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पर्यावरण प्रेमी उमेश श्रीवास्तव को शासन ने भूगर्भ जल प्रबंधन की जिम्मेदारी दी

सुजीत सिंह प्रिंस-

गाजीपुर जिले के सोशल एक्टिविस्ट और पर्यावरण प्रेमी उमेश श्रीवास्तव को शासन की तरफ से एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. दिनों घटते भूजल के स्तर को लेकर चिंतिंत सरकार ने एक आदेश के जरिए हर जिले में जिला जल प्रबंधन परिषद के गठन निर्देश दिया है. इस परिषद को कई बड़े टास्क सौंपे गए हैं.

शासन से निर्देश को अमलीजामा पहनाते हुए गाजीपुर जिला प्रशासन ने जिला जल प्रबंधन परिषद के गठन का आदेश निर्गत कर दिया है. शासन की मंशा के अनुरूप इस परिषद में भूगर्भ जल प्रबंधन के क्षेत्र में दीर्घकालिक कार्य का अनुभव रखने वाले एक विशेषज्ञ के रूप में उमेश श्रीवास्तव को नामित किया गया है.

जिला जल प्रबंधन परिषद का अध्यक्ष जिलाधिकारी को बनाया गया है. जिलाधिकारी के ठीक बाद नंबर दो पर सदस्य के रूप में भूगर्भ जल प्रबंधन में लंबा अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ के तौर पर उमेश श्रीवास्तव का नाम शामिल किया गया है. ये परिषद कुल तेरह सदस्यों की है जिसमें ज्यादातर अफसरों को शामिल किया गया है. परिषद में सीडीओ, जिला उद्यान अधिकारी, जिला उद्योग अधिकारी, प्रभागीय वनाधिकारी, अधिशाषी अधिकारी, अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता लघु सिंचाई, जिला कृषि अधिकारी, सहायक अभियंता भूगर्भ जल विभाग आदि.

21 अक्टूबर को गठित इस परिषद की अभी पहली बैठक नहीं हुई है. पहली बैठक के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस परिषद को क्या अधिकार दिए गए हैं, साथ ही इस परिषद को क्या विशेष कार्य करने हैं. चिंता की बात ये है कि भूगर्भ जल जैसे संवेदनशील विषय पर बनाई गई कमेटी में नब्बे फीसदी से ज्यादा अफसरों को शामिल करने से कहीं इस कमेटी का हश्र भी दूसरी कागजी कमेटियों की तरह न हो जाए. कायदे से भूगर्भ जल को लेकर बनाई गई कमेटी में जिलाधिकारी व संबंधित विषय से जुड़े विभागों के दो तीन अन्य अधिकारियों के अलावा बाकी सभी सदस्यों को उनकी पर्यावरणीय सक्रियता के आधार पर समाज के बीच से लिया जाना चाहिए ताकि कमेटी में प्राण रहे, कमेटी का कार्य जमीनी स्तर पर दिखे.

फिलहाल तो शासन की मंशा को कागजों पर मूर्त रूप देते हुए जल प्रबंधन परिषद का गठन कर दिया गया है. देखना है कि इस परिषद के पर कितने खुले रखे जाते हैं और कितनी दूर व देर तक उड़ान भरने की इजाजत दी जाती है.

जल जंगल जमीन समेत कई संवेदनशील मसलों पर सदा सक्रिय रहने वाले उमेश श्रीवास्तव को शासन द्वारा भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद में शामिल कर लेने मात्र से फिलहाल यह तो संकेत मिलता है कि उमेश श्रीवास्तव इस परिषद में अपनी मौजूदगी को यूं ही व्यर्थ न जाने देंगे.

लेखक सुजीत सिंह प्रिन्स ग़ाज़ीपुर जिले के सीनियर जर्नलिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट हैं।

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