यौन उत्पीड़न की शिकार महिला पत्रकार को केस वापस लेने के लिए जान से मारने की धमकी दे रहे आरोपी

फिल्म सिटी स्थित सूर्या समाचार में कार्यस्थल पर शारीरीक शोषण की शिकार हुई पीड़ित महिला पत्रकार को अब जान से मारने की धमकी मिल रही है। पिछले कुछ महीनों से इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक सुनील ने कई बार पीड़िता को फोन कर धमकाया है। पीड़िता के मुताबिक उन्हें मोबाइल नंबर- 9760832865 और 9760522427 से सुधाकर सिंह व सुरेंद्र सिंह द्वारा मेरठ से लगातार फोन कर धमकियां दी जा रही हैं।

इतना ही नहीं पीड़िता का कहना है कि सुनील खुद या अपने गुर्गों के जरिए इस नंबर से मैसेज कर उसे इस केस को जल्दी से जल्दी मैनेज करने के लिए मैसेज भी भेज रहा है। पीड़िता ने बताया है कि उनके साथ गलत करने वालों ने उन्हें केस को मैनेज ना करने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी है।

पीड़ित ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा- ‘ये लोग सुनील के लोग हैं, मुझे मार देंगे। मैं मानसिक तौर से काफी दुखी हो गई हूं। मेरे कार्यालय में भी लोगों को भेज कर मुझे धमकियां दी जा रही हैं। मेरे पीछे आदमी को लगा दिया गया है…मुझ पर नजर रखी जा रही है। सुनील के गुर्गों से बचने के दौरान भागी तो मैं भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई और अभी मैं जिदंगी और मौत के बीच झूल रही हूं। मुझे इंसाफ चाहिए। पुलिस ने आज तक आऱोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। आऱोपी मेरठ का रहने वाला है और मुझे डर है कि कहीं मेरा हश्र भी यूपी पीड़िता की तह ना हो जाए। मेरी जान को खतरा है…मैं मर गई तो इसके जिम्मेदार सुनील, अमिताभ भट्टाचार्या तथा सूर्या समाचार होंगे। आप मेरी फरियाद सुनिए।’

आपको बता दें कि सूर्या समाचार में कार्यस्थल पर शारीरीक शोषण की शिकार हुई पीड़ित महिला पत्रकार के मामले में पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। दरअसल इस मामले के शुरुआत में ही वरीय अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा था क्योंकि नोएडा सेक्टर-20 थाना पीड़िता के शिकायत पर केस दर्ज करने के लिए राजी नहीं थी।

हालांकि देर ही सही 1 महीने के बाद थाने में केस दर्ज किया जा सका। लेकिन सेक्टर 20 थाने के आईओ साक्ष्यों को जुटाने में उतने सक्रिय शुरू से ही नजर नहीं आए। कहा जा रहा है कि आईओ साहब मामले की तफ्तीश करने में न्यूज चैनल के मालिक और आरोपी अमिताभ भट्टाचार्या से खौफ खाते थे। लिहाजा वहां जांच के लिए जाने से पहले इस केस के आईओ साहब आरोपियों को सूचित कर देते थे जिसकी वजह से आरोपी पुलिस के आने से पहले ही आराम से फरार हो जाते थे और पीड़िता से बार-बार यहीं कहा जाता था कि अपराधी का पता नहीं चल पा रहा है।

इतना ही नहीं कई बार तो पुलिसवाले पीड़िता से ही पूछते थे कि – आप हमें बताइए आरोपियों का पता।

इधर इस मामले की जांच चल रही थी और नोएडा के पुलिस कप्तान बदल गए। नए एसएसपी वैभव कृष्ण आए केस दोबारा खुला। कप्तान के पहल पर पीड़िता तथा आरोपी पक्ष की फिर से गवाही ली गई। थाने में गवाही के वक्त एसएसपी वैभव कृष्ण भी मौजूद थे। गवाही के वक्त पीड़िता के आरोपों को सुन और मामले में आईओ के टाल मटोल रवैये को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल इस केस के आईओ को फटकार भी लगाई थी। यह मामला अब नोएडा सेक्टर-39 स्थित महिला थाने को ट्रांसफर कर दिया गया है।

