

लखनऊ। आध्यात्मिक भारत की ध्वनि अब विश्व मंच तक गूंज रही है। संगीतकार सिद्धांत भाटिया द्वारा निर्मित एल्बम ‘साउंड्स ऑफ कुंभ’ को 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स की फाइनल नामांकन सूची में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी में शामिल किया गया है।
यह एल्बम उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग की पहल पर तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य महाकुंभ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों को संगीत के माध्यम से दुनिया तक पहुँचाना था। रिकॉर्डिंग अकादमी की आधिकारिक वेबसाइट पर एल्बम का नाम अब औपचारिक रूप से ग्रैमी फाइनलिस्ट के रूप में दर्ज है।
‘साउंड्स ऑफ कुंभ’ में बारह ट्रैक्स और बारह वीडियो शामिल हैं। इसे Network18, HistoryTV18 और Universal Music India के सहयोग से तैयार किया गया है। जुलाई 2025 में रिलीज़ हुए इस एल्बम में विश्वभर के 50 से अधिक कलाकारों ने योगदान दिया, जिनमें श्री श्री रविशंकर, ग्रैमी विजेता जिम कीमो वेस्ट, मादी दास, रॉन कॉर्ब, और राजा कुमारी जैसे नाम शामिल हैं।
निर्माता सिद्धांत भाटिया के मुताबिक, यह काम महाकुंभ की भावना, ध्यान और भक्ति के संगीतात्मक रूप को पेश करता है। इसमें प्रयागराज की फील्ड रिकॉर्डिंग्स, वैदिक मंत्र, आधुनिक धुनें और वैज्ञानिक रूप से ट्यून किए गए बाइनौरल बीट्स को जोड़ा गया है, ताकि श्रोता एक गहन और ध्यानमय अनुभव महसूस कर सकें।
सिद्धांत ने बताया, “हमने महाकुंभ 2025 की आत्मा को संगीत में रूपांतरित करने का प्रयास किया है। भारतीय परंपरा को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाना ही इसका उद्देश्य था।”
भारतीय संगीत के लिए ऐतिहासिक क्षण
संगीत जगत के जानकारों का कहना है कि ग्रैमी जैसे अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार में भारतीय पारंपरिक-आधुनिक संगम को स्थान मिलना स्वयं में ऐतिहासिक है। ‘साउंड्स ऑफ कुंभ’ भारतीय संगीत को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस एल्बम की चर्चा व्यापक स्तर पर जारी है।
अगर यह एल्बम अपनी श्रेणी में विजेता बनता है, तो यह भारतीय संगीत और संस्कृति के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
फरवरी 2026 में होगा ग्रैमी समारोह
अगला ग्रैमी अवॉर्ड समारोह फरवरी 2026 में आयोजित किया जाएगा। तब तक ‘साउंड्स ऑफ कुंभ’ भारतीय संगीत और संस्कृति के प्रतिनिधि स्वरूप में पूरी दुनिया की निगाहों में रहेगा।


