बलिया में सिपाही ने की अवैध वसूली की शिकायत तो एसपी ने किया सस्पेंड, आहत सिपाही ने दिया इस्तीफा (देखें वीडियो)

उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के नरही थाने के पिकेट पर हो रही अवैध वसूली की शिकायत करना एक सिपाही को महंगा पड़ गया. एसपी ने शिकायत करने वाले सिपाही को ही सस्पेंड कर दिया. इससे आहत निलम्बित सिपाही ने पुलिस हेड क्वार्टर इलाहाबाद को अपना त्याग पत्र भेज दिया है. उसने जान-माल की सुरक्षा की गुहार भी की है.

उ.प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए कमेटी गठित

लखनऊ : वर्षों बाद उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए गत दिवस लखनऊ में आपसी सहमति हो जाने के बाद पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। 

फिल्मी पर्दे पर उतरेंगे ‘नेता जी – मुलायम सिंह यादव’, कास्टिंग 15 दिन में

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की जिंदगी अब रुपहले पर्दे पर उतरने वाली है. फिल्म में मुलायम के बचपन, उनके जीवन की जद्दोजहद तथा राजनीति संघर्ष को दिखाया जाएगा और वर्ष 1989 में सपा मुखिया द्वारा पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दृश्य के साथ फिल्म समाप्त हो जायेगी. ख़ास बात यह है कि अपने जीवन पर फिल्म बनाने की इजाजत मुलायम सिंह भी दे चुके हैं, जिसका मुहूर्त उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो रहा है. इसमें मुलायम सिंह के बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शरीक होंगे. फिल्म का नाम है, ‘नेता जी – मुलायम सिंह यादव’। निर्देशन डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर विवेक दीक्षित करेंगे और फ़िल्म का निर्माण संदीप शुक्ला और सर्वजीत सिंह करेंगे.

यूपी सरकार से पीड़ित आईएएस एसपी सिंह लड़ाई में उतरे, ‘जन चौपाल’ का बिगुल बजाया

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस सूर्य प्रताप सिंह लगातार सत्ता की ज्यादतियों से आजिज आकर अब लड़ाई के मैदान में उतर चुके हैं। जन-चौपाल के माध्यम से वह सीधे जनता के बीच पहल कदमी करने चल पड़े हैं। उन्होंने बताया है कि शिकोहाबाद में सपा नगर अध्यक्ष दिलीप यादव और उसके गुर्गे हमारे वालंटियर लोगों को धमका रहे हैं और अपने गुंडों की मदद से हमारी ‘जन-चौपाल’ में व्यवधान करने की तैयारी कर रहे हैं। मैं अपने वालंटियर्स से शांतिपूर्वक काम करने की अपील करता हूँ। वह लिखते हैं कि यह सविनय निवेदन ‘जन-जागरण’ अभियान है।

पत्रकारों से यूपी के सूचना सचिव के खिलाफ सड़कों पर उतरने का आह्वान

लखनऊ : मेरे ईमानदार पत्रकार साथियों, मेरी आप से विनम्रता के साथ अपील है, नवनीत सहगल जैसे उत्तर प्रदेश की लूट के साम्राज्य के सरगना के जब मैंने दृष्टान्त मैग्ज़ीन में लगातार बेनकाब किए तो वह मेरी पत्रिका के टाइटल को कैंसिल कराने की कोशिश कर रहे हैं। प्रेस पर छापे डलवाए गए। अपने डिपार्टमेंट के तीन अधिकारियों की कमेटी बनाकर एक फर्जी रिपोर्ट बनवाई और उस प्रेस को दबाव डालकर उससे मेरी पत्रिका की छपाई बंद करवा दी.

महाभ्रष्टाचारी यादव सिंह को बचाने की यूपी सरकार की कोशिश नाकाम, एससी का झटका, सीबीआई जांच पर रोक से इनकार

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के सस्पेंड इंजीनियर-इन-चीफ यादव सिंह मामले में सीबीआई जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया है। अखिलेश सरकार को इससे तगड़ा झटका लगा है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यादव ने पूरी व्यवस्था को अपना दास बना लिया है। पिछली 16 जुलाई को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस एसएन शुक्ला ने सीबीआई जांच कराने के आदेश किए थे। इसके बाद अखिलेश सरकार ने यादव सिंह पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

यूपी का आबकारी मंत्र : खूब पिलाओ-पैसा कमाओ, डीएम बढ़ाएंगे शराब की बिक्री !

उत्तर प्रदेश के किसी बिजनेसमैन  को दिन दिन दूनी रात चैगनी कमाई करने का धंधा करना हो तो राज्य का आबकारी विभाग उसके लिये नजीर बन सकता है।कमाई के मामले मंे आबकारी महकमें ने बड़े-बड़े उद्योगपतियों को पछाड़ दिया है।आश्चर्य की बात यह है कि शराब के कारण प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के साथ-साथ अन्य कई सामाजिक बुराइयों की चिंता सरकार में बैठे लोगों को रत्ती भर भी नहीं है।इसी लिये प्रति वर्ष हजारो करोड़ की आमदनी करने वाले महकमें के बड़े अधिकारी इतनी मोटी कमाई के बाद भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।वह  प्रदेश के तमाम जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने जिले में शराब की खपत बढ़ाने को कह रहे हैं।शराब से परिवार बिगड़ते हैं तो बिगड़े।अपराध बढ़ते हैं तो बढ़ा करें लेकिन आबकारी विभाग का इन बातों से कुछ लेना-देना नहीं है।ऐसा लगता है कि  यूपी के जिलाधिकारियों के पास कोई काम नहीं है।इसी लिये उनके कंधों पर शराब बेचने की जिम्मेदारी डाली जा रही है।सरकारी खजाना भरने के चक्कर में आबकारी विभाग के अधिकारी महापुरूषों की उस नसीहत को अनदेखा कर रहे हैं जिसमें वह कहा करते थे,‘ जो राष्ट्र नशे का शिकार होता है,विनाश उसकी तरफ मुंह बाय खड़ा रहता है।’ 

यादव सिंह प्रकरण : यूपी में ‘ठाकुर’ और ‘सिंह’ दहाड़ रहे, मीडिया समेत बाकी बने घुग्घू,!

