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राजस्थान की पत्रकारिता में बड़ी हलचल! सच बेधड़क वाले विनायक शर्मा ने महेश झालानी को भेजा नोटिस

सच बेधड़क न्यूज चैनल के मुख्य संपादक विनायक शर्मा ने पत्रकार महेश झालानी को कानूनी नोटिस भेजा है। आरोप है कि झालानी ने अकारण ही सच बेधड़क व विनायक शर्मा पर मनगढ़ंत गंभीर किस्म के आरोप लगाए हैं। विनायक शर्मा ने भड़ास से कहा कि इन आरोपों का उनसे दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है। बल्कि उनके चैनल ने तो खुद ही इस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर खबरें प्रकाशित की थीं। उन्होंने बताया कि- महेश झालानी तमाम व्हाट्सएप ग्रुपों पर बेबुनियाद खबर फैला रहे हैं, जिसके फलस्वरूप उन्होंने नोटिस भेजा है।

नीचे पहले आरोप पढ़ें फिर नोटिस संबंधी खबर…


महोश झालानी-

जल जीवन मिशन का भले ही मुख्य उद्देश्य पेयजल समस्या का निराकरण करना हो। लेकिन प्रदेश के जलदाय विभाग से जुड़े अधिकारियों के लिए यह योजना लूट खसोट करने का मिशन बन गई थी। इस योजना में लिप्त होकर न केवल तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी बल्कि अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल ने भी भ्रष्टाचार के तालाब में जमकर गोते लगाए। प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई और एसीबी को करीब दो दर्जन व्यक्तियों के अलावा सच बेधड़क चैनल के मालिक रहे विनायक शर्मा से भी पूछताछ करनी है।

ईडी सूत्रों ने बताया कि भले ही महेश जोशी अपने आपको निर्दोष बताने का राग अलापता रहे, लेकिन हकीकत यह है कि इसकी मिलीभगत की वजह से इतना बड़ा घोटाला हुआ है। घोटाले से सम्बंधित तमाम दस्तावेज ईडी के पास है। महेश जोशी के बाद ईडी सुबोध अग्रवाल के अलावा विनायक शर्मा को भी गिरफ्तार कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार उपरोक्त तीनो व्यक्तियों के अलावा सुशील शर्मा, तत्कालीन वित्तीय सलाहकार, जल जीवन मिशन, दिनेश गोयल, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग, रमेश मीणा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, अरुण श्रीवास्तव, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, परितोष गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, दिनेश कुमार, अधीक्षण अभियंता, निरिल कुमार, अधीक्षण अभियंता, विकास गुप्ता, अधीक्षण गुप्ता, महेंद्र सोनी, अधीक्षण अभियंता, भगवान सहाय जाजू, अधीक्षण अभियंता, जितेंद्र शर्मा, विशाल सक्सेना, महेश मित्तल, गणपति ट्यूबवेल कम्पनी, पदमचंद जैन, मालिक-श्याम ट्यूबवेल, पोलोविक्ट्री, जयपुर, मुकेश पाठक, मालिक-इस्कान इंटरनेशनल, कटनी, संजय बड़ाया, विकास गुप्ता, टेपन गुप्ता और नमन खंडेलवाल ईडी के राडार पर है।

सूत्र बताते है कि कई मीटिंगों की अध्यक्षता स्वयं सुबोध अग्रवाल ने की थी। इसके अलावा वित्तीय समिति की बैठक संख्या 853 जो दिनांक 9 मई, 2023 को आयोजित हुई थी, उसकी अध्यक्षता अग्रवाल ने की। अग्रवाल के पास करीब एक साल तक जलदाय महकमा रहा। इस दौरान सारी धांधलियां हुई। मनेश कुमार कलवानिया सहित अनेक लोगों ने सम्पूर्ण दस्तावेजों सहित घोटाले की शिकायत सुबोध अग्रवाल को की थी। लेकिन बजाय विस्तृत जांच कराने के ये घोटाले पर पर्दा डालते रहे।

ईडी अधिकारियों से जब यह पूछा गया कि क्या तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी पूछताछ होगी? जवाब मिला कि फिलहाल उनकी डायरेक्ट संलिप्तता नही पाई गई है । अगर किसी प्रकार उनका कोई कनेक्शन पाया जाता है तो अवश्य पूछताछ होगी। ईडी के अलावा एसीबी ने 22 व्यक्तियों के खिलाफ दिनांक 30 अक्टूबर, 2024 को एफआईआर दर्ज की है। चूंकि सुबोध अग्रवाल के सम्बंध में एसीबी को 17ए की स्वीकृति राज्य सरकार से प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए एफआईआर में उनका नाम दर्ज नहीं है। जैसे ही राज्य सरकार से स्वीकृति हासिल होगी, उनको मुल्जिम बना लिया जाएगा। एसीबी ने 67 पृष्ठ की रिपोर्ट दर्ज की है। इस प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक ज्ञान सिंह चौधरी कर रहे है। सीबीआई द्वारा अलग से जांच जारी है।

