नीरेंद्र नागर-
एक सफ़ाई कर्मी की बेटी ने 12वीं के बोर्ड एग्ज़ाम में 500 में 500 नंबर पाए। क्या आप इस ख़बर को बिना जाँचे-परखे शेयर करेंगे? फ़ेसबुक पर आज Rama Shankar Singh का एक पोस्ट देखा।

उसमें एक लड़की की तस्वीर लगी हुई थी। तस्वीर में नीचे लिखा था, वैशाली नाम की यह लड़की सफ़ाई कर्मी की बेटी है जिसने 12वीं बोर्ड की परीक्षा में 500 में 500 अंक प्राप्त किए हैं। साथ में यह अनुरोध भी था कि इस लड़की को आशीर्वाद देने के लिए इस तस्वीर को लाइक, कॉमेंट और शेयर करें।
रमाशंकर जी को अवश्य यह तस्वीर कहीं और से मिली होगी और केवल लाइक या क़ॉमेंट करने के बजाय उन्होंने बेहतर समझा कि इसे अपनी मित्रमंडली में एक टिप्पणी के साथ शेयर किया जाए जैसा कि कोई भी संवेदनशील व्यक्ति करना चाहेगा।
रमाशंकर जी के इस पोस्ट को अब तक 427 लाइक्स और 27 शेयर मिल चुके हैं। कई लोगों ने लड़की को बधाई भी दी है। केवल Girijesh Vashistha ने एक अलग क़िस्म की टिप्पणी की है कि अपवाद हालात को नहीं बदल सकते।
सैकड़ों लोगों ने यह पोस्ट देखा मगर किसी ने एक पल के लिए भी यह नहीं सोचा कि यह तस्वीर और ख़बर फ़ेक भी हो सकती है। मैंने सोचा। कारण, जब भी कोई ऐसी तस्वीर या पोस्ट देखता हूँ जिसमें उसे लाइक, कॉमेंट या शेयर करने का आग्रह होता है तो मैं सचेत हो जाता हूँ कि कहीं यह रीच बढ़ाने की साज़िश तो नहीं है। मैंने गूगल सर्च किया। कहीं वैशाली नाम की ऐसी किसी लड़की की न तो तस्वीर थी, न ही ऐसी कोई ख़बर थी।

दरअसल कुछ लोग हैं जो लाइक्स पाने के लिए ऐसी तस्वीरें पोस्ट करते हैं जिसमें कोई ग़रीब नज़र आ रहा हो। फिर लिख देते हैं कि उसने क्या अद्भुत कारनामा किया है। साथ ही यह शिकायत भी कि ग़रीबों को तो कोई लाइक ही नहीं करता। मक़सद होता है कि लोग इमोशनल होकर उस पोस्ट को लाइक और शेयर करें।
निश्चित रूप से रमाशंकर जी ने इस मक़सद से यह तस्वीर शेयर नहीं की है। लेकिन जिस व्यक्ति ने यह फोटो बनाया, साथ में लड़की के सफ़ाई कर्मी की बेटी होने और बोर्ड परीक्षा में 500 में 500 नंबर पाने की सूचना डाली, उसने इसी मक़सद से इस फ़ोटो को सोशल मीडिया पर डाला है।
रमाशंकर जी को जब मैंने आगाह किया कि यह तस्वीर फ़ेक हो सकती है तो उन्होंने मजबूरी जताई कि वे नहीं जानते कैसे सच्ची और झूठी ख़बरों को पकड़ा जाए। फिर मैंने उनको कुछ तरीक़े बताए जिनसे फ़र्ज़ी ख़बरों को पकड़ा जा सकता है।
वही तरीक़े शेयर करने के लिए मैंने यह पोस्ट लिखा है ताकि आप भी भावनाओं के बहाव में आकर इमोशनल फ़ूल न बनें और ऐसी फ़ेक ख़बरों को शेयर करने से बचें।
किसी पोस्ट में दी गई जानकारी सही है या फ़ेक है, यह पता लगाने के दो आसान तरीक़े हैं…
- देखें कि क्या उस पोस्ट के साथ किसी विश्वसनीय न्यूज़ वेबसाइट का लिंक है। यदि है तो उस साइट पर जाकर मूल ख़बर को पढ़ें और तसल्ली करें।
- अगर उस पोस्ट के साथ किसी विश्वसनीय न्यूज़ वेबसाइट का लिंक नहीं है तो उस पोस्ट में आए Keywords (जैसे इस पोस्ट में कीवर्ड हैं – वैशाली, बोर्ड, टॉप, सफ़ाईकर्मी) को गूगल सर्च में डालें और साथ में न्यूज़ या समाचार जोड़ें। या फिर गूगल सर्च का News /समाचार टैब चुनकर उसमें ये कीवर्ड डालें। यदि उससे संबंधित कोई समाचार होगा तो गूगल आपके सामने ले आएगा। अगर नहीं होगा तो उस पोस्ट को संदेह की निगाह से देखें और उसे शेयर करने से बचें।
मैंने ये चार की-वर्ड्स गूगल पर डाले तो यह नतीजा आया (चित्र देखें)। अगर यह समाचार सही होता तो वैशाली से जुड़ी कोई ख़बर अवश्य होती। नहीं है यानी यह फ़ेक है।
यह सही है कि इस तरह की ख़बरों को लाइक या शेयर करने से समाज का कोई बड़ा नुक़सान नहीं होता। लेकिन बिना जाँचे किसी ख़बर पर विश्वास कर लेने की यह प्रवृत्ति कई बार समाज का बड़ा नुक़सान कर जाती है। ख़ासकर तब जब इस प्रवृत्ति का लाभ राजनीतिक दलों के IT सेल उठाते हैं और धर्मों व समूहों में नफ़रत फैलाती कोई भी फ़र्ज़ी ख़बर बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देते हैं। तब कई लोग बिना जाँचे-परखे उन फ़र्ज़ी ख़बरों पर भरोसा कर लेते हैं और उसका क्या नतीजा निकलता है, यह हम सब देख रहे हैं।
इसीलिए मैं यह पोस्ट लिख रहा हूँ। हर सूचना को एक पत्रकार की नज़र से देखें। संदेह करना सीखें। सही और ग़लत ख़बरों को परखना सीखें।