लखनऊ (उ.प्र.) : आईपीएस अमिताभ ठाकुर हों या आईएएस सूर्य प्रताप सिंह, इन दोनो जुझारू वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों ने उत्तर प्रदेश में वो कर दिखाया है, जो उम्मीद मीडिया और राजनीतिक विपक्ष से, कथित ईमानदार संगठनों से, जुझारू लेखकों और पत्रकारों से की जानी चाहिए थी। उनके साथ साथ इन वर्गों के लोग हैं जरूर, लेकिन पीछे-पीछे, चुप-चुप। उनमें न उतना साहस दिख रहा है, न उतनी इच्छा शक्ति कि वे सत्ता के कोप का सामना कर सकें। मीडिया तो अपनी गंदी आदत के अनुसार हर उसके साथ हो ले रहा है, जो उसे विज्ञापन दे दे। ये कैसी नीचता की पराकाष्ठा है। सीबीआई के शिकंजे में फंसे यादव सिंह प्रकरण में इन सबकी भूमिका ने उनके चेहरे से पर्दा हटा दिया है। खुल्लमखुल्ला ललकार रहे, दहाड़ रहे हैं तो सिर्फ ठाकुर और सिंह…

कथाकार काशीनाथ सिंह को उ.प्र. हिंदी संस्थान का ‘भारत भारती सम्मान’

लखनऊ : उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से आज वर्ष 2014 में प्रकाशित पुस्तकों पर सम्मान एवं पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई। इसके अंतर्गत संस्थान ने सुप्रसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह को भारत-भारती सम्मान, उपन्यासकार मृदुला गर्ग को लोहिया साहित्य सम्मान, विनोद कुमार शुक्ल को हिंदी गौरव सम्मान, डॉ.कृष्ण बिहारी मिश्र को महात्मा गांधी साहित्य सम्मान, प्रो.अभिराज राजेंद्र मिश्र को पं.दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान, डॉ.रामकृष्ण राजपूत को अवंती बाई साहित्य सम्मान, कर्नाटक हिंदी प्रचार समिति, बैंगलूर को राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन सम्मान देने की घोषणा की है। 

यूपी सरकार ने जगेंद्र सिंह के परिवार को 30 लाख क्यों दिए!

टाइम्स ऑफ इंडिया में एक खबर है कि शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह के बेटे ने कहा है कि उसे सीबीआई जांच नहीं करानी क्योंकि उसके पिता कन्फयूज्ड थे और इसी मतिभ्रम के कारण उन्होंने आत्मदाह किया था। उन्हें किसी ने जलाया नहीं और मंत्री एकदम निर्दोष है।

अमिताभ ने गृह सचिव से पूछा – एनआरएचएम, खनन के आरोपी बहाल हो सकते हैं तो वह क्यों नहीं !

लखनऊ : नौकरी से निलंबित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश सरकार से उनका निलंबन समाप्त कर उन्हें बहाल किये जाने की मांग की है. प्रमुख सचिव गृह को भेजे पत्र में उन्होंने कहा है कि 13 जुलाई का आरोप पत्र मिलने के बाद उन्होंने 16 जुलाई को अपना जवाब भेज दिया था जिसमे उन्होंने सभी आरोपों को आधारहीन बताया था. 

दलित अधिकारियों, कर्मचारियों की पदावनति के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जायेगा आइपीएफ – दारापुरी

लखनऊ : पूर्व आईजी एवं आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर सभी विभागों में पदोन्नति पाए दलित अधिकारियों और कर्मचारियों को पदावनत करने के फैसले पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि इससे प्रदेश में …

हमीरपुर के बिंवार गांव में जो घटित हुआ, जान लीजिए

12वीं क्लास में पढ़ रही एक बेटी सुबह 7 बजे गावं में ही कोचिंग जा रही थी। उ. प्र. सरकार के दो रिश्तेदारों ने उसे सरेराह रोककर छींटाकसी की। कपड़े खीचे। बाल पकड़ कर खींचा। बेटी को तरह-तरह से बेइज्जत किया। पास में रहने वाली एक मुस्लिम महिला ने अपनी जान जोखिम में डाल कर बेटी को बचाया। वहां से छूट कर वो किसी तरह घर भागी। पिता और चाचा ने उसकी दुर्दशा देखी और उन गुंडों का पता करने निकल पड़े। उनके पीछे माँ भी उलाहना देने चल दी। इधर भीषण अपमान से आहत बेटी को कोई रास्ता न सूझा। उसने अपने ऊपर किरोसिन डाल कर आग लगा ली। पड़ोसी चिल्लाये, दौड़े तो आग बुझाई। माँ-बाप-चाचा उलटे पांव लौटे और बेटी को लेकर थाने भागे। थानेदार ने वाकया और अभियुक्तों का नाम सुनते ही वहां से भगाया तो वो कोई साधन लेकर मौदहा तहसील और फिर हमीरपुर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के गेट पर पहुंचते पहुंचते बेटी ने दम तोड़ दिया। 

यूपी में एक और पत्रकार पुलिस की साजिश का शिकार, पीजीआई में भर्ती

सहारनपुर (उ.प्र.) : एसओ के खिलाफ खबर लिखना पत्रकार को इतना मंहगा पड़ गया कि उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। दुष्कर्म का मुकदमा कायम होने के बावजूद थानाध्यक्ष ने आरोपी को छोड़ दिया था। पीड़ित पत्रकार की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, उल्टे धमकाया कि नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहना। पुलिस के इशारे पर कस्बे के एक नेता ने पत्रकार पर अटैक कर दिया। उनके दो दांत टूट गए, जबड़े में फ्रैक्चर हो गया, आंख घायल हो गई, खून की दो उल्टियां हुईं। वह पीजीआई में भर्ती हैं।  

यादव प्रकरण : सीबीआई जांच से हड़कंप, सरकार और नौकरशाहों में शह-मात का खेल

उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक बार फिर इतिहास दोहराया जा रहा है। खनन माफिया से मोर्चा लेने के लिये अखिलेश सरकार से भिड़ने वाली आईएएस अधिकारी दुर्गा नागपाल की तर्ज पर ही पीसीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और आईएएस अफसर सूर्य प्रताप सिंह ने भी मोर्चा खोल दिया है। दोनों नौकरशाह तो अखिलेश सरकार का कुछ खास नहीं बिगाड़ पाये हैं लेकिन सरकार ने दोनों के लिये ही मुसीबत खड़ी करते हुए दोनों के निलंबन का तानाबाना बुन दिया। सरकार की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि उक्त अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ जाकर सेवा नियमावली की अवहेलना की है, जबकि नौकरशाह कुछ और ही दलील दे रहे हैं। इन अधिकारियों को लगता है कि उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा कर कुछ गलत नहीं किया। 

पत्रकारों के सम्मान की रक्षा का संघर्ष जारी रहेगा : आईजेए

बिल्थरारोड (उ.प्र.) : पत्रकारों के सम्मान और उनकी रक्षा के लिए इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन सदैव संघर्ष करता रहेगा और मीडियाकर्मियों के हित में चलाये गए हर मिशन में हमें पूरी सफलता भी मिलेगी लेकिन यह तभी संभव है, जब क्षेत्र का हर पत्रकार अपना व्यक्तिगत द्वेष छोड़कर एक हो। 

बिल्थरारोड इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन की बैठक में मौजूद राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी व अन्य पत्रकार

यादव सिंह मामले की सीबीआई जांच यूपी सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोलेगी

डॉ. नूतन ठाकुर : मेरे द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर पीआईएल पर नॉएडा के इंजीनियर यादव सिंह मामले की सीबीआई जाँच के आदेश हो गए. अखिलेश सरकार ने सीबीआई जांच रोकने को एड़ी-चोटी लगा लिया और स्वयं महाधिवक्ता कई दिन इसका विरोध करते रहे पर अंत में कोर्ट ने मेरी प्रार्थना स्वीकार की. यह स्थिति अखिलेश सरकार की वास्तविक भष्ट लोगों के प्रति सहानुभूति को दिखाता है. अब ये जांच यूपी सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोलेगी.

