्यसभा और कई अन्य संस्थाओं में मलाई तथा प्रतिष्ठा वाले ओहदे पाते रहे हैं। यह ज़मीर बेचने का दौर है।

Harendra Narayan वे नये चेतन भगत हो गए हैं

Mohan Shrotriya मौक़ापरस्त है, प्रतिष्ठित नहीं। काफ़ी वक़्त से हिला हुआ है।

Vijay Shukla चलो एक दल्ला पत्रकार और नंगा हुआ। MJ Akbar और कुछ औरों सहित इसने भी अपनी जिंदगी भर की कमाई हुई इज्जत और सम्मान एक ज़ाहिल धूर्त झूठे फेक फेंकू के हाथों बिककर गंवा दी। लानत है इस दल्ले पर।

Ramesh Parashar अपवाद छोड़ दें तो पत्रकारों की हैसियत बिकाऊ हो गई है और औक़ात के हिसाब से पेमेंट न मिलता है ना ये माँग पाते हैं ? ये इसी मे ख़ुश रहते हैं कि लतियाये नही गये ? छोटा हो या बड़ा ?

Rajendra Singh सभी संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना दिया गया है। ऐसे में भ्रष्टाचार को दबाने के मीडिया से लेकर सभी संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Madhav Singh मालवीय जी , तो, आप बड़ी लकीर खींच दीजिये, खोजी टीम तैनात कीजिये, मसला निकालिये, केस भी ठोक दीजिये और साबित कर दीजिये।

Rani Rajesh चुटकुला जबरदस्त है आज के गोदी पत्रकारों के लिए

S.u. Saiyad मुझे तो पत्रकार कहीँ नहीं दिखाई देते हैं।

Shiv Shanker Gahlot शेखर गुप्ता जो चाहे कहता रहे असलियत खुल चुकी है ।

Anil Singh दलालों की क्या बात करना

Kumar Devendra Sinha सटीक विश्लेषण, वर्तमान में रुपये के साथ साथ वरिष्ठ पत्रकारों का चरित्र भी गिरता जा रहा है

Arvind Shesh मुझे भी पत्रकार ही कहा जाता है, लेकिन मेरी राय भी सैमुएल जॉनसन की तरह ही है..! पत्रकारिता के नाम पर दलाली में लगे लोगों को दफनाना ही रास्ता है..!

Deep Sankhla इस साक्षात्कार की चतुराई को समझने के लिए ध्यान से पढ़ना होगा, शेखर गुप्ता ने ना मोदी को साफ-साफ क्लीन चिट दी है, ना ही आरोपी ठहराया है। गोल-माल बातें करके दोनों हाथों में लड्डू की आकांक्षा ही जताई है। क्या होगा इस पत्रकारीय पेशे का।

जय कुमार शेखर गुप्ता एक एसा कोढ है जो भारतीय राजनीति के राजनेताओं के कोढ का प्रायोजक है ।

Dheeresh Saini ये बड़े-बड़े अंग्रेजीदां नाम हैं। पहले हम सोचते थे कि अपराध हिंदी पत्रकारों का धंधा है पर ये कम शातिर नहीं।

Yusuf Kirmani ये बदमाश बड़े खिलाड़ी हैं। …हिंदी वाले बेचारे पत्रकार तो चाय पीकर, मुर्ग़े खाकर और प्लास्टिक के कप गिलास लेकर ख़ुश हो जाते हैं।

Rajeev Mittal यह पत्रकारिता नहीं, फर्जी किस्म की मसीहाई है..और दिल्ली-बम्बई में शेखर गुप्ता जैसे न जाने कितने महंतों की भरमार है..

Rajeev Mchandani शायद, शेखर गुप्ता भी ONGC के निदेशक बनना चाह रहे है।

Rajesh Yadav शेखर गुप्ता अभी भी बैलेंस बना रहे हैं। पक्ष विपक्ष दोनों तरफ से अंपायरिंग कर रहे हैं।

Kavita Krishnapallavi यह शेखर गुप्ता भी भारतीय पत्रकारिता का कलंक है — एक छद्म-बौद्धिक और अव्वल दर्जे का मौक़ापरस्त !

Rahul Jain आओ मिलकर देश बचाएँ… शेखर गुप्ता मीठी छुरी हैं और रंग बदलने में गिरगिट से भी ज्यादा माहिर!

शरद मनोरमा घोटाले का पता तो सरकार के जाने के बाद ही चलता है

Imran Baig बनिए बहुत जल्दी बिकते हैं ।

Govind Agrawal अब तो 100 शिलिंग भी कम पड़ेंगे।

Madan Mohan शेखर गुप्ता जैसों को पत्रकार कहने में भी शर्म आती है !

Qadri Zakir देश जितने भी corrupt नेता और भृष्ट पत्रकार हैं उतना शीलिंग देने को तैयार है।

Vidya Dhar Sihag उन को कैसे दिखेगा वो तो पहले से फिक्स है।

Sharad Rawat सहारा बिरला डाईरियों में भी सबूत इन लोगों को नज़र नहीं आया तो और कहाँ आ सकता है?

Markanday Mani Tripathi जब लोग अपना ज़मीर गिरवी रख देते हैं तब उन्हें पतझड़ में भी बसंत की हरियाली दिखती है

Vinod Bhaskar यार हम भी पत्रकार हैं, दूसरा हमें न बना देना.

Veerendra Bedhram Salan इस अखबार का नाम द बास्टर्ड उपयुक्त है ।

Ashish Saxena दूसरा शिलिंग संजय गुप्ता के लिए

Rajesh Agrawal ताजुब है रफाएल को शेखर गुप्ता घोटाला नहीं मानते जय शाह का मामला तो उन्हें याद भी नहीं आया.. नोटबंदी के दौरान भाजपा नेताओं के सहकारी बैंकों में इतनी गड़बड़ी हुई उसका भी जिक्र करने की जरूरत उन्होंने नहीं समझी.

Deveshwar Dwivedi यार गिरीश ! कुछ तो अपने स्टेटस का ध्यान रखो। शेखर गुप्ता जैसे पत्रकारों को पढ़ भी लिया, तो इन पर टिप्पणी करने की क्या जरूरत है?

Pintu Pandey कुछ पत्रकार लोग भी ज्ञान के सागर में गोते लगा रहे हैं ।।

Ramswaroop Mantri पत्रकार नहीं दलालों की फौज है

Gyanendra Ojha “शेखर गुप्ता एक प्रतिष्ठित पत्रकार” कुछ समझ में नहीं आया और उनका उक्त बयान पढ़ कर कन्फ्यूजन और बढ़ गया। आखिर वह पत्रकारिता में क्या बेचते हैं और उनकी प्रतिष्ठा किस चीज में है?

Ram Nagina बहुत उम्दा उदाहरण । ये देशभक्त पत्रकार हैं ।इन्हें भ्रष्टाचार नजर कैसे आएगा ?

Farida Khanam शेखर गुप्ता ईमानदार नहीं रहे

Jagdish Prasad मोदी सरकार में भ्रस्टाचार नहीं है तो आजतक लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं हुई है पूरा टेन्योर ख़त्म होने जा रहा है। राफेल डील की जाँच जे पी सी से कराने से सरकार क्यों भाग रही है।

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