Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

रांची के अखबार ‘शुभम संदेश’ का शटर डाउन- बकाया भुगतान का क्या होगा? पढ़ें

जितनी तेजी से बढ़ा उतनी ही तेजी से धड़ाम से जा गिरा रांची का दैनिक ‘शुभम संदेश’। लगातार.काम के बैनर तले इसका बड़े ही तामझाम के साथ तीन साल पूर्व प्रकाशन शुरू हुआ था। कई नामचीन पत्रकारों को हाई सैलरी पर बहाल किया। कुछ माह तक नियमित रूप से वेतन भुगतान किया गया। पटना से बिहार एडिशन लॉन्च करने की योजना बनी।

धनबाद के आरई ज्ञानवर्धन मिश्र को पटना ट्रांसफर किया गया। रांची से पत्र को संचालित करने वाले सुरजीत सिंह को धनबाद के कोयला कारोबारी ने मदद दी। लेकिन दो साल बाद ही अचानक ऐसा क्या हुआ कि अखबार को बंद करना पड़ा।

धनबाद के मेजोरिटी शेयर होल्डर धारक मालिक अनिल अग्रवाल ने हाथ खींच लिए। एक झटके में एक सौ से अधिक पत्रकार और गैर पत्रकार सड़क पर आ गए। प्रधान संपादक और इसके कर्ताधर्ता सुरजीत सिंह को बंदी की मार्मिक अपील निकालनी पड़ी।

खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। धनबाद के फाइनेंसर ने अखबार के ही कुछ लोगों को अपने पक्ष में लेकर शुभम संदेश का धनबाद और रांची एडिशन का पुनर्प्रकाशन कराया। धनबाद का जिम्मा दीपक अंबष्ट को दिया है तो रांची संजय सिंह (पुराने स्थानीय संपादक) के हवाले है।

बताते हैं कि हाल के दिनों में फंडर के कई ठिकानों पर नाना प्रकार की जांच एजेंसियों के रेड से उनकी माली हालत खस्ता हो गई है। फाइनेंसर के नुमाइंदों का कहना था कि यहां से हर माह पूरा पैसा दिया गया। कर्मचारियों को नहीं मिला तो वे क्या करें। किसी को आठ माह तो किसी को डेढ़ वर्ष का वेतन बकाया है।

इधर प्रधान संपादक सह संचालक सुरजीत सिंह का कहना था कि उनके साथ एक बड़ा धोखा हुआ है।

सड़क पर आए कर्मी कम्पनी के शेयरधारकों अनिल अग्रवाल और सुरजीत सिंह के पास गुहार पे गुहार लगा रहे हैं लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। धनबाद के डीसी के दरबार में भी जाने की तैयारी चल रही है। बहरहाल कई कर्मी लेबर कोर्ट और हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। कुछ लोग कोर्ट की शरण में जा भी चुके हैं।


प्रबंधन की तरफ से अपील-सूचना

साथियों,

यह हमारे लिए अत्यंत दुखद है कि हमें सूचित करना पड़ रहा है कि आर्थिक दिक्कतों की वजह से प्रबंधन को रांची से अखबार का प्रकाशन अस्थायी रुप से बंद करने का कठिन निर्णय लेना पड़ा है. इसके साथ ही जमशेदपुर, चाईबासा, हजारीबाग, गिरिडीह, पलामू, लातेहार, लोहरदगा और चतरा स्थित शुभम संदेश अखबार का कार्यालय और रांची के समलिया स्थित प्लांट बंद हो जाएंगे. जरुरी प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए रांची कार्यालय खुला रहेगा.

साथियों की सैलरी आदि के बकाया भुगतान के संबंध में, प्रबंधन शीघ्र ही एक विस्तृत सूचना जारी करेगा. साथ ही अलग-अलग साथियों से एक-एक करके संपर्क करेगा. आप जब चाहें, रांची कार्यालय से संपर्क कर सकते है.

प्रबंधन का निर्णय है कि यह व्यवस्था अगले तीन-चार माह तक चल सकता है. हम आप सभी सहयोगियों के प्रति अपनी आभार की भावना व्यक्त करते हैं जिन्होंने हमेशा हमारा साथ दिया. हमें उम्मीद है कि प्रबंधन की आर्थिक स्थिति में सुधार होने पर हम फिर से साथ काम कर सकेंगे.

यह फैसला लेना हमारे लिए बेहद मुश्किल रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह अनिवार्य हो गया है.

आपका
प्रबंधक


उपरोक्त आरोपों पर एक पदाधिकारी की तरफ़ से आई प्रतिक्रिया ये है-

हम भी शुभम संदेश अखबार में ही काम करते थे. जो कोई भी बोल रहा है आठ माह या डेढ़ साल का पैसा बकाया है, वह झूठ बोल रहा है. हां, एवरेज ढाई-तीन माह का बकाया जरूर है.

सुरजीत सर ने तो अपना सबकुछ दांव पर लगाकर अखबार को राज्य में पांचवें नंबर का अखबार बना दिया था. लेकिन कुछ लोगों ने बेवकूफी करके एक रात में ही अखबार को 55वें नंबर का अखबार बना दिया.

अखबार का मालिक अनिल गोयल तो समझ भी नहीं पाया कि 5वें और 55वें में क्या फर्क होता है. दोनों अलग-अलग तरह के अखबार होते हैं. एक में खबरें होती है जबकि दूसरा सिर्फ कट-पेस्ट के सहारे चलता है.

रही बात मालिक के लोगों द्वारा यह कहने का कि हर माह पैसा जाता था तो सुरजीत सिंह ने साथ काम करने वालों से कभी भी कुछ नहीं छिपाया. नवंबर, दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में कोई पैसा नहीं आया था, तब सुरजीत सिंह ने सबको बताया था. मालिक ने जल्द ही हालात सुधरने की बात की थी. उस वक्त सुरजीत सर ने इघर उघर से कर्ज लेकर किसी तरह अखबार को संभाला. उन तीन महीनों के अलावा सितंबर और अक्टूबर 2024 का पैसा मालिक ने दिया ही नहीं.

सुरजीत सिंह आज भी अपना लगातार.इन चला रहें हैं. साथ काम करने वालों के साथ परिवार की तरह व्यवहार करते हैं. हर माह वेतन देते हैं. खुद सुबह से रात तक काम करते हैं और दूसरों से भी यही अपेक्षा रखते हैं. हर किसी की मदद को हर वक्त तैयार रहने वाला पत्रकार हैं.

कुछ लोग हैं जो उनके खिलाफ साजिश करते रहते हैं. अफवाह फैलाते हैं, बदनाम करने की कोशिश करते हैं. वही लोग जिन्होंने एक उभरते अखबार को गर्त में पहुंचा दिया.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
2 Comments

2 Comments

  1. Sweta Singh

    June 17, 2025 at 3:28 pm

    Jhuthi report… Puri tarah se jhuthi report. Bikau Media bhadas4media.com.

    If you are real then publish my comment. Bikau Media

  2. Radheshyam tiwari

    June 17, 2025 at 10:05 pm

    Seriously What a nonsense news, if this newspaper has been closed then how is it paneled on CBC. Yes, there are some people who are desperate to get rid of their labelliness and they also show themselves as well-wishers of the newspaper, but I don’t know what is the special compulsion of the management that till date that particular person has been getting only apology.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन