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आज के अखबार : सुशासन की जीत का दावा और थाने में रखे बरामद विस्फोटक में ब्लास्ट की खबर

संजय कुमार सिंह

सरकार और सरकारी लापरवाही तथा नालायकी का इससे बढ़िया उदाहरण क्या होगा कि लाल किले के आतंकी समूह से बरामद विस्फोटक जम्मू और कश्मीर के थाने में रखा था और अचानक उसमें विस्फोट हो गया। यह खबर उसी दिन आई है जब प्रधानमंत्री ने बिहार में सुशासन की जीत का दावा किया है। इंडियन एक्सप्रेस में जोरदार विस्फोट की खबर है। खबर के अनुसार पुलिस ने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है पर सूत्रों के अनुसार कुछ मौतों का डर है। द हिन्दू में यह खबर छोटी सी है लेकिन अंदर के विवरण के अनुसार आठ लोग घायल हुए हैं। जो भी हो, विस्फोटक बरामद करके थाने में रखने का नियम – और अगर है तो उसे अभी तक नहीं बदला जाना और उस सरकार द्वारा नहीं बदला जाना जो अनुच्छेद 370 हटाने के लिए आमादा थी। उसके नफा-नुकसान पर कुछ कहा नहीं है। कश्मीर में कोई भी जमीन खरीद सकता है के प्रचार का क्या हुआ पता नहीं है। यह खबर सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर है। आज ही दि एशियन एज और देशबन्धु में खबर है कि सुरक्षा बलों ने आतंकी उमर का घर ध्वस्त कर दिया। देशबन्धु में खबर बड़ी, फोटो छोटी है। दि एशियन एज में फोटो बड़ी खबर कैप्शन बराबर ही है। यह भी देश भर में चल रहे भाजपाई सुशासन का नमूना है। एक और बात गौरतलब ह कि लाल किला विस्फोट के लिए ज्यादातर सामान डबल इंजन वाले हरियाणा से खरीदे गए हैं। हरियाणा की खासियत यह भी है कि वहां की सरकार चोरी की है, इसपर चुनाव आयोग ने कुछ नहीं कहा है और राहुल गांधी के खुलासों पर प्रचारक मीडिया ने जो सब कहा है उससे उनके आरोपों की पुष्टि ही होती है लेकिन यह सब भाजपाई तरीका है जो इस समय देश भर में, जहां-जहां दिख रहा है

