हैदराबाद की एक अदालत ने दो महिला पत्रकारों—रेवती पोगदंडा और थानवी यादव पर लगे संगठित अपराध के आरोप को खारिज कर दिया है। दोनों पत्रकारों को हाल ही में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ कथित अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट का अहम फैसला
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जी. अनुषा ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत इन पत्रकारों पर संगठित अपराध का आरोप नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि इसमें किसी तरह का मौद्रिक लेनदेन नहीं हुआ था। हालांकि, झूठी सूचना बनाने और प्रसारित करने से जुड़े अन्य आरोप अब भी बरकरार हैं।
गिरफ्तारी और आरोपों की पृष्ठभूमि
हैदराबाद पुलिस की साइबर क्राइम डिवीजन ने 11 मार्च को यूट्यूब चैनल पल्स डिजिटल न्यूज नेटवर्क की मैनेजिंग डायरेक्टर रेवती पोगदंडा और रिपोर्टर थानवी यादव को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने यह कार्रवाई कांग्रेस की राज्य सोशल मीडिया यूनिट के प्रमुख की शिकायत पर की थी। आरोप है कि इन पत्रकारों ने ऐसा कंटेंट पोस्ट किया, जिससे नफरत फैल सकती थी और शांति भंग हो सकती थी।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यालय में शूट किया गया था और इसे विधानसभा सत्र से पहले जारी करने के पीछे राजनीतिक मंशा हो सकती है।
सीएम रेवंत रेड्डी की कड़ी प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पत्रकारिता के नाम पर गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था, “अगर कोई सीमा लांघेगा, तो हम भी उसे उसी अंदाज में जवाब देंगे।”
विपक्ष का हमला: ‘प्रेस की आज़ादी पर हमला’
पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने सरकार की आलोचना की। पार्टी के वरिष्ठ नेता केटी रामा राव ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने कहा, “तेलंगाना में कांग्रेस सरकार आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पा रही।”
राव ने आरोप लगाया कि पत्रकार रेवती को सुबह 5 बजे घर पर छापा मारकर ‘अवैध रूप से’ गिरफ्तार किया गया। उन्होंने इसे “आपातकाल जैसी स्थिति” करार दिया और सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
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