अब इस मामले में कुछ ही दिनों पहले एक बार फिर पीड़िता की महिला थाने में गवाही हुई है। पीड़िता की गवाही के बाद महिला थाने की टीम मामले की छानबीन करने सूर्या समाचार के दफ्तर पहुंची। महिला पुलिस को ऑफिस में देख वहां हड़कंप मच गया।

इस दिन छानबीन के दौरान पुलिस ने कार्यालय में मौजूद लगभग सभी कर्मचारियों से पूछताछ की और लिखित रुप से उनके बयान भी दर्ज किए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कई ऐसे कर्मचारी थे जिन्होंने अपनी रोजी-रोटी यानी नौकरी बचाने के डर से दबाव में आकर बयान दिए। कहा जा रहा है कि कार्यालय में तैनात वो कर्मचारी जो इस मामले में पीड़िता के पक्ष में थे उन्हें चैनल के मालिक ने पहले ही चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

हालांकि अभी भी चैनल के कुछ कर्मचारी दबी जुबान से पीड़िता के पक्ष में बोल रहे हैं और उनकी आरोपों को जायज ठहरा रहे हैं। लेकिन नौकरी जाने के डर से यह सभी लोग खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस चैनल में बड़े-बड़े पत्रकारों ने थोड़े ही दिनों के लिए सही लेकिन काम किया है वहां अंदरुनी हालात कैसे हैं?

यह विडंबना है उस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए जिसे संविधान का चौथा स्तंभ कहा जाता है। तो ऐसे में कह सकते हैं कि ‘चिराग तले अंधेरा अभी भी कायम है।’ अब जरा जान लीजिए कि अब तक इस मामले में कितने पेंच आएं और कैसे कछुए की रफ्तार से यह जांच चल रही है।

जब घटना के बाद पीड़िता की गुहार पर लिखित शिकायत सेक्टर 20 थाने में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कि और उल्टे पीड़िता के साथ ही बदतमीजी से पेश आती रही तब यह खबर सबसे पहले भड़ास4मीडिया के संज्ञान में आया।

पीड़िता ने इस पूरे मामले की जानकारी सोशल मीडिया (ट्विटर-फेसबुक) पर लखनऊ में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य के मुखिया यानी सीएम योगी आदित्यनाथ को दी। तब जाकर नोएडा सेक्टर-20 थाने की नींद खुली और आनन-फानन में पीड़िता को थाने बुलाया गया और सेक्टर 20 थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। जिसका एफआईआर नंबर 2018/1599 है।

इसमें दो आरोपियों अमिताभ भट्टाचार्या और सुनील पर धारा 354, 504, 506, 376 और 511 के तहत अभियोग पंजीकृत है। इसके अलावा पीसीआर में कार्यरत बृजभूषण और स्वाति को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है। लेकिन इन तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। चैनल के कई कर्मचारी अभी भी अमिताभ भट्टाचार्या के जुल्म को सहने के लिए मजबूर हैं यानी पुलिस की मिलीभगत के चलते आरोपी आराम से नौकरी कर रहे हैं।

बता दें कि अमिताभ भट्टाचार्या के घिनौने कामों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली पीड़िता को अपनी गरिमा, इज़्ज़त और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने के कारण न सिर्फ नौकरी से निकाल दिया गया बल्कि उसकी उस महीने की सैलरी भी रोक दी गई। आरोपियों ने कई बार पीड़िता को मैसेज या फोन कर धमकी भी दी। यहां तक कि कोर्ट में गवाही के दिन भी पीड़िता को पुलिस के सामने बार-बार फोन कर गवाही देने से मना किया जा रहा था और गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही थी।

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