लोहिया के सपनों को तोड़ता मुलायम का नव-समाजवाद

अजीब व्यवस्था है जिसमें कोई गायत्री प्रजापति  या कोई राममूर्ति वर्मा अवैध खनन के आरोप के बावजूद हमारा रहनुमा बना रहता है पर इनके गैर-कानूनी हरकतों के खिलाफ आवाज उठाने वाला आई आई टी से पढ़ा भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी अमिताभ ठाकुर बलात्कार का आरोप झेलता इस बात पर निलंबित हो जाता है कि राज्य छोड़ने के लिए राज्य के पुलिस प्रमुख से इजाजत नहीं ली थी. उत्तर प्रदेश के समाजवादी शासन में लगभग हर दूसरे मंत्री पर हत्या से लेकर बलात्कार, भ्रष्टाचार या अवैध खनन के मुकदमें हैं. पर यादव सिंह फलता –फूलता है और दुर्गा शक्ति नागपाल या अमिताभ ठाकुर सजा के हकदार होते हैं.     

मुलायम को अमिताभ की पहली शह

अमिताभ ठाकुर की मुलायम सिंह यादव को पहली शह। अरबों रुपए के घोटाले में फंसे नॉएडा के इंजीनियर यादव सिंह को मुलायम सिंह और उन के पुत्र अखिलेश यादव लगातार बचाते रहे । पर अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर द्वारा दायर पी आई एल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने यादव सिंह मामले की सीबीआई जांच के आदेश जारी कर दिए । 

अमिताभ-मुलायम प्रकरण : वक्त है, संभल जाइए ‘सरकार’ !

सपा सरकार के साथ यह परेशानी शुरू से ही रही है कि जब-जब उसकी सरकार बनी है, तब-तब प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगड़ने व उनकी ही पार्टी के लोगों के निरंकुश हो जाने के आरोप उस पर लगे हैं। साथ ही ‘अपनों’ को ‘उपकृत’ करने के आरोप भी लगते ही रहे हैं। युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लोगों को उम्मीद थी कि वे हालात को कुछ काबू कर पाएंगे किन्तु दुर्भाग्यवश ऐसा हो न सका और उनका स्वागत भी प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर सिलसिलेवार तरीके से हुई हिंसक घटनाओं ने किया, जिसमें जान-माल का ख़ासा नुकसान हुआ। प्रदेश की स्थिति सुधारने को युवा मुख्यमंत्री ने कई अच्छे प्रयास किए किन्तु उनके अपनों ने ही उनके अच्छे कामों पर पलीता लगाने का काम किया और उन्हें मुसीबत में डाल दिया। 

जगेंद्र के घर वालों को धमका रहे आरोपी, पीएम से गुहार, पूरा परिवार यूपी छोड़ने की फिराक में

शाहजहांपुर (उ.प्र.) : जिंदा जलाकर मारे गए पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार को धमकाया जा रहा है। घटना की सीबीआई जांच करने की मांग करते हुए जगेंद्र के बेटे राहुल ने पिछले दोनो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। तभी से परिवार पर दबाव डाला जा हा है कि वे समझौता कर लें अन्यथा उनके साथ अच्छा न होगा। बताया जा रहा है कि जगेंद्र के दोनो बेटे पिछले कई दिनो से लापता हैं। उनका कोई पता नहीं चल रहा है। जगेन्द्र के पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। 

सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर अमिताभ ठाकुर को राज्य की प्रताड़ना से बचाए

सर्वोच्च न्यायालय से गुहार. यूपी के आईजी अमिताभ ठाकुर के मामले में दखल दीजिए. सरकार की प्रताड़ना से बचायें, वरना सभी जनवादी और लोकतंत्र के नायक कालकोठरी में होंगे. अब जरा भी देरी न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बना देगी. यूपी सरकार से भरोसा उठ रहा है. सुप्रीम कोर्ट से आस है. पूरा मामला देश के लोकतंत्र और कानूनी प्रक्रिया का माखौल उड़ाते साफ दिख रहा है. अब तो हर पत्रकार और अफसर को डर लगने लगा है कि जो यूपी सरकार के खिलाफ आवाज उठायेगा, वो फर्जी मुकदमे झेलेगा, जेल जायेगा. ये देश की सबसे बड़ी अदालत, अब जनता इंसाफ के लिए आप की तरफ टकटकी लगाये बैठी है. दखल दीजिए. 

यूपी, बिहार के व्यापम की तस्वीर तो और अधिक भयावह

जो कुछ “व्यापम” नाम से मध्य प्रदेश में हुआ और जो अन्य प्रदेशों में भी दूसरे नामों, दूसरे प्रकारों, दूसरी सीमा तक हो रहा है वह भयावह है । बिहार में एक बार में ही चौदह सौ अध्यापक स्वयं नौकरी छोड़ ग़ायब हो गये । ये सब अवैध ढंग से नौकरी में आये थे । उत्तर प्रदेश में एक चौथाई प्राइमरी स्कूलों में डुप्लीकेट अध्यापक तैनात हैं (नौकरी किसी के नाम है पढ़ाने कोई और आता है)।

पुलिस बर्बरता और अपराधियों को संरक्षण दे रही यूपी सरकार – रिहाई मंच

 लखनऊ : रिहाई मंच ने बाराबंकी में पत्रकार की मां के साथ थाने में बलात्कार करने के प्रयास में विफल होने के बाद एसओ राय साहब यादव और एसआई अखिलेश राय द्वारा जिंदा जला दिए जाने की घटना को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा बलात्कारी व अपराधी पुलिस अधिकारियों को खुला संरक्षण देने का नतीजा बताया है। मंच ने कानपुर में सपा उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन कानपुर ग्रामीण का बोर्ड लगे मकान के अंदर सेक्स रैकेट के खुलासे और उसमें सपा नेता दीपक गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद सपा के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और नेताओं के फार्म हाउसों तथा रिसार्ट पर छापा मारने की मांग की है।

पत्रकार मुझसे यूपी की खराब कानून व्यवस्था की शिकायत करते हैं : राज्यपाल नाइक

अजय कुमार : उत्तर प्रदेश के 28 वें राज्यपाल राम नाईक को कार्यभार ग्रहण किए एक वर्ष हो चुका है। अब तक उनके कई फैसलों पर विवाद भी हो चुका है। वह कहते हैं, पत्रकारों ने भी मुझसे यूपी की बिगड़ी कानून व्यवस्था की शिकायत की है। मैंने भी कई बार मुख्यमंत्री से कानून व्यवस्था पर शिकायत की है। 

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक से बातचीत करते वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार

जरा सुनो तो सर जी, हमे तो टीवी पर आने का चस्का है, मार ही डालोगे क्या !