संभव है बिहार वालों ने इसी लिए राजग गठबंधन को चुना हो। संपादकों को लगता हो कि यह सब मोदी की लोकप्रियता का कमाल है लेकिन विपक्ष के नेता का बयान और पक्ष तो मांग कर लेने और छापने का रिवाज रहा है। अखबारों का तो काम है कि वे खबरों को निष्पक्षता से छापें। पर अब निष्पक्ष दिखने की कोशिश या औपचारिकता भी नहीं होती है। आइए देखें आज क्या हुआ है। वैसे तो आज बिहार चुनाव में भाजपा और नीतिश के गठबंधन की जीत की खबर प्रमुखता से छपी है लेकिन खास बात यह है कि इसमें सरकार के दावों को पूरी उदारता से जगह दी गई है जबकि विपक्ष के आरोपों को नहीं के बराबर जगह मिली है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर पांच लोगों के बयान छापे हैं। इनमें राहल गांधी ने कहा है, बिहार के नतीजे सही अर्थों में चौकाने वाले हैं। हम एक ऐसे चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए जो शुरू से ही निष्पक्ष नहीं था। यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है, यह ‘विकसित बिहार’ में विश्वास रखने वाले हर बिहारवासी की जीत है। जंगलराज और तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले किसी भी भेष में आएँ, उन्हें लूटने का मौका नहीं मिलेगा। यह दावा आज के अखबारों में इस तथ्य के बावजूद है कि भाजपा के ही नेता, आरके सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य में 62 हजार करोड़ के बिजली घोटाले का आरोप लगाया था। यह मामला अदाणी समूह से संबंधित है और ऐसे कितने ही मामले हैं जिनकी जांच नहीं हुई, संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। अमित शाह जब (विपक्ष को) लूटने का मौका नहीं मिलने की बात कर रहे हैं तब बिहार भाजपा के नेता ने ही आरोप लगाया था कि, जिस जमीन पर अदाणी समूह को परियोजना के लिए अनुमति दी गई, वह बाजार दर से कई गुना सस्ती दी गई है। उन्होंने कहा कि “सरकार ने जिस निवेश की बात कही थी, वह आंकड़ों में गड़बड़ है। असल लागत और घोषित निवेश में भारी अंतर है।” आरके सिंह के इन आरोपों के बाद सियासी बवाल मच गया था। विपक्ष ने इसे “घोटाले का खुला सबूत” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला था। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर आरके सिंह का वीडियो साझा करते हुए लिखा था, 62,000 करोड़ का बिजली घोटाला सामने है, लेकिन प्रधानमंत्री खामोश हैं। क्या यही पारदर्शिता है?” और बात सिर्फ पारदर्शिता की नहीं है। गुलाम मीडिया के कारण यह चुनावी मुद्दा नहीं बना और आज यह खबर भी नहीं है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार प्रधानमंत्री ने इसे सुशासन की जीत कहा है और नीतीश के मुख्यमंत्री बने रहने के संकेत दिए। नीतीश अपने समर्थकों के बीच “सुशासन बाबू” के नाम से लोकप्रिय हैं, और पिछले 20 वर्षों में कानून-व्यवस्था तथा विकास में सुधार लाकर बदलाव लाने का दावा करते हैं। मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “विकास की जीत हुई है। जन कल्याण की भावना की जीत हुई है। सामाजिक न्याय की जीत हुई है।” मोदी ने कहा, “मैं एनडीए के सभी नेताओं को उनके शानदार काम के लिए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके नेतृत्व के लिए बधाई देता हूँ।” उन्होंने नीतीश के मुख्यमंत्री बने रहने की आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ये तो हुई प्रधानमंत्री की अपनी बात। विपक्ष ने दावा किया था कि भाजपा नीतीश को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। लेकिन प्रधानमंत्री विपक्ष के बारे में भी बोलते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे पहले पन्ने पर छापा है लेकिन विपक्ष के नेताओं में किसी का कहा कुछ नहीं है। मोदी ने जो कहा है वह इस प्रकार है, “मुझे लगता है कि कांग्रेस में जल्द ही एक बड़ा विभाजन देखने को मिलेगा, पार्टी के कुछ ‘नामदार’ सबको अपने साथ ले जा रहे हैं। बिहार की जीत ने महिलाओं और युवाओं को एक नया सकारात्मक ‘माई’ फॉर्मूला दिया है। जिस तरह गंगा नदी बिहार से होकर पश्चिम बंगाल में बहती है, उसी तरह इस जीत ने पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की जीत का रास्ता साफ कर दिया है।

