
सुरेंद्र सिंह-
शुक्रवार, शाम 3 बजे “प्रसार भारती” के चेयरमैन, ऑफिस बुलाया गया था। मुझे लगा कि आज तो “पंद्रह लाख रुपये” आठ महीने बाद सम्भवतः मिल ही जाएंगे। लेकिन मुझे यह आभास नहीं था कि प्रसार भारती सुधीर चौधरी के पैसों की चिंता करेगा। मेरे पैसों की नहीं। मुझे तो यह लगा कि “प्रसार भारती” सुधीर चौधरी के अंदर आता है। मैं तो समझा था कि आज दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
प्रसार भारती के पास सुधीर चौधरी के दो गुर्गे आए थे। मुझसे प्रसार भारती ने कहा कि हमारे लिए भी कुछ काम कर देंगे तो इस तरह आपके बचे पैसे यहां से निकल आएंगे। प्रसार भारती ने पूछा आठ लाख पर फ़ाइनल हुआ है न? मैंने कहा हां। (आपको यह बता दूं कि पंद्रह लाख में से आठ लाख, या छह लाख तक लेने को इसलिए मैं तैयार हो गया कि मेरे काम खराब है कतई नहीं। बल्कि भागते भूत की लंगोटी भली इसलिए। क्योंकि मुझे पैसों की जरूरत थी। घर चलाना होता है)
एक घंटे बाद सुधीर चौधरी के गुर्गे एक एग्रीमेंट पेपर बना कर लाए। मैंने देखा एग्रीमेंट पर पांच लाख रुपये लिखा हुआ है। यह देख मेरा दिमाग गर्म हो गया। मैंने कहा ये क्या है? पंद्रह लाख में से पांच लाख? आठ लाख भी नहीं? पंद्रह लाख रुपए में 6 महीने के 10% इंटरेस्ट जोड़ दूं, यह रकम 23 लाख रुपये हो जाए? पांच लाख तो मैंने हेल्पिंग हैंड लड़कों को दे दिए। गुर्गे बोले आपके बचे पैसे “प्रसार भारती” से निकल आयेगा न? मतलब आपको कुछ काम मिल जाएगा? तो ये हिसाब बराबर हो जाएगा। कितनी कमाल की डील और इंसाफ है न? कल मैं जिन्दा रहूं न रहूं किसने देखा है?
मैंने कहा जाओ मैंने पंद्रह लाख छोड़ दिए। सुधीर चौधरी को कहना एम्प्लॉई में बांट दे। नए पैंट और शर्ट खरीद ले। आपको बता दूं- “DECODE” इसका प्रोमो भी मैंने ही लिखा था। लेकिन मैंने इसके पैसे नहीं जोड़े। मेरे पांच सौ घंटे इसके काम और इस हरकत पर गुजर गए हैं। सच कहिए तो मैं तंग आ गया।
मदर-इन-लॉ बीमार थीं। पूरे परिवार को लेकर मैं जमशेदपुर गया। सिर्फ एक रात मैं वहां रहा, पत्नी को छोड़ बच्चे समेत मैं आ गया। पूरे 75 हजार एक दिन में खर्च हो गए। देखिए क्या इनाम मिला? इसके एक पैसे अब तक काम नहीं आए। इतना मनहूस निकला ये।
कुछ लोग कंजड़, मनहूस होते ही हैं। असल में ये भिखारी होते हैं। किसी के जीवन में आते हैं तो ये कुछ दे कर नहीं जाते, लूट कर जाते हैं। ऐसे लोग हृदय के मलिन/काले होते हैं। पंद्रह करोड़ नहीं, पंद्रह लाख करोड़ भी नहीं, साला पूरे देश की जीडीपी भी इनके हाथ लग जाए न, तब भी ये भिखारी प्रवृति के ही रहेंगे। आपका समय बर्बाद करेंगे और जीना हराम कर देंगे वह अलग। सुअर कीचड़ में लेकर आपको जाता है, उसको तो मज़ा आता है लेकिन आप गंदे हो जाएंगे। लूडो यानी सांप सीढ़ी के खेल में इस तरह के लोग सांप होते है। इसको छोड़ देना ही बेहतर। क्रिएटिव कामों में कूटनीति नहीं चाहिए। देश इसलिए गर्त में है। चलिए छोड़िए Next अगला काम देखा जाय। आगे चला जाए। अन्यथा ये तो मेरा उम्र निगल जाएगा। ये टाइम पास ही कर रहा है।
आदरणीय मित्रों आप लोगों ने मेरे पिछले पोस्ट को जान लगाकर शेयर किया। जिसका एहसान आप सबका कभी न चुका सकूंगा। आप लोगों के प्रति मैं बहुत ही आभार प्रकट करता हूं। और आप सबको सहृदय प्रणाम करता हूं। मेरे बाबूजी बहुत ही ईमानदार आदमी थे। उन्होंने पांच मकान, आठ ज़मीन लोगों को दान कर दिए। मैंने भी यह पैसा छोड़ दिया।


