बसपा काल के भ्रष्टाचार पर सपा राज में चुप्पी

सपा-बसपा नेता भले ही जनता के बीच अपने आप को एक-दूसरे का कट्टर दुश्मन दिखाते रहते हों लेकिन लगता तो यही है कि अंदर खाने दोनों मिले हुए हैं,जिस तरह से बसपा शासनकाल के तमाम भ्रष्ट मंत्रियों और अधिकारियों के प्रति अखिलेश सरकार लचीला रवैया अख्तियार किये हुए है।वह संदेह पैदा करता है।सपा कोे  सत्ता हासिल किये तीन वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन उसने अभी तक पूर्ववर्ती बसपा सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ जांच की इजाजत लोकायुक्त को नहीं दी है। आधा दर्जन से ज्यादा पूर्व मंत्रियों और लगभग दो दर्जन लोकसेवकों के खिलाफ लोकायुक्त की विशेष जांच रिपोर्टों पर कार्रवाई न होने से सीएम अखिलेश पर उंगली उठने लगी हैं।

प्रदेश की जनता को यह लग तो रहा है कि अखिलेश सरकार बसपा काल के भ्रष्टाचार को नजरंदाज कर रही है,परंतु वह कुछ कर नहीं सकती है,मगर राजभवन के साथ ऐसी कोई मजबूरी नहीं है जो वह इस ओर से आंखें मूंद लें।राज्यपाल राम नाईक बसपा राज के भ्रष्टाचार और इसको लेकर अखिलेश सरकार की ढीले रवैये को लेकर सख्त हो गये है।राज्यपाल अखिलेश सरकार पर लोकायुक्त की जांच में दोषी पाए गए मायाराज के मंत्रियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ाये हुए हैंाराज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर शासन स्तर पर ठंडे बस्ते में पड़े 23 मामलों में लोकायुक्त व उप-लोकायुक्त के विशेष प्रतिवेदनों पर अपना व मुख्य सचिव का स्पष्टीकरण जल्द उपलब्ध कराने को कहा है ताकि उसे विधानमंडल के पटल पर रखवाया जा सके और इसके साथ-साथ भ्रष्ट पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त जांच कर सके।

यह कहना गलत नहीं होगा कि जब अखिलेख सरकार सोई हुई है तब राज्यपाल राम नाईक ने प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा की गई जांचों पर हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगकर सही कदम उठाया है।ये जांचें भ्रष्टाचार और कदाचार की गंभीर शिकायतों के बाद शुरू हुई थीं। किसी लोकसेवक पर ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है तो किसी पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति रखने का। किसी पर अवैध खनन कराने का इल्जाम है तो किसी पर नियुक्तियों में हेराफेरी का। सर्वाधिक शिकायतें अवैध खनन गुणवत्ताविहीन निर्माण कराने और आय से अधिक संपत्ति जुटाने की हैं। इसमें भी शिक्षाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें हैं। जिन पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच प्रत्यावेदन दिये गए हैं उनमें चर्चित स्मारक घोटाला भी शामिल है। यह आरोप पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ है। इसी तरह पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ संपूर्ण स्वच्छता अभियान योजना के धन वितरण में गड़बड़ी, पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह पर भ्रष्टाचार और ऐसे ही आरोप दूसरे मंत्रियों विधायकों अधिकारियों पर भी हैं।

सब जानते हैं कि मौजूदा राज्य सरकार के स्पष्ट बहुमत से पदारूढ़ होने के पीछे भ्रष्टाचार का मुद्दा अहम रहा है।समाजवादी पार्टी की चुनाव प्रचार सभाओं में इन घोटालों का पर्दाफाश करने सहित दोषियों को कानून के हवाले करने के वादे किये गए थे।कहा तो यहां तक गया था कि सपा की सरकार बनते ही भ्रष्टाचार में लिप्त मायावती को जेल में डाल दिया जायेगा।यह अफसोसजनक है कि सामजवादी सरकार का वादों के अनुरूप भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे लोकसेवकों पर कार्रवाई का जज्बा आशाजनक नहीं है।इसकी बानगी इसी में देखने को मिलती है कि अब तक सिर्फ एक मामला ही सदन पटल पर रखा जा सका। यदि मौजूदा सरकार भ्रष्टाचार और कदाचार के प्रति वाकई गंभीर है तो उसे त्वरित गति से कदम उठाने होंगे। जांच के बाद यदि इतने दिनों तक मामले लंबित रहेंगे तो जनता के प्रति सही संदेश नहीं जाएगा। जांच प्रकरणों पर लंबित प्रक्रिया को शीघ्र से शीघ्र पूरा कर उसे सदन पटल पर रखा जाना चाहिए और इसी अनुरूप कार्रवाई भी होनी चाहिए। तभी सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रतिबद्धता पूरी होगी।

