मैं बंधुआ मजदूर की तरह इस चैनल में नहीं रह सकता!

धनंजय कुमार पाण्डेय-

तकरीबन सात वर्ष पहले वर्ष 2014 में 30,000 रुपये सुदर्शन के एकाउंट में जमा करवाकर मैं चैनल से जुड़ा था। गत वर्ष बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सौरभ तिवारी जब हमारे पास आए तो हमारे क्षेत्र के कई नेताओं से मोटे रुपये (लाखों में) लिए गए और उसमें से मेरे नाम पर 30,000 रुपये सुदर्शन में जमा भी करवाये गए।

सौरभ तिवारी ने मेरे सामने ही राजपुरोहित जी से फोन पर बात की थी और मेरे पैसे जमा करवाने की बात कही थी। मुझे जब समझ में आया कि सौरभ तिवारी चैनल से बेईमानी कर रहे हैं (उम्मीदवारों से ज्यादा पैसे लेकर चैनल में कम बता रहे हैं और जिनसे पैसे लिए हैं उनकी खबर भी ठीक से नहीं चला रहे हैं) तो मैंने इसकी शिकायत राजपुरोहित जी, मुकेश जी, इनपुट के कुछ लोगों और सुरेश चौहाणके जी को की। लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला।

राजपुरोहित जी से बार बार बोलने के बाद भी आज तक मुझे सुदर्शन समाधन नेटवर्क से नहीं जोड़ा गया जबकि मेरे पूरे पैसे जमा हैं। अब तो लगातार तीसरी बार ऐसा हुआ है जब मेरी खबर नहीं चली है। मेरी कल की भेजी गई खबर अभी तक डाउनलोड भी नहीं की गई है।

बहरहाल, मुझे ऐसा लगता है कि जहां मुझे महत्व नहीं दिया जाए वहां मुझे रहना नहीं चाहिए। हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के नाम पर मैं सुदर्शन से जुड़ा था। आप सभी लोगों की ही तरह बिना पैसे लिए मैंने सुदर्शन में अपने जीवन के कीमती सात वर्ष दिए। लेकिन अब और नहीं। शायद हमारा साथ यहीं तक था। आज भारी मन से मैं ये कहने को बाध्य हूँ कि मैं बंधुआ मजदूर की तरह इस चैनल में नहीं रह सकता। बहुत सोचने के बाद मैंने अपनी बात को सार्वजनिक रूप से ग्रुप में कहने का निर्णय लिया।

यदि जाने अनजाने में सुदर्शन परिवार के किसी सदस्य को मैने कभी ठेस पहुंचाई हो तो उसका मुझे खेद रहेगा। सुदर्शन छोड़ रहा हूँ, पत्रकारिता नहीं। मैं जहां भी रहूंगा अपने पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्र और धर्म की सेवा करता रहूंगा। मैं जानता हूं ग्रुप में सार्वजनिक रूप से अपनी बात कहने के बाद मुझे ग्रुप से निकाल दिया जाएगा। लेकिन फिर भी मैं ग्रुप लेफ्ट नहीं करूंगा, खुद को ग्रुप से निकाले जाने का इंतजार करूंगा।

साभार

धनंजय कुमार पाण्डेय
(पश्चिम बंगाल, हुगली)



 

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Comments on “मैं बंधुआ मजदूर की तरह इस चैनल में नहीं रह सकता!

  • योगेश says:

    ‘पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्र और धर्म की सेवा करता रहूंगा’ राष्ट्र तो ठीक है, पर धर्म का क्या मतलब..आपको न्यूट्रल होना था।

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  • SOHAN PRASAD says:

    बिल्कुल सत्य हैं,स्ट्रिंगर को खबरों की मेहनत पे कुछ नहीं मिलता एवं हर वर्ष कार्ड रिनीवल के नाम पे 30 हजार की डिमाण्ड की जाती हैं अन्यथा राजकुमार राजपुरोहित द्वारा FTP ग्रुप से रिमूव कर दिया जाता हैं।

    Reply

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