हम पर कार्रवाई तो जरूर करें सर जी.. हम तैयार हैं, परन्तु ये तो बता दें कि 2011 के पीसीएस अंतिम परिणाम की संलग्न सूची में कुल चयनित 86 एसडीएम में 54 एक ही जाति के कैसे आ गए ? अनिल यादव पर करम और हम पर सितम, रहने दे अब थोडा सा धरम, सर जी ! हम तो सरकार के एक दीगर कारिन्दा है। हमें तो कभी भी कुचल सकते हो। चलो, हमे तो टीवी पर आने का चस्का है, मार ही डालोगे क्या। 

यूपी में 12 आईपीएस और नौ पीपीएस अफसरों का स्थानांतरण

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने 12 आईपीएस और नौ पीपीएस अफसरों के तबादले किए हैं. इनमें डीजी स्तर के छह आईपीएस अफसर और इतने ही एडीजी स्तर के आईपीएस अधिकारी शामिल हैं. ट्रांसफर किए गए वरिष्ठ आईपीएस अफसरों में दो नाम ऐसे भी शामिल हैं जिन्हें अभी दो दिन पहले तक प्रदेश के डीजीपी पद का दावेदार गिना जाता था. बरेली के एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा को हटा दिया गया है लेकिन उनके स्थान पर उन्हीं समीर सौरभ को लाया गया है जिन्हें अभी कुछ समय पहले ही एसपी सिटी आगरा के पद से एक स्पा सेंटर की संचालिका से लाखों रूपये की वसूली के विवादास्पद मामले में हटाया गया था.

फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी की बीएसपी ने की शिकायत, सात पर रिपोर्ट

बहराइच (उ.प्र.) : फेसबुक पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी लिखने पर पुलिस ने विपुल शाह सहित सात युवकों के खिलाफ आईटी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 153 बी , 295 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। 20 जून को आरोपी के फेसबुक एकाउंट पर यह सामग्री पोस्ट की गई, जिसे छह अन्य युवकों ने पसंद किया या उस पर टिप्पणी की। 

पत्रकार जगेन्द्र की मौत की जांच रिपोर्ट जल्द, दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी : अखिलेश

समाजवादी पार्टी का युवा चेहरा अखिलेश यादव दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव पार्टी अखिलेश को आगे करके ही लड़ने का मन बना रही है। प्रदेश में कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। उनके मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार-दबंगई के आरोप लग रहे हैं। इन मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार …

संविधान के मौलिक अधिकारों का वजूद खतरे में, कसौटी पर नाकारा यूपी सरकार

अभी तक तो यूपी सरकार की किरकिरी कराने वाले चाचा जान ने कल्वे जव्वाद पर हमला बंद  भी नहीं किया था कि उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राम मूर्ति वर्मा का पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड में नामजद होना यूपी सरकार के लिए एक चिंता का सवाल बन गया है । सरकार पत्रकार हत्याकांड में नामजद मंत्री पर कत्तई एक्शन न लेने के मूड में है । अगर नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आकड़ों पर गौर किया जाय तो प्रतिवर्ष जितने पत्रकारों के देश भर में उत्पीड़न के मामले  प्रकाश में आते हैं, उसके 72 % मामले अकेले यूपी के होते हैं, जो राज्य के वजीर ए आलम अखिलेश के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। क्या अखिलेश के अंदर शासन व सत्ता को सुचारु रूप से चल़ाने का म़ाद्दा खत्म हो चुका है? क्या युवा शक्ति के आकलन में कोई सेंध है?

उत्तर प्रदेश में सुरक्षित नहीं हैं पत्रकार

ये उत्तर प्रदेश है। यहाँ कानून नहीं, बल्कि राजनेताओं, मंत्रियों, किस्म-किस्म के माफिया, अपरााधियों, भाड़े के हत्यारों का राज  चलता है। आजकल इस राज्य में गुण्डागर्दी अपने चरम पर है और पूरी तरह ‘जंगलराज’ कायम है।

यूपी : मंत्री ने कार्यकर्ताओं से कहा- गद्दारों को बीस-बीस जूते मारो

बस्ती : समाजवादी पार्टी में जनता को गाली देने वाले मंत्री पार्टी आलाकमान के लिये सिरदर्द बनते जा रहे हैं। पंडित सिंह के बाद अब बाहुबली मंत्री ने भाषा की मर्यादा लांघी है। प्रदेश सरकार में पशुधन प्रसार और लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह ने अपने ही क्षेत्र की जनता के लिये अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जिसकी आडियो क्लिप उस वक्त किसी ने बना ली और कुछ ही घंटों में मंत्री जी की यह अभद्र टिप्पणी वाट्सअप पर वायरल हो गई। 

बिना जांच कार्रवाई पर अड़े पत्रकारों को यूपी सरकार का ठेंगा …

जाइये, नहीं करते राज्यमंत्री को बर्खास्त, नहीं भेजते जेल… अब जो करना है, मीडिया कर ले। कुछ ऐसे ही भाव थे प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा व सरकार में नम्बर दो के दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के। सोशल मीडिया पर खिलने वाले पत्रकार के मामले में एनडीटीवी वाले रवीश कुमार ने भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम खुला पत्र लिखा और कहा कि अगर राज्यमंत्री पर कार्रवाई करें तो संबंधित पत्र के साथ मेरा पत्र नत्थी कर दें। 

मजीठिया वेतनमान: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपी श्रम विभाग के भी सख्त निर्देश जारी

गोरखपुर : राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों की तरह अब उत्तर प्रदेश शासन ने भी मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन का सख्त निर्देश जारी कर दिया है।  श्रम आयुक्त शालिनी प्रसाद ने प्रदेश के समस्त श्रम अधिकारियों को आदेशित किया है कि वे अपने अपने क्षेत्र के समाचार पत्र प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर तत्काल इस संबंध में रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। आदेश में कहा गया है कि समाचार पत्र प्रतिष्ठानों के निरीक्षण के दौरान वहां कार्यरत पत्रकारों और गैर पत्रकारों की संख्या, उनके मौजूदा वेतनमान आदि के सम्बन्ध में पूरी जानकारी रिपोर्ट में दें। निरीक्षण के लिए जिलाधिकारियों से स्वीकृति लेना आवश्यक नहीं है। मजीठिया वेतनमान से संबंधित क्षेत्रीय स्तर पर कोई रिपोर्ट दर्ज कराई गई हो तो श्रम आयुक्त ने उसके भी त्वरित निस्तारण का आदेश दिया है। 

यूपी : मीडिया सलीब पर और इंसाफ मुजरिमों की मुट्ठी में !