बिहार और बंगाल की राजनीति एक जैसी नहीं है। मुख्य मंत्री तो बिल्कुल अलग हैं। जहां तक नीतिश कुमार की बात है, 2013 में, जब नरेंद्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया तो नीतीश कुमार ने भाजपा से दूरी बना ली और मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। 2014 के लोक सभा चुनावों में भाजपा की जीत और जेडीयू की बुरी फजीहत के बाद उन्होंने जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। 2015 में उन्होंने महागठबंधन (राजद + कांग्रेस) के साथ मिलकर बिहार में सत्ता में वापसी की और मुख्यमंत्री बने। लेकिन 2017 में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उन्होंने फिर से गठबंधन तोड़ा और राजग में लौट गए। 2020 के विधानसभा चुनाव में उनका एनडीए गठबंधन जीत गया, लेकिन उनकी पार्टी जेडीयू का सीट शेयर गिर गया। फिर अगस्त 2022 में उन्होंने एक बार फिर एनडीए छोड़कर महागठबंधन में वापसी की, यह आरोप लगाते हुए कि भाजपा उनकी पार्टी को कमजोर कर रही है। जनवरी 2024 में उन्होंने चौथी बार अपनी राजनीति का रुख बदलकर एनडीए के साथ गठबंधन किया और मुख्यमंत्री पद संभाला। यह सिलसिला दिखाता है कि 2013–2025 में नीतीश कुमार अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए लगातार गठबंधन बदलते रहे हैं। इसलिए उन्हें पलटू कुमार भी कहा जाता है लेकिन भाजपा भी उन्हें गले लगाने के लिए मजबूर रही है। इस बार उन्हे मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं घोषित किया गया लेकिन उनकी सीटें इतनी आई हैं कि भाजपा या नरेन्द्र मोदी को उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का संकेत देना पड़ा है।

पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर लगे पोस्ट की खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में है। इसके अनुसार, टाइगर अभी जिन्दा है। अगर वाकई तो क्या कुछ लोगों को परेशान कर पाएगा या बूढ़ा हो गया है – समय बताएगा। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो पच्चीस साल पहले पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और जिनके एक परीकथा जैसे समापन समारोह में दसवीं बार शपथ लेने की उम्मीद है, ने शुक्रवार को कहा कि वह “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के लिए उनके आगे नतमस्तक हैं” और उस व्यक्ति के प्रति “हार्दिक आभार” व्यक्त करते हैं जिससे उन्होंने राजनीतिक रूप से नाता तोड़ लिया था और फिर से साझेदार बन गए थे। यह स्वीकार करते हुए कि भाजपा के साथ जदयू का गठबंधन दोनों के लिए शानदार रहा, नीतीश ने एक्स पर पोस्ट किया, “एनडीए ने इस चुनाव में पूर्ण एकता का प्रदर्शन किया है और भारी बहुमत हासिल किया है।” हालाँकि, गौरतलब है कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के इस महत्वपूर्ण क्षण का जश्न मनाने के लिए सार्वजनिक रूप से उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। इससे उनके स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर अटकलों को बल मिला।

आज के शीर्षक इस प्रकार हैं

1. अमर उजाला

नमो-नीतिश की सुनामी

2. नवोदय टाइम्स

नी(तिश)मो(दी) ने उड़ा दिया गर्दा

3. देशबन्धु

बिहार में राजग की बंपर जीत

4. टाइम्स ऑफ इंडिया

बिहार राजग का हुआ, महागठबंधन की बड़ी हार

5. हिन्दुस्तान टाइम्स

राजग ने ग्रैंड ब्लॉक बस्टर का स्क्रिप्ट तैयार कर दिया

6. द हिन्दू

एनडीए ने बिहार में धूम मचा दी

7. इंडियन एक्सप्रेस

नीतिश की लहर, एनडीए की आंधी

8. दि एशियन एज

नीतिश भाजपा ने बिहार साफ कर दिया 

9. द टेलीग्राफ

बच्चों के खेल का दिन

ये सभी शीर्षक भाजपा-राजग गठबंधन की प्रशंसा में लगाए गए हैं। एक दो उपशीर्षक से पूरी बात नहीं आनी थी और नतीजे के साथ हारने वाले की बात नहीं होगी तो कब होगी? इसलिए आज सबकी बात पूरी होनी चाहिए थी। अखबार ने चार बुलेट प्वाइंट रखे हैं। इनमें एक है – साबित हुआ कि एसआईऔर और वोटचोरी मुद्दा नहीं बना। नौकरी को तरसते लोग लोगों ने रोजगार के लंबं चौड़े वायदों पर यकीन नहीं किया। तेजस्वी अपने ही लेक् में संघर्ष कर रहे हैं।  

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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