संघ के मुखपत्र पान्चजन्य ने “महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद एक बार फिर कथित लिबरल और निष्पक्ष पत्रकारों की कलई खुली” नामक शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. सोनाली मिश्रा नाम के एडमिन द्वारा यह खबर पोस्ट की गई है.

रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि महाराष्ट्र विधानसभा नतीजे आते ही कई कथित निष्पक्ष पत्रकार सदमे में नजर आए जिस सदमे में वे हरियाणा के विधानसभा चुनावों में चले गए थे. यह सदमा इतना भयानक था कि वे झारखंड में इंडी गठबंधन की विजय का भी उल्लेख कम कर पाए.
महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी की हार पर उन पत्रकारों का स्तब्ध होना बहुत ही स्वाभाविक लगता है, जो लगातार ही न जाने कितने समय से अपने तमाम शोज में यह साबित करने से थक नहीं रहे थे कि महाराष्ट्र में भाजपा बहुत बुरी तरह से हार रही है.
पूर्व में पत्रकार रहे दीपक शर्मा के चैनल पर ऐसे ही शीर्षकों के साथ तमाम वीडियोज थे. दीपक के वीडियो के कुछ थंबनेल भी लिखे गए हैं, जिनमें – ‘मुंबई पलटने जा रहा दिल्ली का गेम! महाराष्ट्र में मोदी 20 सीटों पर सिमट रहे!, ‘महाराष्ट्र में मोदी की हवा टाइट लाल किताब से घबराई बीजेपी! और ‘मोदी शाह का बैंड बजाने जा रहे ठाकरे पवार!’..
पुण्य प्रसून बाजपेई के बारे में लिखा है- एक समय में पत्रकार रहे पुण्य प्रसून बाजपेई भी महाराष्ट्र से मोदी को भगा रहे थे.
आगे योगेंद्र यादव, ध्रुव राठी के बारे में लिखा है. कहा गया कि ध्रुव राठी के कांग्रेस समर्थित कई वीडियो वायरल होते रहते हैं. स्वरा भास्कर पर आरोप है कि उनके शौहर चुनाव लड़ रहे थे, के पिछड़ते ही स्वरा भास्कर ने चुनाव आयोग पर उंगली उठानी शुरू कर दी.

ऋचा चड्ढा को भी घेर लिया है, लिखा कि इनके जैसी अभिनेत्रियां भी ईवीएम पर सवाल उठाती देखी गईं. कई कथित निष्पक्ष पत्रकारों ने चुनाव के परिणामों को स्क्रिप्टेड बताया.
लास्ट में लिखा गया है कि पत्रकारिता की आड़ में केवल हिंदू विरोध का एजेंडा चलाकर जनता के मत को प्रभावित करने की छूट किसी को नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह लोकतंत्र का अपमान है, यह जनता का अपमान है.



