विजय सिंह ठकुराय-
आज हम चर्चा करेंगे मशहूर हॉलीवुड स्टार जैक इलनहाल द्वारा अभिनीत साइंस-फिक्शन फ़िल्म Source Code की। प्राइम ओटीटी पर उपलब्ध यह एक ऐसी फिल्म है, जो आज तक किसी को समझ न आई, मुझे भी नहीं।
फ़िल्म की शुरुआत होती है एक ट्रेन के दृश्य से। फ़िल्म का नायक “कॉल्टर स्टीवंस” अफगानिस्तान में वॉर सिचुएशन में हेलीकॉप्टर उड़ा रहा था। फिर उसकी आंख इस ट्रेन में खुलती है, जहां वह खुद को किसी अंजान शान फेंट्रीस नामक व्यक्ति के शरीर में पाता है, जो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ट्रेन में सफर कर रहा है। नायक इस उधेड़बुन में खोया ही होता है कि यह सब हो क्या रहा है, कि अचानक ट्रेन एक धमाके से उड़ जाती है।
फिर नायक की आंख एक अंधेरे कैप्सूल में खुलती है, जहां सिर्फ एक स्क्रीन मौजूद है, जिसमें दिख रही “गुडविन” नामक एक लेडी ऑफिसर ट्रेन के ब्लास्ट से जुड़ी जानकारी उससे मांगती है।
कुछ देर में नायक को बताया जाता है कि कुछ समय पहले शहर में एक ट्रेन धमाका हुआ है, आगे और भी होने वाले हैं। ट्रेन में सवार एक यात्री “शान फेंट्रीस” की बायोलॉजिकल प्रोफाइल हमारे नायक से मैच खाती है। इसलिए “सोर्स कोड” नामक सिम्युलेटर के इस्तेमाल से नायक की चेतना को शान फेंट्रीस के जीवन के आखिरी 8 मिनट की मेमोरी में ट्रांसफर किया जा रहा है।
बेसिकली हमारा नायक उस अंजान यात्री के आखिरी 8 मिनट को कितनी बार भी जी सकता था और उस 8 मिनट के टाइमलूप में जा कर उसे ट्रेन उड़ाने वाले व्यक्ति की पहचान करनी थी, ताकि आगामी ऐसी घटनाओं को टाला जा सके। और यह मिशन पूरा करने के बाद ही नायक के अन्य सवालों का जवाब दिया जाएगा।
अनिच्छुक होने के बावजूद बार-बार जबरिया इन सिमुलेशन में भेजा जा रहा नायक जल्द ही सिमुलेशन के भीतर ही यह पता कर लेता है कि वो 2 महीने पहले अफगानिस्तान में ही मारा जा चुका है। आगे यह रहस्य खुलता है कि उसके दिमाग सहित शरीर का एक हिस्सा ही बचा हुआ है, जिसे जीवित रख के सोर्स कोड में इस्तेमाल किया जा रहा है। जिस कैप्सूल में वह खुद को देख रहा है और गुडविन से बात कर रहा है – वह उसके दिमाग की इमेजिनेशन है।
जल्द ही नायक को यह भी एहसास हो जाता है कि ये मशीन एक सिमुलेशन की बजाय उस 8 मिनट के दौरान एक “समानान्तर ब्रह्मांड” अथवा “Parallel Reality” को जन्म दे रही है, जिसमें वह घटनाओं को बदल भी सकता है। अंत में नायक ट्रेन के गुनाहगार को पकड़ भी लेता है।
फिर सोर्स कोड के निर्माताओं की मर्जी के खिलाफ गुडविन की मदद से एक आखिरी बार फिर 8 मिनट के लिए नायक सिमुलेशन में प्रवेश करता है। उसके बाद उसके अनुरोध के अनुसार ही – गुडविन उसका लाइफ सपोर्ट बंद करके हमारे ब्रह्मांड में उसके जीवन का हमेशा के लिए The End कर देगी।
नायक आख़िरी बार सोर्स कोड में प्रवेश करता है। ट्रेन को बचाता है। आखिरी मिनट में नायिका को आंखे मूंद कर चूमता है और 8 मिनट पूरे होते ही समय फ्रीज हो जाता है।
और फिर…उसकी बंद आंखें खुल जाती हैं।
Their world goes on !!! But how?
उस 8 मिनट के बाद भी नायक जीवित कैसे रहा, इसका मेरी व्यक्तिगत राय अनुसार एक वैकल्पिक स्पष्टीकरण इस प्रकार है :-
चूंकि सिमुलेशन के भीतर नायक ट्रेन से उतर सकता है, घटनाओं को बदल सकता है, इंटरनेट चला सकता है और गुडविन को ईमेल भेज सकता है – इसलिए हम यह मानना होगा कि सोर्स कोड किसी व्यक्ति की 8 मिनट की मेमोरी पर आधारित नहीं था, बल्कि मशीन उन 8 मिनट में हमारे ब्रह्मांड की प्रत्येक डिटेल को (Down to atoms) सिमुलेट करती थी।
अब चूंकि किसी कंप्यूटर को बंद कर देने अथवा डेटा डिलीट कर देने से भी डेटा डिलीट नहीं होता, बस वह डेटा कंप्यूटर द्वारा “Space available to rewrite” के रूप में मार्क कर दिया जाता है। अर्थात, उस डेटा के ऊपर आप दूसरा डेटा लिख सकते हैं, पर मूल डेटा जल्दी डिलीट नहीं होता और पूरे नहीं तो आंशिक रूप में कंप्यूटर में मौजूद रहता है।
इसलिए मेरा मानना है कि नायक का लाइफ सपोर्ट बंद होने के बावजूद मशीन में मौजूद नायक की चेतना का प्रोग्राम मौजूद रहा और वह चेतना 8 मिनट के लूप में खुद को जी रही है। अर्थात 8 मिनट खत्म होने के बाद अगले 8 मिनट चालू हो जाते हैं और इस तरह 8-8 मिनट के लूप में नायक अपनी नयी पहचान के साथ सोर्स कोड के भीतर अपनी जिंदगी जीता रहेगा।
और मेरे अनुसार जब कोई नया मेमोरी प्रोग्राम सिस्टम में अपलोड किया जाएगा, तब शायद नायक की चेतना धूमिल होते-होते विलुप्त हो जाएगी।


