
आरके जैन-
बाबू जगजीवन राम के हाथों से कैसे फिसली थी PM की कुर्सी और कैसे तबाह हुआ था उनका राजनीतिक जीवन ?
21 अगस्त 1978 को बाहरी दिल्ली के मोहन नगर इलाके में मोहन मीकिन प्लांट के गेट के सामने एक एक्सीडेंट हुआ। मर्सिडीज कार ने एक व्यक्ति को कुचल दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी अपनी किताब ‘हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ में लिखती हैं कि उस मर्सिडीज कार के भीतर सिर्फ दो लोग थे- एक लड़का और एक लड़की। दोनों को आशंका की थी कि भीड़ उन्हें पीटने लगेगी।
ड्राइविंग कर रहे लड़के ने गाड़ी मोहन मीकिन प्लांट के अंदर दौड़ा दी। चौकीदार ने इंटरकॉम से प्लांट के मैनेजर अनिल बाली को सूचना दी कि एक कार एक्सीडेंट करके प्लांट में घुस रही है। अनिल ने मर्सिडीज से उतरते लड़के को झट से पहचान लिया। वो तत्कालीन रक्षामंत्री बाबू जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम थे। कार में बैठी लड़की सुरेश राम की गर्लफ्रेंड थी।
इस घटना के बाद खुली सेक्स स्कैंडल की एक कहानी !
पॉलिटिकिल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर बेटे सुरेश राम का ये सेक्स स्कैंडल सामने नहीं आता, तो शायद 1980 के दशक में ही जगजीवन राम के रूप में देश को पहला दलित प्रधानमंत्री मिल गया होता।
अगले ही दिन सुरेश राम ने दिल्ली के कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई।
सुरेश राम ने FIR में लिखवाया कि 20 अगस्त 1978 को दर्जनभर बदमाशों ने उन्हें किडनैप कर लिया था। नई दिल्ली में दो टैक्सी बहुत देर से उनकी मर्सिडीज बेंज कार का पीछा कर रही थीं। जब निगम बोध घाट का सुनसान इलाका आया तो दोनों टैक्सियों ने मर्सिडीज को ओवरटेक कर रोक लिया। सामने आते ही टैक्सी में सवार लोगों ने रिवॉल्वर अड़ा दी।
बदमाशों ने कार का दरवाजा खोला। सामने बैठी लड़की को पीछे बैठा लिया। वो सुरेश को जबरदस्ती दिल्ली से सटे UP के मोदी नगर इलाके में ले गए। इसके बाद सुरेश राम और उनकी गर्लफ्रेंड को एक स्कूल के कमरे में ले जाया गया। उन्हें तब तक पीटा गया जब तक वे बेहोश नहीं हो गए। इसके बाद बदमाशों ने सुरेश को बताया कि उनकी और लड़की की नग्न अवस्था में फोटो ली गई हैं।
नीरजा चौधरी अपनी किताब में लिखती हैं कि राजनारायण के आदमी ओम पाल सिंह को पता था कि सुरेश की गर्लफ्रेंड दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट थी। वह जाट कम्युनिटी से आती थी। सुरेश राम जब भी उसके साथ अंतरंग पलों में होते थे, अपने पोलरॉइड कैमरे से उसकी न्यूड फोटोज लेते थे। पोलरॉइड कैमरा वह होता है, जिसमें हाथोंहाथ प्रिंट बाहर आ जाता है। ओम पाल को पता था कि सुरेश की कार के ग्लव बॉक्स में वो नग्न तस्वीरें हैं। जब पीछा करने के दौरान टैक्सी अड़ाकर जैसे ही सुरेश राम की कार ओम पाल ने रोकी, उसने तुरंत सुरेश की कार से वो न्यूड तस्वीरें निकाल लीं।


जब वो तस्वीरें ओम पाल के पास आईं तो आगे क्या हुआ। लगभग 40 तस्वीरें लेकर ओम पाल सीधे राजनारायण के पास पहुंचे। उसी रात राजनारायण और बाबू जगजीवन राम की एक मीटिंग कपिल मोहन के घर पर फिक्स हुई। कपिल मोहन वो उद्योगपति थे, जिनकी इंदिरा गांधी ही नहीं जगजीवन राम, अटल बिहारी वाजपेयी और PM मोरारजी देसाई सहित सभी नेताओं से अच्छी बनती थी।
अनिल बाली, कपिल मोहन के भतीजे थे। अनिल ने कहा, ‘बाबूजी राजनारायण को मनाने आए थे।’ दरअसल ये मनाने-रूठने की बात नहीं थी। जगजीवन राम अपने बेटे सुरेश और उनकी गर्लफ्रेंड की न्यूड फोटोज का सौदा करने आए थे। जैसे ही जगजीवन राम कपिल मोहन के बंगले पर पहुंचे, उन्हें चाय-कॉफी ऑफर किया गया। जगजीवन राम का मूड खराब था। उन्होंने कुछ नहीं लिया। रात पौने बारह बजे तक चली मीटिंग में राजनारायण और जगजीवन राम की अकेले में बीस मिनट बातचीत हुई।