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि उनके मंत्रियों को फंसाया जा रहा है, साथ ही कहना है कि सरकार पर दबाव बनाये रखने के लिए विरोधी दलों के नेता आये दिन मंत्रियों के त्याग पत्र मांगते रहते हैं। आरोप यह भी है कि समाजवादी पार्टी पर मीडिया हमलावर रहता है। समाजवादी पार्टी के नेताओं की इस दलील का आशय यह है कि उनकी सरकार में सब कुछ ठीक है एवं सभी मंत्री संवैधानिक दायरे में रह कर ही कार्य कर रहे हैं, जिन्हें सिर्फ बदनाम किया जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट होना शेष है कि समाजवादी पार्टी के नेता डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित संविधान के दायरे में रहने की बात करते हैं, या समाजवादी पार्टी का कोई और संविधान है?

यूपी के आला पुलिस अफसरों ने खाकी को चुल्लू भर पानी में डुबोया

उत्तर प्रदेश में खाकी अपनी करतूतों के चलते अक्सर ही शर्मसार होती रहती है, लेकिन जब भ्रष्टाचार के आरोप विभाग के मुखिया पर ही लगे तो हालात कितने खराब हैं, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। खाकी पर अबकी से उसके दो ‘हाकिमों’ (पूर्व पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के कारण दाग लगा है। दोनों डीजीपी ने अपनी तैनाती के दौरान ट्रांसफर-पोस्टिंग को धंधा बना लिया।

उनकी डिग्रियां भी जाली हो सकती हैं मगर उन्हे शर्म क्यों नहीं आती !

क्यों नहीं सभी विधायकों, सांसदों, मंत्रियों व नौकरशाहों की डिग्रियों का सत्यापन करके देखा जाये? हो सकता है, काफी लोगों की डिग्री फर्जी निकले। कुछ तो नेता व मंत्रियों के फर्जी डिग्री के मामले आज कल चर्चा में भी है, यहां तक कि तमाम ऐसे लोग विदेशी डिग्री भी लिए फिरते हैं। लोक सेवा आयोग, इलाहाबाद के अध्यक्ष, अनिल यादव की डिग्री/मार्कशीट का सत्यापन कराया जाये, हो सकता है कि अवश्य फर्जी निकले ! आम आदमी क्या करे, उसे तो जेल में डालना आसान है, इन बड़ों को कौन पकड़े?

यूपी का इतिहास पत्रकारों की लाश पर नहीं लिखने देंगे, हर पत्रकार जगेंद्र बनेगा

उत्तर प्रदेश  में पत्रकारों पर हमले बढ़ रहे हैं। पहले शाहजहाँपुर के जगेंद्र सिंह को जिन्दा जला कर मार दिया गया। फिर कानपुर में पत्रकार दीपक मिश्रा को पांच गोलियां मारी गयीं। साफ़ है कि अगर पहली घटना में अखिलेश सरकार तुरंत कार्यवाही करती तो कानपुर की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती। पहली घटना  में आरोपी मंत्री और पुलिस कर्मियों पर प्रभावी कार्यवाही न होने से माफिया के हौसले और बढ़ गए और उन्होंने एक और पत्रकार को  निशाना बना दिया। अब जगेंद्र की तरह दीपक मिश्रा के हमलावर भी गिरफ्तार नहीं हुए।

यूपी में पत्रकारों की जान को खतरा, जगेन्द्र हत्याकांड पर कैंडल मार्च

मुगलसराय : उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमले के विरोध में नगर के पत्रकारों ने गुरुवार की शाम एक कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च लाल बहादुर शास्त्री पार्क से आरम्भ होकर जीटी रोड होता हुआ सुभाष पार्क पहॅुचा, जहां दिवंगत पत्रकार जगेंद्र सिंह को श्रद्वांजलि अर्पित की गयी। 

जगेंद्र हत्याकांड से यूपी के पत्रकारों में रोष, सीबीआई जांच की मांग

गाजीपुर (उ.प्र.) : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड पर यहां विरोध प्रकट करते हुए पत्रकारों ने कचहरी कैम्प कार्यालय पर शोकसभा की। बैठक में पत्रकारों ने इसे चौथे स्तम्भ पर करारा आघात करार दिया। पत्रकारों ने राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा और कोतवाल श्रीप्रकाश राय के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की मांग के साथ ही घटना की जांच सीबीआई से कराने, परिजनों को सुरक्षा मुहैया कराने, नौकरी के साथ 50 लाख रूपये का मुआवजा एवं जगेंद्र के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दिए जाने की मांग की है। 

जगेंद्र हत्याकांड के विरोध में प्रभारी जिलाधिकारी को ज्ञापन देते गाजीपुर के पत्रकार

यूपी : फिल्म उद्योग की भरपूर संभावनाएं, विलेन पटकथा का टेंशन नहीं

बचपन में कई हिन्दी फिल्मों में मजबूर आम आदमी, सच के पहरेदारों और ईमानदार चरित्रों को जालिम नौकरशाह, हैवान नेता और बिकी हुई पुलिस के हाथों मरते देखा है। तब केवल फिल्मों की कहानी समझकर 3 घंटे बाद भूल जाते थे । लेकिन आज हालात दूसरे हैं। फिल्में देखने की जरूरत ही नहीं है । रोजाना अखबारों के पन्ने, टी.वी, मोबायल की स्क्रीन पर नयी फिल्मों के चित्र और पहले से ज्यादा हिला देने वाली स्टोरी दिखायी देती है। 

खनन माफिया पर कार्रवाई न कर यूपी सरकार ने बढ़ाया राम मूर्ति जैसों का मनोबल

लखनऊ : रिहाई मंच ने आरोप लगाया है कि खनन माफिया और प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री राम मूर्ति सिंह वर्मा, कोतवाल श्रीप्रकाश राय व अन्य द्वारा शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह को जिंदा जलाने की घटना ने प्रदेश में गुंडा और माफिया की सरकार होने को फिर से पुष्ट कर दिया है। मंच ने कहा है कि राम मूर्ति जैसे लोगों की जगह मंत्रालय नहीं बल्कि जेल में है। मंच ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए राम मूर्ति सिंह को तत्काल मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की है।

 

दिवंगत पत्रकार सुरेन्द्र प्रताप यादव के आश्रितों को मंत्री गोप ने दी एक लाख की मदद