गौरतलब है कि लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा द्वारा उ.प्र. लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम 1975 की धारा-12(5) के अंतर्गत राज्यपाल को कुल 43 विशेष रिपोर्टें भेजी गई हैं। राज्यपाल ने इन रिपोर्टों को सरकार के पास भेजकर स्पष्टीकरण मांगा था।जनवरी 2012 से 31 मार्च 2015 तक कुल 20 विशेष जांच रिपोर्ट पर ही मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव की ओर से स्पष्टीकरण ज्ञापन भेजा गया है। इनमें से केवल एक विशेष रिपोर्ट ही विधानमंडल के पटल पर रखी गई है। शेष रिपोर्ट अभी शासन स्तर पर दबी हुई हैं।सिर्फ पूर्व मंत्रियों ही नहीं, बल्कि शासन स्तर पर दो दर्जन से ज्यादा सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी है। कई नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, अधिशासी अधिकारियों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों, ग्राम पंचायत अधिकारियों व सचिवों, स्वास्थ्य अधिकारियों, खनन अधिकारियों, समाज कल्याण अधिकारियों के खिलाफ भी लोकायुक्त ने राज्यपाल को विशेष रिपोर्ट भेजी है लेकिन इसे भी सदन के पटल पर रखवाने में हीला हवाली की जा रही है।राज्यपाल राम नाईक ने इस संबंध में 27 अप्रैल 2015 को सीएम अखिलेश यादव को एक पत्र लिखा था। पत्र के जरिए राज्यपाल ने सीएम अखिलेश यादव से लोकायुक्त की स्पेशल रिपोर्ट पर कार्यवाही न किए जाने पर जवाब मांगा था ताकि इनको विधानसभा के पटल पर रखा जा सके।राज्यपाल ने पहली बार पत्र नहीं लिखा था।इस स्पेशल रिपोर्ट को लेकर पूर्व में भी राज्यपाल की ओर सेे 12 दिसंबर 2014 को एक पत्र मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भेजा गया था। इसके बावजूद अभी तक मामले में कोई प्रगति देखने को नहीं मिली थी। जनवरी, 2012 से 31 मार्च, 2015 तक कुल 20 मामलों में राज्य सरकार की ओर से जवाब आया है कि इनमें कार्रवाई की जा चुकी है। राज्य सरकार की ओर से 20 मामलों में कार्रवाई किए जाने की जानकारी राज्यपाल को तो दी गई लेकिन अभी तक सिर्फ एक मामला  ही स्पेशल रिपोर्ट स्पष्टीकरण ज्ञापन के साथ विधानमंडल के सामने पेश हुआ है। 

