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रिपोर्ट: सिर्फ 2% लॉ ग्रेजुएट्स को मिलती है टॉप फर्मों में जगह, 98% पिछड़ जाते हैं?

कृष्ण यादव | प्रियंका गवांडे-

नई दिल्ली/मुंबई। भारत में हर साल क़रीब एक लाख छात्र लॉ की डिग्री लेकर स्नातक होते हैं, लेकिन इनमें से केवल 2% को ही देश की टॉप कॉर्पोरेट लॉ फर्मों में जगह मिल पाती है। एक नई रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 98% लॉ ग्रेजुएट्स इन हाई-प्रोफाइल नौकरियों तक नहीं पहुंच पाते, जबकि देश का लीगल सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है।

नौकरी नहीं, जॉब-रेडीनेस की कमी

यह अध्ययन लीगल हायरिंग फर्म Vahura द्वारा किया गया है और इसे लाइव मिंट के लिए पत्रकार कृष्णा यादव और प्रियंका गावंडे ने रिपोर्ट किया है। रिपोर्ट बताती है कि देशभर में करीब 69,000 छात्र हर साल ऑल इंडिया बार एग्जाम पास करते हैं जिससे उन्हें वकालत की पात्रता मिलती है, लेकिन नौकरी के लिहाज से तैयार न होने के कारण अधिकतर छात्र टॉप फर्मों तक नहीं पहुंच पाते।

केवल टॉप कॉलेजों को ही तरजीह

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश की लगभग 25-30 लॉ यूनिवर्सिटीज़ ही ऐसी हैं जिनसे पासआउट छात्र नियमित रूप से प्रमुख लॉ फर्मों में जगह बना पाते हैं। इनमें GNLU, BITS लॉ स्कूल, और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम शामिल हैं। वहीं Khaitan & Co, Cyril Amarchand Mangaldas, JSA, Trilegal जैसी फर्में इन्हीं कॉलेजों के चयनित छात्रों को हायर करती हैं।

बढ़ता बाजार, घटता अवसर

दिलचस्प बात यह है कि देश में कॉर्पोरेट लीगल सर्विसेज़ की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन लॉ ग्रेजुएट्स को इस मांग के अनुरूप प्रशिक्षित नहीं किया जा रहा। इससे यह साफ होता है कि समस्या नौकरियों की कमी नहीं, बल्कि छात्रों के स्किल सेट और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की है।

विशेषज्ञों की राय

Vahura की अकांक्षा अंतिल कहती हैं कि “हमारे पास नौकरियों की भरमार है, लेकिन उपयुक्त प्रतिभा नहीं। कॉलेजों को अपने कोर्सेज़ में अधिक व्यावसायिक और व्यवहारिक ट्रेनिंग शामिल करनी चाहिए।”

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