डीएम का तुगलकी फरमान- यूट्यूब, वाट्सअप, फेसबुक, ट्विटर पर न्यूज चलाना बंद करो! (देखें आर्डर कॉपी)

राजस्थान में कुछ आईएएस अधिकारियों ने खुद को खुदा मान लिया है. ये कुछ भी फरमान जारी कर देते हैं. कहने को तो ये काफी पढ़े लिखे और देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास करके अफसर बने हैं पर इन्हें बुनियादी समझ बिलकुल नहीं है.

कोटा के बाद धौलपुर के कलक्टर ने भी एक आदेश जारी कर बिना पंजीयन वाले यूट्यूब, वाट्सएप्प और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर न्यूज चैनल चलाने पर रोक लगा दी है. कोई इन जिलाधिकारी साहब से पूछे कि आप किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्लेटफार्म पर लिखने-पढ़ने से कैसे रोक सकते हैं.

देश दुनिया में चल रही घटनाओं पर किसी भारतीय को अपना मत, अपनी टिप्पणी, अपना नजरिया किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर रखने से कैसे रोका जा सकता है. मीडिया होने की आजादी सबको है और यह अधिकार संविधान देता है. इसके लिए संविधान में कोई अलग से व्यवस्था नहीं है बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी वाले प्रावधान के तहत ही सभी छोटे बड़े मीडिया हाउसेज चल रहे हैं. इसी प्रावधान के तहत हर शख्स अपनी बात कहने लिखने दिखाने का अधिकार रखता है. इसे आपके ये कई पेज के आदेश नहीं रोक सकते.

रही बात यूट्यूब, वाट्सअप आदि के पंजीयन की तो इस बार में अभी तक केंद्र सरकार के स्तर से सिर्फ प्रस्ताव है. इस प्रस्ताव के पारित होने और कानून बनने के बाद जैसे मैग्जीन व न्यूज चैनल के लिए पंजीकरण-लाइसेंस आवश्यक होता है, उसी तरह सोशल मीडिया पर न्यूज चलाने के लिए पंजीकरण आवश्यक होगा. जब तक ये कानून पूरे देश में लागू नहीं होता, आप किसी एक जिले में तुगलकी फरमान जारी कर किसी को न्यूज दिखाने से नहीं रोक सकते. हां, ये संभव है कि आपदा की स्थिति में किसी एक खास प्रकरण पर न्यूज देने से पहले उसकी पुष्टि के लिए सूचना विभाग से संपर्क कर लेने को कह सकते हैं ताकि गलत खबर छपने से कोई पैनिक न फैले.

डीएम के तुगलकी फरमान की संपूर्ण कापी देखें-


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Comments on “डीएम का तुगलकी फरमान- यूट्यूब, वाट्सअप, फेसबुक, ट्विटर पर न्यूज चलाना बंद करो! (देखें आर्डर कॉपी)

  • भारत गोयल says:

    लगता है अभिव्यक्ति की आज़ादी को छीनने का नया पाठ पढ़कर आये हैं कलेक्टर साहब।

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  • Hemant Sikarwar says:

    सरासर गलत है ये आदेश। एक बात कहूँ यूट्यूब चैनल चलाने वाले कोई अनपढ़ या पांचवीं पास नहीं, जो शायद कलक्टर साहब ने समझ लिया। अरे सर ये वो लोग हैं जो अच्छे बैनरों में काम कर चुके हैं और जब उनसे उनकी अभिव्यक्ति नहीं मिलती है तब अपने आपको अलग लिखने की कोशिश करते हैं। ये आदेश तो बिल्कुल गलत हैं, वापिस लिए जाएं।

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