महोबा जिले में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी टेस्टिंग के दूसरे ही दिन लीक हो गई। 14 फरवरी को दोपहर करीब तीन बजे टंकी चिटकने से हजारों लीटर पानी बह गया। निर्माण की गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराई गई है।
महोबा जिले में जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2025 में निर्मित पानी की टंकी टेस्टिंग के दौरान ही जवाब दे गई। जानकारी के अनुसार 13 फरवरी को टंकी में पाइपलाइन के माध्यम से पानी भरकर परीक्षण शुरू किया गया था। लेकिन 14 फरवरी को दोपहर लगभग तीन बजे टंकी में दरार आ गई और बड़ी मात्रा में पानी नीचे बहने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हजारों लीटर पानी कुछ ही समय में व्यर्थ हो गया।
यह मामला ब्लॉक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर टेस्टिंग के दौरान ही टंकी चिटक गई तो नियमित आपूर्ति के समय स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
ग्राम प्रधान गायत्री ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत जिलाधिकारी गजल भारद्वाज से की है। शिकायत में निर्माण में लापरवाही और संभावित वित्तीय अनियमितता की जांच की मांग की गई है। प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामले ने जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में जिले में मिशन के तहत कार्यों को लेकर उपलब्धियों के दावे किए जा रहे थे। ऐसे में टेस्टिंग के दूसरे दिन ही टंकी का लीक होना न केवल तकनीकी खामी की ओर इशारा करता है, बल्कि निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
अब देखना यह होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारी तय होती है या मामला महज औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाता है। ग्रामीणों को फिलहाल इस बात का इंतजार है कि उन्हें सुरक्षित और स्थायी पेयजल आपूर्ति कब सुनिश्चित हो पाएगी।
ये दैनिक जागरण की ख़बर है। हेडलाइन पढ़िए।
यूपी में जल जीवन मिशन की बदहाली।
महोबा में 65 लाख खर्च कर बनी टंकी।
पानी भरते ही दरक गई।
ये वही महोबा है जहां बीजेपी विधायक ब्रजभूषण राजपूत ने मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को जल जीवन मिशन की इसी बदहाली के चलते बंधक बनाया था।
-अभिषेक उपाध्याय
यूपी के महोबा में सरकार ने 65 लाख रुपए लगाकर आधुनिक पानी की टंकी बनवाई है.
इसमें जर्मन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. ये टंकी बीच-बीच में झरना बन जाती है.
जो लोग झरना देखने नहीं जा पाते हैं, वो यहां आकर झरने का आनंद ले सकते हैं.