जगजीवन राम को छोड़ने के बाद जब कपिल मोहन लौटकर आए तो राजनारायण ने कहा, ‘ये आज काबू में आए।’ जगजीवन राम ने राजनारायण से कहा- मैं आपको कुछ भी देने को तैयार हूं। आप चाहे जितना पैसा मांग लीजिए। चाहें तो किसी राज्य का CM बना सकता हूं। मैं PM बनने वाला हूं किसी को मंत्री बनाना है तो बताना। बस वो तस्वीरें मुझे वापस कर दीजिए। जगजीवन राम के खुले ऑफर के बाद भी राजनारायण पिघले नहीं और दोनों के बीच कोई डील नहीं हो सकी।
इसके बाद राजनारायण ने कुछ फोटो कपिल मोहन को दीं और बाकी अपने पास रख लीं और वे निकल गए। रात के साढ़े 12 बज रहे थे। कपिल ने अपने भतीजे अनिल बाली को बुलाया और कहा कि इन फोटो को तुरंत संजय गांधी के पास ले जाओ। रात एक बजे अनिल इंदिरा गांधी के घर पहुंचे। संजय गांधी को जगाया। नाराज संजय गांधी चिल्लाते हुए अनिल से बोले- ये कोई आने का वक्त है? फिर अनिल ने संजय को सुरेश राम के एक्सीडेंट और न्यूड फोटो वाली बात बताई।
संजय गांधी ने कहा- तो क्या आप मुझे पोर्नोग्राफी दिखाने आए हैं। ? अनिल ने कहा- ये पोर्नोग्राफी नहीं सुरेश राम हैं। ये सुनते ही संजय गांधी चुप हो गए। वो अंदर गए और उन्होंने अपनी मां इंदिरा गांधी को उठाया। इंदिरा अपने कमरे से बाहर आईं। उन्होंने अनिल से पूछा- इन तस्वीरों के बारे में और कौन-कौन जानता है? अनिल बोले- ओम पाल सिंह और केसी त्यागी। संजय ने अनिल से कहा कि दोनों को सुरक्षित जगह पर ले जाओ। आखिरकार उस समय जगजीवन राम रक्षा मंत्री थे। वे चाहते तो इंदिरा गांधी के घर पर छापा मारकर तस्वीरें जब्त भी कर सकते थे, हालांकि उन्होंने ऐसा नहीं किया।
लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी अपनी किताब “हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ में लिखती हैं कि अगले दिन 22 अगस्त 1978 को सुबह 9 बजे पुराने कांग्रेसी और उस समय जनता पार्टी के सांसद कृष्णकांत परिवार के साथ अपने सरकारी बंगले पर नाश्ता कर रहे थे। इतने में टेलीफोन की घंटी बजी। फोन रक्षा मंत्री के घर से था। वो बात करने के लिए बेडरूम में गए। उधर से आवाज जानी पहचानी थी। ये आवाज बाबू जगजीवन राम की थी। कृष्णकांत उनके पुराने दोस्त थे। ये वो थे जिन पर जगजीवन राम आंख बंद करके भरोसा करते थे। जगजीवन राम ने फोन पर कृष्णकांत से कहा, ‘एक और बेटे ने अपने बाप को डुबो दिया।’
10 मिनट बाद कृष्णकांत के घर पर रक्षा मंत्री के घर से कार आई और वो उसमें बैठकर जगजीवन राम के घर 6, कृष्ण मेनन मार्ग चले गए। जैसे ही कृष्णकांत पहुंचे, जगजीवन राम ने रूम में बैठे हर शख्स से कहा कि यहां से चले जाइए। जब रूम में दोनों अकेले थे तो जगजीवन राम उठे और अपनी गांधी टोपी को उतारकर कृष्णकांत के पैरों में रख दिया और कहा, ‘अब मेरी इज्जत आपके हाथों मे है।’ उन्हें जगजीवन राम ने सुरेश का पूरा किस्सा बताया।
कृष्णकांत ने मीडिया को मैनेज करने में जगजीवन राम की मदद की। दरअसल, अब तक सभी अखबार के दफ्तरों में सुरेश राम और उनकी गर्लफ्रेंड की न्यूड तस्वीरों की कॉपी भेजी जा चुकी थीं। केवल इंडियन एक्सप्रेस ने एक पीस लिखा, बाकी मीडिया मैनेज हो गया था। ये वो समय था जब संजय गांधी की पत्नी मेनका ने ‘सूर्या’ नाम की मैगजीन शुरू की थी।
सूर्या मैगजीन ने सुरेश राम और उनकी गर्लफ्रेंड की खबर को कवर पेज पर तो जगह दी ही, पूरी खबर आठ पेजों में छापी। इसमें दो पेज में न्यूड तस्वीरें थीं। राजनारायण के अलावा सुरेश राम की पत्नी कमलजीत कौर का इंटरव्यू भी छापा। सूर्या मैगजीन ने इस खबर को सनसनीखेज बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मैगजीन में लिखा था कि सुरेश राम एक शादीशुदा 42 वर्षीय पब्लिक फिगर हैं। उनकी पत्नी है। एक बढ़ती बेटी है और उनकी गर्लफ्रेंड की उम्र केवल 20 साल है।
इस स्कैंडल के छपने के बाद सूर्या मैगजीन की कॉपियां ब्लैक में बिकीं। मैगजीन की बिक्री बढ़ गई, लेकिन बाबू जगजीवन राम का सार्वजनिक जीवन बैठ गया। स्कैंडल के छपते ही बाबू जगजीवन राम का PM बनने का सपना भी टूट गया था और साथ ही उनका राजनीतिक करियर भी ख़त्म हो गया था ।