बाराबंकी (उ.प्र.) : दिवंगत पत्रकार सुरेन्द्र प्रताप यादव के छप्परनुमा घास-फूस के महल के नीचे पहुंचे प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री अधीर हो उठे। उन्होंने स्व. यादव की पत्नी व बच्चों को सपा की ओर से एक लाख की मदद दी तथा कहा कि पूरा सपा परिवार दुःख की इस घड़ी में उनके साथ है। मुख्यमंत्री राहत कोष से भी परिवार को सहायता दी जायेगी क्योंकि पत्रकारों के सुख दुःख के प्रति प्रदेश की सपा सरकार प्रतिबद्ध है। 

राम मंदिर नहीं, राम राज्य की बात हो

हिन्दुस्तान में मंडल-कमंडल की सियासत ने कई सरकारों की आहूति ली तो कई नेताओं को बुलंदियों पर पहुंचा दिया।मंडल के सहारे वीपी सिंह ने अपनी सियासी जमीन मजूबत की।समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव,राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू यादव ने भी इस मुद्दे से खूब राजनैतिक रोटियां सेंकीं।राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के विवाद में मुलायम ने खुल कर मुसलमानों की पैरोकारी की जिसकी सहारे लम्बे समय तक मुलायम उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज रहे आज भी अगर सपा का जनाधार मजबूत है तो इसके पीछे अयोध्या आंदोलन की जड़े ही हैं। उधर कमंडल(राम मंदिर आंदोलन) के सहारे भाजपा भी लगातार बढ़ती गई।कमंडल के सहारे ही लाल कृष्ण आडवाणी,कल्याण सिंह,उमा भारती,विनय कटियार, जैसे नेता उभर कर सामने आये।1992 में जब तक विवादित ढांचा गिरा नहीं दिया गया तब तक यह नेता लगातार चमकते रहे,लेकिन विवादित ढांचा गिरते ही इन नेताओं की सियासत पर भी ग्रहण लग गया।विवादित ढ़ांचा गिरते ही इन नेताओं के ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के भी बुरे दिन आ गये।

प्रदेश के पत्रकारों की ठेकेदारी कर रही यूनियन के पास कितने पत्रकार ?

जहां शासन कमजोर होता है, वहां पर कोई भी उसकी छाती पर चढ़ बैठता है… पत्रकारों के स्वयंभू नेताओं के मामले में भी कुछ ऐसी ही स्थति है… श्रमजीवी पत्रकार संघ में राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का कार्यकाल आजीवन है…. इस कारण लगभग सभी पत्रकार इस यूनियन का साथ छोड़ चुके हैं…. कांग्रेस के ज़माने में इस यूनियन को लखनऊ के चाइना मार्किट में दफ्तर उपहार में मिल गया था, जिसकी कीमत अब करोड़ों में है…

इस लोकतंत्र में छंछूदर हमारे सिर पर नाचे, पूँजीवादी जूतों से आम आदमी ख़ूनमख़ून

आज एक सप्ताह पुराने अखबार देखे। पहला समाचार- ‘हम फिर 2017 चुनाव जीतकर वापस आयेंगे : अखिलेश यादव’। दूसरा समाचार – ‘मई 10, 2015 – लखनऊ के कृष्णानगर में 18 माह की दूधमुही बच्ची के साथ बलात्कार, खून बहते हुए गंभीर हालत में लोकबन्धु हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, बच्ची के मां कचरा बीनकर सड़क के किनारे ही जीवन बिताती है’….

UP : राज्यमंत्री पंडित सिंह मामले की सीबीसीआईडी जांच कराये जाने की मांग

लखनऊ : आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने राज्य मंत्री विनोद उर्फ़ पंडित सिंह मामले की सीबीसीआईडी जांच कराये जाने की मांग की है.

यूपीः तेज हुई पंचायत चुनावों की रस्साकशी

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सरगर्मी बढ़ने लगी है। 2017 के विधान सभा चुनाव से पूर्व पंचायत चुनाव तमाम उन राजनैतिक दलों के आकाओं लिये अपनी ताकत नापने का पैमाना बन सकता है जो 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों बुरी तरह पिटने के बाद भी 2017 में यूपी की सत्ता हासिल करने का सपना देख रहे हैं।लोकसभा चुनाव में बुरी तरफ ‘पिटे’ सपा-बसपा,कांगे्रस और अन्य छोटी-छोटी राजनैतिक पार्टियों के लिये भी पंचायत चुनाव अमर बूटी साबित हो सकते हैं।पंचायत चुनाव की बिसात गांव की चैपालों पर सजती है और इसकी गूंज घर के भीतर तक सुनाई देती है।

उत्तर प्रदेश में 17 एडिश्नल एसपी बदले, सुभाषचन्द्र बने नए एटीएस एसएसपी

उत्तर प्रदेश सरकार ने पांच जिलों के एसपी समेत 15 आईपीएस के तबादले कर दिए हैं। लखनऊ के एसएसपी की नियुक्ति पर ऊहापोह बना हुआ है। प्रदेश में कुल 17 एडिश्नल एसपी के कार्यक्षेत्र बदल दिए गए। सुभाष चन्द्र दुबे को एटीएस का एसएसपी नियुक्त किया गया है। 

आईपीएस अमिताभ ठाकुर की मुख्यमंत्री से गुहार, मिलने का समय मांगा

आये दिन लगे रहे मुकदमों से आजिज आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने उनकी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ अवैध खनन के परिवाद के बाद लगातार उनको प्रताड़ित करने और फर्जी मुकदमे में फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अपने प्राणों की रक्षा की गुहार लगाई है.

सोशल मीडिया से निपटने के लिए यूपी सरकार मेरठ और लखनऊ में स्थापित करेगी दो लैबोरेट्रीज

लखनऊ : अखिलेश यादव सरकार सोशल मीडिया पर लखनऊ और मेरठ में दो लैबोरेट्रीज स्थापित करने जा रही है। पुलिस इनके माध्यम से सोशल मीडिया कंटेंट पर नजर रखेगी। 

यूपी : अगले 48 घंटों में 48 से ज़्यादा IAS-IPS अफसरों के तबादले की संभावना

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अमले में एक बार फिर बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी चल रही है। सूबे के समाजवादी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अगले 48 घंटों में 48 से ज़्यादा IAS और IPS अफसरों का तबादला करने जा रहे हैं। 

अब बताइए, कितने जूते मारेंगे आप समाज में जातिवाद का जहर घोलने वालो को !

मीडिया अब दलाली का दूसरा नाम है। यहाँ फर्जी खबरें भी बनायी जा रही हैं, दलितों और पिछड़ों पर झूठी एफआईआर करवाने की तो फर्जी न्यूज़ छप रही है, मेधा और मेरिट को लेकर!