बसपा शासनकाल में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्या पर संपूर्ण स्वच्छता अभियान योजना के धन वितरण में गड़बड़ी,नसीमुद्दीन सिद्दीकी व बाबू सिंह कुशवाहा, 12 पूर्व विधायक, खनिज अधिकारी, राजकीय निर्माण निगम के इंजीनियर, 35 वित्त एवं लेखा अधिकारी पर स्मारक घोटाला,अवध पाल सिंह यादव, पूर्व मंत्री पर भ्रष्टाचार, रतन लाल अहिरवार, पूर्व मंत्री पर विधायक निधि का दुरुपयोग और जमीन पर कब्जा,अयोध्या प्रसाद पाल, पूर्व मंत्री पर वन विभाग व ग्राम समाज की जमीनों पर कब्जा, रामवीर उपाध्याय, पूर्व मंत्री पर आय से अधिक संपत्ति अर्जन का मामला,राजेश त्रिपाठी, पूर्व मंत्री पर पद का दुरुपयोग,एनपी ंिसह,महाप्रबंधक, जल निगम पर वित्तीय अनियमितता व सरकारी धन का दुरुपयोग, महेश कुमार गुप्ता, आबकारी आयुक्त पर गैर कानूनी तरीके से नियुक्तियां करने का इल्जाम,प्रमुख सचिव व डीजी चिकित्सा शिक्षा पर घूसखोरी व गैरकानूनी तरीके से नियुक्तियां करने का आरोप, डॉ. जीके अनेजा सहायक निदेशक चिकित्सा शिक्षा व डॉ. संगीता अनेजा प्राचार्य सहारनपुर मेडिकल कॉलेज पर नियम विरुद्ध नियुक्ति हासिल करना व पद का दुरुपयोग,रमेश चंद्र, एसडीएम मथुरा पर प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करने वाली कंपनी को लाभ पहुंचाना और स्टांप ड्यूटी की चोरी, डॉ. कर्ण सिंह, पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी पर बिना पूर्व सूचना के महंगी संपत्ति खरीदने का आरोप,सोमनाथ विश्वकर्मा, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी सीतापुर पर छात्रवृत्ति घोटाला व फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप, प्रदीप कुमार मिश्र, मुख्य कर अधीक्षक पर टैक्स आकलन में गड़बड़ी कर कई लोगों को लाभ पहुंचाना व भ्रष्टाचार, कमला प्रसाद पांडेय अधिशासी अधिकारी उतरौला पर वित्तीय अनियमितता कर सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का,आरबी सिंह, खनिज अधिकारी पर अवैध खनन में संलिप्तता, बीएल दास, खनिज अधिकारी सोनभद्र पर अवैध खनन कराने का इल्जाम, सोमनाथ विश्वकर्मा, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, गोंडा पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला,राधेश्याम ओझा, पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व उत्तम कुमार सहायक अध्यापक हरदोई पर स्कूल भवन के निर्माण में खराब गुणवत्ता, कृपा शंकर शुक्ला, डवलपमेंट अफसर पर मिड-डे मील में घोटाला व भवन निर्माण की गुणवत्ता खराब,मंजू सोनकर, जिला समाज कल्याण अधिकारी पर गरीबों की मदद के धन वितरण में हेरफेर,एसपी ंिसह, डीडीओ देवरिया- भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति अर्जन, जिला समाज कल्याण अधिकारी चंदौली पर वृद्धावस्था पेंशन वितरण में भ्रष्टाचार,राघव राम वर्मा, सचिव साधन सहकारी समिति, बाराबंकी पर सरकारी कार्य के साथ जीवन बीमा निगम के लिए भी कार्य करने का आरोप है।

युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को समझना चहिए कि यह काफी नहीं है कि उनकी छवि बेदाग है,बल्कि इसके साथ-साथ इस बात का भी आभास होना चाहिए कि वह हर तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर है।उन्हें समय-बेसमय इस बात का जबाव देना पड़ सकता है कि जब सपा विपक्ष में थी तब उसके नेता मुलामय सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव,राम गोपाल यादव,आजम खाॅ,शिवपाल यादव आदि मायावती पर आरोप लगाते रहते थे कि बसपा सरकारा फोंटी और जेपी ग्रुप चला रहा है,लेकिन आज इसी गु्रप के लोगों को समाजवादी सरकार में भी पूरा महत्व मिल रहा है।बसपा राज के कई दागी अधिकारी अखिलेश सरकार की भी नाक के बाल बने हुए है।चाहें  भ्रष्टाचार पूर्ववर्ती बसपा सरकार के मंत्रियों ने किया हो या फिर अब सपा के कुछ मंत्रियों पर ऐसे आरोप लग रहे हों।मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस बात का ध्यान रखना होगा की जनता के बीच यह मैसेज नहीं जाये कि भ्रष्टाचार के मुद्दे को दबाये रखने के मामले में हम(सपा-बसपा)साथ-साथ हैं।

