सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब किसी थानेदार या एसपी के आदेश से पोस्ट या वीडियो नहीं हटेगा। केंद्र सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नए IT नियम लागू करने की घोषणा की है। 1 नवंबर 2025 से पूरे देश में ये संशोधित नियम लागू हो जाएंगे, जिनके तहत कंटेंट हटाने का अधिकार केवल उच्च स्तर के अधिकारियों के पास रहेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने IT नियम 2021 के प्रावधान 3(1)(d) में बड़ा संशोधन किया है। इसका मकसद है—सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को मनमानी से मुक्त कर पारदर्शी, जवाबदेह और कानूनसम्मत बनाना।
अब सोशल मीडिया से कोई भी पोस्ट, वीडियो या लिंक तभी हटाया जा सकेगा जब आदेश देने वाला अधिकारी पर्याप्त वरिष्ठ हो। मंत्रालयों और सरकारी विभागों में यह अधिकार अब सिर्फ़ संयुक्त सचिव (Joint Secretary) या उससे ऊपर के अधिकारी को होगा। अगर उस स्तर का अधिकारी उपलब्ध नहीं है, तो किसी निदेशक (Director) या समकक्ष अधिकारी को यह आदेश देने की अनुमति मिलेगी।
पुलिस विभाग में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसी थानेदार, डीएसपी, एसपी या यहां तक कि एसएसपी को भी सोशल मीडिया कंटेंट हटवाने का अधिकार नहीं होगा। यह आदेश केवल उप महानिरीक्षक (DIG) या उससे ऊपर की रैंक का अधिकारी ही दे सकेगा।
पहले कई मामलों में देखा गया कि कंटेंट हटाने के आदेश बिना स्पष्ट कारण या कानूनी आधार के जारी कर दिए जाते थे। अब हर आदेश में यह साफ-साफ बताना अनिवार्य होगा कि किस कानूनी धारा के तहत कार्रवाई की जा रही है, उस कंटेंट में क्या अवैध या आपत्तिजनक है, और उसका सटीक URL क्या है।
नए नियमों में यह भी तय किया गया है कि जारी किए गए हर कंटेंट हटाने के आदेश की मासिक समीक्षा की जाएगी। यह समीक्षा सचिव (Secretary) स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं कर सकेगा, ताकि आदेशों में पारदर्शिता और संतुलन बना रहे।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा होगी, सोशल मीडिया कंपनियों को पालन के स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे और ‘मनमाने प्रतिबंधों’ पर रोक लगेगी।



