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सियासत

तालिबानी मंत्री की हरकत के विरोध में वूमेन प्रेस कॉर्प्स ने सख्त आपत्ति दर्ज की है!

डॉ पूजा बथारा-

लोगों को लगता है कि टीवी स्क्रीन पर दिखाई पड़ती टीपी रीडर्स ही चंद महिला पत्रकार है। दरअसल ऐसा सोचना ही गलत है।

ये जो पढ़ रही हैं इनके डेस्क से लेकर टीवी स्क्रीन तक, हर बारीकी पहुंचाने में जितनी शिद्दत, तपन, भाग दौड़, जद्दोजहद ज़मीनी महिला पत्रकारों की है, वो संस्थान में बैठे रहने भर तक सीमित नहीं है।

आज एक भी डिबेट, एक भी प्रोग्राम, एक भी सुर्खी इस बाबत नज़र नहीं आई, कि इतने बड़े लोकतंत्र में, संविधान के चौथे स्तंभ का आधा भाग यानी महिलाओं पर कोई तालिबानी नेता बैन लगा कैसे सकता?

उनके स्वतंत्र देश में, उनकी ही स्वतंत्रता पर ताला लग जाएं? इस देश में सर्वोच्च महिला पदस्थ महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी, सहित कई महिला नेत्रियों, महिला अधिकारियों, के होते हुए भी ऐसा वाकिया, घोर निन्दनीय कहें या फ़िर आपका शक्तिविहीन होना कहे?

आप नहीं बोले लेकिन तालिबानी मंत्री की हरकत के विरोध में इंडियन वूमेन प्रेस कॉर्प्स ने एक वक्तव्य जारी करके इस फैसले पर सख्त आपत्ति दर्ज की है।

ये कोई साधारण मसला नहीं है बल्कि, बेहद संवेदनहीन है, यहां पुरुष पत्रकारों ने भी अपनी साथी महिला पत्रकारों के अपमान पर आवाज़ उठाना लाज़मी नहीं समझा, न ही इस बात का विरोध जताया बल्कि, समूचे पहुंच गए इस कांफ्रेंस में ….??

उन संस्थानों को भी इस बाबत ध्यान देना चाहिए कि वर्षों बीत गए, दशक बीत गए वे महिलाएं न केवल पत्रकार हैं बल्कि एक संस्थान रूपी परिवार का हिस्सा है ओर आप मृत संजीवनी की तलाश में जुट गए।

आपकी टीवी स्क्रीन पर तालिबान, तालिबान, तालिबान यहीं शुमार है। शर्म भरा लहज़ा इतिहास के पन्नों में दर्ज़ हो गया।

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