नई दिल्ली। दिल की बीमारियों को लेकर दुनिया भर में तरह-तरह की थ्योरीज़ सामने आती रहती हैं, लेकिन हालिया शोध एक ऐसी वजह की ओर इशारा कर रहे हैं जिसे अब तक नजरअंदाज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन K2 की कमी चुपचाप आर्टरीज को नुकसान पहुंचा रही है और यही आगे चलकर साइलेंट हार्ट अटैक का कारण बन रही है।
कैसे ब्लॉक होने लगती हैं आर्टरीज?
मेडिकल एक्सपर्ट बताते हैं कि शरीर में मौजूद Matrix Gla Protein (MGP) को एक्टिव करने का काम विटामिन K2 करता है। यह प्रोटीन कैल्शियम को हड्डियों तक पहुंचाने और आर्टरीज में जमने से रोकने में मदद करता है।
जब शरीर में K2 का स्तर गिरता है, तो यह प्रोटीन निष्क्रिय हो जाता है और कैल्शियम आर्टरीज के अंदर जमने लगता है, जिससे ब्लड वेसल्स सख्त होने लगती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कैल्शियम की यह गलत दिशा दिल की बीमारी को केवल “समय की बात” बना देती है।
देर से क्यों पता चलता है यह खतरा?
कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार K2 की कमी के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लोग इसे तब तक नहीं पकड़ पाते जब तक ब्लॉकेज गंभीर न हो जाए।
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ बताते हैं कि K2 की कमी हड्डियों को भी कमजोर करती है, क्योंकि कैल्शियम हड्डियों तक नहीं पहुंच पाता और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
डाइट में क्यों बढ़ रही है K2 की कमी?
विशेषज्ञ कहते हैं कि पहले के समय लोगों के आहार में फर्मेंटेड फूड्स का इस्तेमाल अधिक होता था, जो K2 का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत हैं।
लेकिन आधुनिक खान-पान में नट्टो, किण्वित चीज़, अंडे की जर्दी और ऑर्गेनिक मीट जैसे खाद्य पदार्थ लगभग गायब हो चुके हैं। इसके चलते K2 की कमी तेजी से बढ़ रही है।
न्यूट्रिशनिस्ट बताते हैं कि शरीर में बनने वाला inactive MGP टेस्ट इस कमी को पकड़ने का सबसे विश्वसनीय तरीका है।
कमी कैसे पूरी करें?
डॉक्टरों के मुताबिक K2 की कमी को दूर करने के लिए डाइट में ये चीजें नियमित रूप से शामिल करनी चाहिए:
पुराना चीज़
अंडे
ऑर्गेनिक मीट
नट्टो
अन्य फर्मेंटेड फूड्स
इसके अलावा विशेषज्ञ MK-7 फॉर्म वाले Vitamin K2 सप्लीमेंट (100–200 माइक्रोग्राम रोजाना) को विटामिन D3 के साथ लेने की सलाह देते हैं। इससे कैल्शियम हड्डियों तक सही तरह पहुंचता है और आर्टरीज कैल्सीफिकेशन से बचती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि विटामिन K2 पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है और इसके गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं।