उधर ईडी, सीबीआई और एसीबी आपसी सम्पर्क में है। इस मामले की ईडी स्वयं तो जांच कर ही रही थी, इसके अलावा उसने दिनांक 4 जून, 2024 को एक पत्र लिखकर एसीबी को निर्देशित किया कि वह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करें। इस पत्र में महेश जोशी पुत्र मूलचंद जोशी और सुबोध अग्रवाल के नाम का भी उल्लेख था।

बताया जाता है कि आरोपियों खासकर महेश जोशी ने रिश्वत की कमाई का अधिकांश हिस्सा रियल एस्टेट में निवेश कर रखा है। न्यूज चैनल सच बेधड़क अप्रत्यक्ष रूप से महेश जोशी का था। इस अखबार में उसने मोटी राशि निवेशित कर रखी थी। ज्ञात हुआ है कि एक ठेकेदार अमरचंद विश्नोई को कोई टेंडर पास कराना था। उसने महेश जोशी से सम्पर्क किया। जोशी ने उसे विनायक शर्मा के पास भेज दिया।

सूत्र बताते है कि टेंडर पास कराने की एवज में विश्नोई ने विनायक शर्मा को दो करोड़ रुपये दिए। एक करोड़ नकद तथा एक करोड़ जरिये चेक। किसी कारणवश विश्नोई का काम नहीं हो पाया। उसने दो करोड़ रुपये विनायक से वापिस मांगे। लेकिन विनायक ने पैसे देने से साफ मना कर दिया। परेशान होकर विश्नोई ने विनायक शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया है। विनायक अब बीजेपी नेताओं की शरण में जाकर कोई नया खेल करने के मूड में है। सन्यासी बनकर कभी आरएसएस चीफ मोहन भागवत से मिलता है तो कभी जेपी नड्डा से। पीएम के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल का नाम लेकर बेधड़क बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं से सम्पर्क साधने में जुटा हुआ है।


सच बेधड़क के विनायक शर्मा द्वारा भेजी गई नोटिस की खबर….

सच बेधड़क के चेयरमैन विनायक शर्मा के बारे में भ्रामक जानकारी फैलाने पर लिया गया लीगल एक्शन

जयपुर। सच बेधड़क मीडिया ग्रुप एवं चेयरमैन विनायक शर्मा के खिलाफ झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाने वाले तथाकथित पत्रकार महेश झालानी को लीगल नोटिस भेजा गया है। ग्रुप के संस्थापक व प्रधान संपादक पंडित विनायक शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई की शुरुआत कर दी है। महेश झालानी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से यह भ्रम फैलाने का प्रयास किया कि सच बेधड़क में किसी नेता का निवेश है, पंडित विनायक शर्मा ने कहा यह संस्थान मेहनत एवं ईमानदारी से बनायी गई है,और संस्थान के ख़िलाफ़ ऐसे झूठे आरोप बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे।

पंडित विनायक शर्मा ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) को भी पत्र लिखकर मांग की है कि ऐसे आदतन अपराधी को पत्रकार मान्यता और पत्रकार पेंशन जैसी सुविधाएं नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एक जिम्मेदार पेशा है, और इसे बदनाम करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। महेश झालानी के ख़िलाफ़ पहले भी कई बार मुक़दमे दर्ज हुए है जिसके चलते पहले भी महेश झालानी की पेंशन बंद कर दी गई थी किंतु कुछ कर्मचारियों से साँठ गाँठ करके मुक़दमे दर्ज होने के बाद भी महेश झालानी ने ग़ैर क़ानूनी ढंग से अपनी पेंशन चालू करवा ली।

सच बेधड़क मीडिया ग्रुप ने स्पष्ट किया है कि गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने DIPR से अनुरोध किया है कि महेश झालानी जैसे कथित पत्रकारों का प्रत्यायन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए, ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे।

ग्रुप की ओर से यह भी कहा गया है कि समाज में भ्रम फैलाने, मीडिया का दुरुपयोग करने और ब्लैकमेलिंग जैसे कृत्यों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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