एक तरफ भ्रष्ट मंत्रियों,नेताओं,अधिकारियों की जांच लोकायुक्त से करा कर दूध का दूध,पानी का पानी होने की उम्मीद लगाई जाती है,वहीं दूसरी तरफ जब लोकायुक्त की ही कार्यशैली पर उंगली उठने लगे तब यह सवाल उठना स्वभाविक हो जाता है कि लोकायुक्त अपने काम(भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच) के प्रति कितना ईमानदार रह पाते होंगे। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने लोकायुक्त एन के मल्होत्रा द्वारा मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के छिपरी गाँव में एक धार्मिक कार्यक्रम में निजी हैसियत में भाग लेने के लिए सरकारी लाव-लश्कर और सरकारी हेलीकाप्टर का इस्तेमाल करने के सम्बन्ध में राज्यपाल राम नाइक को शिकायत भेजी है।उन्होंने कहा है कि 24 अप्रैल 2015  को श्री मल्होत्रा एक धार्मिक गुरु के निजी कार्यक्रम के लिए सरकारी हेलीकाप्टर से झाँसी गए जहां उनका पूरे राजकीय सम्मान से स्वागत किया गया और फिर उसी हेलीकाप्टर का उपयोग कर वे छिपरी गए और वहीँ से लखनऊ लौट गए।इसके पूर्व लोकायुक्त कार्यालय के उपसचिव ए के सिंघल ने डीएम झाँसी को 21 अप्रैल को इस सम्बन्ध में जो पत्र भेजा था उसमे मात्र सम्पर्क मार्ग से छिपरी जाने का ही कार्यक्रम था लेकिन बाद में व्यवस्था हो जाने पर श्री सिंघल झाँसी से छिपरी भी हेलीकाप्टर से ही गए।डॉ ठाकुर ने इसे कदाचार बताते हुए राज्यपाल को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त एक्ट की धारा 6 में शिकायत भेज कर श्री मल्होत्रा द्वारा अपने कार्यकाल में निजी दौरों में सरकारी संसाधनों का प्रयोग किये गए  जांच कराते हुए सही पाए जाने पर श्री मल्होत्रा को पद से हटाने और की मांग की है।नूतन ठाकुर का कहना था कि श्री मल्होत्रा द्वारा इस प्रकार निजी कार्यों के लिए सरकारी व्यवस्था और सरकारी हेलीकाप्टर का प्रयोग प्रथम द्रष्टया कदाचार की श्रेणी में दिखता है।उन्होंने राज्यपाल राम नाईक से कहा है कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम 1975 की धारा 6 (1) में प्रद्दत शक्तियों का प्रयोग करते हुए वह लोकायुक्त  एन के मल्होत्रा के उपरोक्त आरोपित कदाचार की जांच इस धारा के प्रावधानों ने अनुसार कराने और नियुक्त प्राधिकारी को निश्चित समय सीमा में इस धारा की उपधारा (2) के अधीन अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश देें।यदि श्री मल्होत्रा द्वारा व्यक्तिगत कार्यों के लिए सरकारी हेलीकाप्टर,संसाधनों का प्रयोग करने की बात प्रमाणित होती है तो उपरोक्त उपक्रम में व्यय हुई धनराशि भी श्री मल्होत्रा से निजी स्तर पर वसूले जाने के आदेश निर्गत करने करें।वैसे यह पहला मामला नहीं है जब लोकायुक्त मल्होत्रा के ऊपर इस तरह के आरोप लगे हैं।इससे पहले भी उनके ऊपर एक विधायक ने जिसकी लोकायुक्त जांच कर रहे थे आरोप लगाया था कि लोकायुक्त ने उन्हें घर पर बुलाकर पैसे की मांग की थी,लेकिन विधायक की जांच चल रही थी,इस लिये यह माना गया कि विधायक लोकायुक्त की छवि खराब करने के लिये इस तरह के आरोप लगा रहा 

अजय कुमार संपर्क : 9335566111

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