सियार के गुण–धर्म और उन पर संभावित खतरे… गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार आलोक शुक्ल ने स्थानीय प्रेसक्लब के चुनाव के मद्देनजर ‘हुआ हुआं’ करने वाले सियारों के बारे में लिखा था। अब वह सियार के गुण-धर्म और उन पर संभावित खतरों पर प्रकाश डाल रहे हैं।
सियार झुंडों में रहते हैं। एक झुंड में 5 से अधिक सदस्य होते हैं। यह झुंड में हमला भी करते हैं। ये रात में एक साथ हुआं हुआं करते हैं।
कुछ दंतकथाओं के अनुसार सियार हुआं हुआं करने/किसी पर हमला करने/बस्ती में घुसने से पहले अपने ‘सरदार/देवता’ से इसकी इजाजत लेते हैं!
इधर सियारों की चर्चा आम हुई तो कई वरिष्ठ व संजीदा लोगों ने उनको लेकर चिंता जताई है। प्रस्तुत है बातचीत के दौरान सामने आयी रोचक जानकारी और सियारों पर संभावित खतरे…
‘सियारसिंगी’
सियारों की नाक के ऊपर उगने वाला बालों का गुच्छा, जो सियारों की उम्र बढ़़ने के साथ सींग की तरह कड़ा होता जाता है, ‘सियारसिंगी’ कहा जाता है। हजारों सियारों में किसी एक सियार को सियार-सिंगी होता है।
बहुत से शिकारी/व्यापारी इसे करामाती मानते हैं। ऐसी मान्यता है कि जिसके पास सियार-सिंगी हो उसे किसी चीज की कमी नहीं रहती है। वह किसी को भी अपने वश में कर सकता है और किसी भी शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकता है!
खतरा!
सियार-सिंगी की वजह से सियारों की हत्या भी खूब होती है। इसको प्राप्त करने के लिए कुछ लोग सियारों पर नजर रखते हैं और कुछ हो-शियार लोग सियारों के झुंड पर झुंड भी पालते हैं।
ऐसे लोगों के दोनो हाथों लड्डू होता है। किसी सियार में सियार-सिंगी मिल गया तो क्या ही कहने, यदि नहीं मिला तो भी कोई बात नहीं, विरोधी को घेरकर हुआं हुआं तो करेंगे ही।
सावधान!
सियार-सिंगी की वजह से सियारों की जान हमेशा खतरे में रहती है। यह खतरा इन दिनों और बढ़ा हुआ है। प्राप्त सूचना के मुताबिक कुछ शिकारी/व्यापारी सियार-सिंगी की लालसा में सियारों की तलाश में उनके संभावित ठिकानों पर नजर लगाए हुए हैं। सो सियारों की भलाई इसी में है कि वे अपनी मांद से, झाड़ी से बाहर न निकलें, हुआं हुआं न करें, अन्यथा अपने पालनहार की लालच के शिकार हो जाएंगे और बेवजह मारे जाएंगे।
इसे भी पढ़ें-
https://www.bhadas4media.com/gorakhpur-press-club-ke-girohbaj/


