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जनता का पैसा बर्बाद : जानें बीमारू राज्यों में नए एयरपोर्ट्स से कथित विकास का सच!

शीतल पी सिंह-

पिछले कुछ वर्षों में, भारत सरकार की ‘उड़ान’ (UDAN – उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत पूर्वी और मध्य भारत के बीमारू राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश (UP), बिहार और मध्य प्रदेश (MP) में कई नए एयरपोर्ट्स का निर्माण और उद्घाटन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्तिगत रूप से या वर्चुअली इनका उद्घाटन किया गया, जिसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास का प्रतीक बताया गया।

सरकार के अनुसार, UDAN योजना के तहत 2024 तक 16 एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन या नींव रखी गई, जिनकी लागत 9,800 करोड़ रुपये से अधिक थी। इनमें से कई बीमारू राज्यों में हैं। नीचे राज्यवार प्रमुख उदाहरण दिए गए हैं:

उत्तर प्रदेश : कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 2021 में PM मोदी द्वारा उद्घाटित, बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट। उद्घाटन के लगभग चार वर्ष बाद भी कोई नियमित फ्लाइट सेवाएं शुरू नहीं हुईं। अधिकारियों का कहना है कि इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल (IFR) सिस्टम की कमी है। स्थानीय रिपोर्ट्स में इसे ‘घोस्ट एयरपोर्ट’ कहा गया है, जहां रनवे पर घास उग आई है और पशु घूमते हैं।

सहारनपुर एयरपोर्ट (2024 उद्घाटन), जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (नींव रखी गई, लेकिन किसान विरोध के कारण विलंब)। UP में कुल 7 नए एयरपोर्ट्स बंद पड़े बताए जाते हैं।

बिहार : पूर्णिया एयरपोर्ट: 2025 में PM मोदी द्वारा उद्घाटित, लेकिन उद्घाटन के दौरान ही स्थानीय किसानों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। गौसी गांव के किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में फ्लाइट सेवाएं शुरू नहीं हुईं, और इसे ‘बेकार का निवेश’ कहा जा रहा है।

अन्य: मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट (1,000 मीटर छोटा रनवे, एयरलाइंस की रुचि न होने से गैर-सक्रिय)। बिहटा (पटना का दूसरा एयरपोर्ट) के लिए अतिरिक्त 191 एकड़ भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित, लेकिन संचालन में देरी। दरभंगा और रक्सौल के विस्तार के लिए 89.75 एकड़ भूमि ली जा रही है। सहरसा और अन्य स्थानों पर नई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया चल रही है।

मध्य प्रदेश का रीवा एयरपोर्ट: 2024 में PM मोदी द्वारा उद्घाटित, विंध्य क्षेत्र के विकास का दावा। हालांकि, फ्लाइट सेवाओं की शुरुआत धीमी है।

अन्य: सतना और दतिया एयरपोर्ट्स (2025 उद्घाटन), बुंदेलखंड क्षेत्र को कनेक्ट करने के लिए। ग्वालियर टर्मिनल भी उद्घाटित, लेकिन क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स की सामान्य समस्या (कम यात्री, यदा कदा फ्लाइट्स) यहां भी दिखाई देती है।

इन प्रोजेक्ट्स के लिए हजारों एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहित की गई, लेकिन कई मामलों में बिना पर्याप्त अध्ययन या मुआवजे के।

UP: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए किसानों को ‘पूर्ण पारदर्शिता’ का दावा किया गया, लेकिन वास्तव में उचित मुआवजा न मिलने पर अदालती चुनौतियां हैं। जेवर में किसानों ने PM के नींव-स्तंभ कार्यक्रम को बाधित किया। कुशीनगर में भी स्थानीय किसान प्रभावित हुए।

बिहार: पूर्णिया में गौसी गांव के किसान उद्घाटन के समय विरोध कर रहे थे। बिहटा और दरभंगा प्रोजेक्ट्स में अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण से सैकड़ों परिवार विस्थापित हो रहे हैं। भूमि उपलब्धता ही विकास में प्रमुख बाधा बताई जाती है।

MP: रीवा और सतना में भूमि अधिग्रहण सुचारू बताया गया, लेकिन विंध्य क्षेत्र के किसानों में असंतोष की रिपोर्ट्स हैं। कुल मिलाकर, इन प्रोजेक्ट्स से कई हज़ार कृषक परिवार प्रभावित हुए हैं, और कई ने समय समय पर विरोध प्रदर्शन किए हैं।

सरकार का दावा है कि भूमि अधिग्रहण किसानों के हित में है, लेकिन आलोचक इसे जबरन बताते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।

कई एयरपोर्ट्स उद्घाटन के 1-4 वर्ष बाद भी बिना फ्लाइट्स के हैं। उदाहरणस्वरूप, कुशीनगर में कोई एयरलाइंस रुचि नहीं दिखा रही। बिहार के मुजफ्फरपुर और पूर्णिया में भी संचालन निलंबित। MP के रीवा में प्रारंभिक सेवाएं हैं, लेकिन अपर्याप्त।

कुशीनगर जैसे स्थलों पर रनवे पर घास और पशु घूमने की तस्वीरें वायरल हुईं, जो विकास की विफलता का प्रतीक हैं। क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स की समस्या राष्ट्रीय स्तर पर है, जहां कम यात्री ट्रैफिक के कारण एयरलाइंस हिचकिचाती हैं।

सरकार UDAN को सफल बताती है, जिसमें 8 वर्षों में कनेक्टिविटी बढ़ी। PM मोदी ने कहा कि ये एयरपोर्ट्स किसानों, पशुपालकों और व्यापारियों के लिए लाभदायक होंगे।

आलोचक इसे ‘ओवर-प्रॉमिस’ कहते हैं, जहां निवेश व्यर्थ हो रहा है। विपक्षी दलों ने इन्हें ‘शोपीस’ बताया, और किसान संगठन भूमि न्याय की मांग कर रहे हैं।

ऐसे एयरपोर्ट्स विकास का सपना तो दिखाते हैं, लेकिन वास्तविकता में वे खाली इमारतें बनकर रह गए हैं, जहां किसानों की जमीनें बर्बाद हो रही हैं।

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