यूपी में सपा को बाहर से कम, पार्टी के अंदर से ज्यादा चुनौती

उत्तर प्रदेश का सियासी पारा धीरे-धीरे चढ़ता जा रहा है। 2017 फतह करने के लिये तमाम सियासतदां एयरकंडिशन ड्राइंग रूम से निकल कर सड़क पर पसीना बहा रहे हैं। डिजिटल इंडिया और नये दौर की राजनीति में भले ही धरने-प्रदर्शनों का रंग फीका पड़ चुका हो, लेकिन आज भी इसकी बानगी दिख जाती है। पुराने, जिन्हें घाघ नेता की संज्ञा दी जाती है, आज भी अपनी सियासत चमकाने के लिये धरना-प्रदर्शन को अपना अचूक हथियार मानते हैं। 

बसपा काल के भ्रष्टाचार पर सपा राज में चुप्पी

सपा-बसपा नेता भले ही जनता के बीच अपने आप को एक-दूसरे का कट्टर दुश्मन दिखाते रहते हों लेकिन लगता तो यही है कि अंदर खाने दोनों मिले हुए हैं,जिस तरह से बसपा शासनकाल के तमाम भ्रष्ट मंत्रियों और अधिकारियों के प्रति अखिलेश सरकार लचीला रवैया अख्तियार किये हुए है।वह संदेह पैदा करता है।सपा कोे  सत्ता हासिल किये तीन वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन उसने अभी तक पूर्ववर्ती बसपा सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ जांच की इजाजत लोकायुक्त को नहीं दी है। आधा दर्जन से ज्यादा पूर्व मंत्रियों और लगभग दो दर्जन लोकसेवकों के खिलाफ लोकायुक्त की विशेष जांच रिपोर्टों पर कार्रवाई न होने से सीएम अखिलेश पर उंगली उठने लगी हैं।

IAS, IPS ट्रान्सफर पर PIL के लिए IPS अमिताभ ठाकुर ने शासन से अनुमति मांगी

लखनऊ : आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश में आईएएस, आईपीएस, पीसीएस और पीपीएस अधिकारियों और थानाध्यक्षों के अल्प अवधि के कार्यकाल में ही अत्यंत तीव्र गति से स्थानांतरण के सम्बन्ध में जनहित याचिका दायर किये जाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी है.

न्यूज नेशन यूपी के स्ट्रिंगर भुखमरी के कगार पर, तीन माह से सैलरी नहीं

लखनऊ : इस समय न्यूज नेशन यूपी के स्ट्रिंगरों की हालत खराब है। समय पर चैनल प्रबंधन मीडिया कर्मियों को सैलरी नहीं दे रहा है। ऊपर से विज्ञापन के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है। जो विज्ञापन के आर्डर ले आने से मना कर रहा है, उसको नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। इस हालात से पूरे यूपी में न्यूज नेशन के स्ट्रिंगर परेशान हैं।

उस रात सत्ता की एक बड़ी हवेली में मेरे खिलाफ रचा गया षडयंत्र !

मैं पिछले दो दिन से ओला वृष्टि प्रभावित फैजाबाद व अम्बेडकरनगर में आत्महत्या करने वाले अथवा सदमे से मरे किसानों के परिवारों से मिलने व जनपद में हुए नुकसान का जायजा लेने आया हुआ हूं। इन जनपदों का मैं ‘नोडल अधिकारी’ भी हूँ। किसान के साथ प्रदेश में जो छलावा हो रहा है, इसके बारे में अलग से फोटो के साथ लिखूंगा। जब मैं ऐसी गर्मी में गाँव-गाँव व खेत-खेत घूम रहा था, तो मेरे पास एक फोन आया कि आप उधर किसानों के दुःख दर्द बाँट रहे हैं, इधर लखनऊ में कल रात सत्ता की एक बड़ी हवेली में आपके खिलाफ षडयंत्र रचा गया है। उन्होंने बताया कि “आप के खिलाफ भ्रष्ट इंजीनियर विभाग के कुछ अधिकारियों को एक बड़ी हवेली में बुलाकर आपको बदनाम करने के लिए साजिश रची गयी। उनमें से कई भ्रष्ट इंजीनियर, जो आपकी सख्ती से कुपित थे व ‘आका’ के बुरे दिनों के साथी भी रहे हैं, ने आपके खिलाफ ‘आका’ की उपस्थिति व निर्देश पर एक शिकायती रिपोर्ट बनाई ताकि आप की छवि को ख़राब करते हुए प्रताड़ित किया सके, सबक सिखाया जा सके। उन्ही इंजीनियरों ने आपका ट्रान्सफर भी कराया गया था। उन्होंने ये भी बताया कि इन विभागों के राजनैतिक मुखिया भी बहुत ख़राब छवि के हैं, पता नहीं क्यों ‘आका’ उन्हें इतना मुंह लगाते हैं?”

यूपी के लोकायुक्त ने किया सरकारी हेलीकाप्टर से एमपी का निजी दौरा, राज्यपाल से शिकायत

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने आज लोकायुक्त एन के मल्होत्रा द्वारा मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के छिपरी गाँव में एक धार्मिक कार्यक्रम में निजी हैसियत से भाग लेने के लिए सरकारी लाव-लश्कर और हेलीकाप्टर का इस्तेमाल करने के सम्बन्ध में राज्यपाल राम नाइक से शिकायत की है.

यूपी में ‘टाइम इन्फार्मेशन सर्विसेज’ कंपनी का महाठगी अभियान

 

लखनऊ : श्रीनगर, आलमबाग, लखनऊ निवासी सुशील अवस्थी का कहना है कि यूपी की टाइम इन्फार्मेशन सर्विसेज प्राइवेट लि. कंपनी अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए आम जनता को ठग रही है। इस कंपनी का पता है – बख़्शूपुर, जमनिया रोड, ग़ाज़ीपुर (यूपी)। इस कंपनी का CIN नंबर है- U74120UP2011PTC045400. यह कंपनी भारत सरकार की स्वावलम्बन पेंशन योजना का अपने व्यावसायिक लाभ के लिए बेज़ा इस्तेमाल कर रही है। सुशील अवस्थी बताते हैं कि वह तमाम उच्चाधिकारियों, कंपनी से संबंधित विभाग और सरकार से अपनी फरियाद सुनाने के साथ पुलिस में कंपनी की करतूतों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा चुके हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जानबूझकर मीडिया भी इसके कारनामों पर रहस्यमय ढंग से खामोशी साध बैठा है। 

जोगिया जनूबी गांव में लोकरंग के माध्यम से लोक जीवन को संवारने का प्रयास

कुशीनगर (उ.प्र.) : जिले के जोगिया जनूबी पट्टी गांव में हर वर्ष की तरह इस बार भी दो दिवसीय लोकरंग कार्यक्रम 12-13 अप्रैल को आयोजित हुआ। यह आयोजन का आठवां वर्ष रहा। इस बार का आयोजन असहयोग आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाले कुशीनगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों हनुमान प्रसाद कुशवाहा, ब्रह्मदेव शर्मा, मुंशी तप्तीलाल और मोती भगत को समर्पित किया गया। इन चारों सेनानियों की खोज, सुभाष चन्द्र कुशवाहा ने 8 मई, 1921 के स्वदेश अखबार में प्रकाशित समाचार के आधार पर की थी। इस बार के आयोजन की खास बात यह रही कि भोजपुरी क्षेत्र की लोक कलाओं के साथ-साथ झारखंड, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल के लोक कलाओं से भी लोगों को रूबरू होने का मौका मिला।  

गुस्से में किसान : 20 को देशव्यापी विरोध, पांच मई को संसद पर प्रदर्शन, 14 मई को रेल-सड़क रोकेंगे, जेलें भरेंगे

उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड इम्तेयाज बेग ने कहा कि पूरे देश में ख़ास तौर से उत्तरी भारत में असामायिक वर्षा, ओले, आंधी और बाढ़ के चलते हजारो किसानों के मरने के साथ ही लगभग 20 से 30 हजार करोड़ की रवि की फसलो की बर्बादी के बाद भी केंद्र व प्रदेश सरकारों के अगुवा कुम्भकर्णी नीद में पड़े हैं। किसानो की कोई चिंता नहीं। आईएएस लॉबी किसानों की मौत को स्वाभाविक बता रही है। बीमा कम्पनियां और बैंक किसानों से पैसा लेकर फसल बीमा नहीं करते हैं। केंद्र और प्रदेश सरकारें किसानो की बर्बादी पर राहत के नाम पर मुआवजा पहले नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर, अब बढ़ाकर साढ़े तेरह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया है। यह किसानों के साथ सरकारों का क्रूर मजाक है, क्योकि एक बिस्से की पूरी फसल बर्बाद होने पर 142 रूपये या पचास फीसदी बर्बाद होने पर 71 रूपये का चेक मिल रहा है, क्या यह किसानों के साथ खिलवाड़ नहीं है, सरकार बताये ?

एमपी में पत्रकार की हत्या, यूपी में टीवी रिपोर्टर के घर पर कातिलाना हमला

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में इन दिनों पत्रकारों पर कातिलाना हमले हो रहे हैं। सिंगरौली (म.प्र.) में एक साप्ताहिक अखबार के संपादक की हथौड़े से हत्या कर दी गई। गोरखपुर (उ.प्र.) में एक टीवी न्यूज चैनल के पत्रकार के घर पर धावा बोलकर कुछ लोगों ने परिजनों से आधा दर्जन से अधिक लोगों को लहूलुहान कर डाला।

किसानों और महिलाओं की चीख को दबाना चाहता है यूपी का शासन-प्रशासन

उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का नारा देने वाली समाजवादी पार्टी की सरकार में ठीक विपरीत परिणाम आता नजर आ रहा है। अपराध और भ्रष्टाचार के बिन्दुओं पर तुलना की जाये, तो आज उत्तर प्रदेश बिहार से ज्यादा बदनाम नजर आ रहा है। कानून व्यवस्था को लेकर हालात इतने दयनीय हो चले हैं कि आम आदमी को कोई सांत्वना तक देने वाला नजर नहीं आ रहा, लेकिन खास लोगों के अहंकार को ठेस न पहुंचे, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 

होशियार ! मजीठिया मामले पर मीडिया हाउसों और लेबर डिपॉर्टमेंट के बीच दलाल हरकतें तेज, चार लाख की घूसखोरी !!

लखनऊ : ताजा सूचना है कि यहां से प्रकाशित एक अखबार के अधिकारी ने लेबर डिपार्टमेंट के एक दलाल को चार लाख रुपए दिए हैं। इसी दलाल ने कुछ दिन पहले मजीठिया मामले से संबंधित आरटीआई के जवाब में गोल-मटोल कर फाइल को लौटा दिया था।  

सिर्फ विज्ञापन में ‘बन रहा है आज, संवर रहा है कल’

मुझे यह स्लोगन बड़ा अच्छा लगता है, जिसने भी बनाया हो उसे बधाई (इसको इजाद करने में पैसा भी जरूर लगा होगा)! आज कुछ चयनित अखबारों में छपा एक विज्ञापन देखा | शायद जो अखबार ‘अन्नदाता की मुसीबत’ के बारे मैं कुछ ज्यादा ही सच्चाई से अड़े हैं , वे इसे न पाएं हो ; ये विज्ञापन बड़ा सुखद सा दिखा बाहर से, परन्तु अन्दर पढ़ कर किंचित निराशा हुई।

यूपी में पुस्तक माफिया का बोलबाला, लुगदी साहित्य की ऊंचे दामों पर भरपूर खरीद

उत्तर प्रदेश की लॉयब्रेरियों के लिए सरकारी पुस्तकों की खरीद में पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पुस्तकालय प्रकोष्ठ के अधिकारियों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिव स्तर के एक वरिष्ठ अफसर की साठ-गांठ से भारी गड़बड़ी और मनमानी किए जाने की सूचना है। बताया गया है कि मुंह पर भरपूर कमीशन मार कर अपनी किताबें चयनित करा लेने वाले भ्रष्ट प्रकाशकों, उर्दू-हिंदी साहित्य अकादमियों तक पहुंच रखने वालो और राजनेताओं-अफसरों की चापलूसी करने वाले लेखकों की कानाफूसी से इस बार लुगदी साहित्य की ऊंचे दामों पर भरपूर खरीदारी हुई है। इससे सुपठनीय पुस्तकों के लेखकों-साहित्यकारों में भीतर ही भीतर प्रदेश सरकार की पुस्तक खरीद नीति पर भारी रोष है। कुछ पिछलग्गू किस्म के साहित्यकारों, विरुदावली गाने वाले रचनाकारों को ही खरीद में तरजीह दी गई है।

वरिष्ठ आईएएस का अखिलेश सरकार से सवाल – अभी और कितने किसानों की मौत का इंतजार

यूपी में एक वरिष्ठ आईएएस की बेबाक बयानी ने अखिलेश सरकार की दोरंगी नीतियों की रही सही पोल-पट्टी भी खोल दी है। आईएएस सूर्यप्रताप सिंह अपने फेसबुक वॉल पर लगातार सरकार को आगाह कर रहे हैं कि वह किस तरह मदहोश है और प्राकृतिक आपदा के सताए प्रदेश के किसान बेमौत मर रहे हैं, खुदकुशी और आत्मदाह कर रहे हैं। वह लिखते हैं – ‘किसान कहां जायें? अन्नदाता मुसीबत में तथा लखनऊ में ‘ग्रामीण क्रिकेट लीग’ (ICGL) का ग्लैमर।’

 

यूपी में आरटीआई के तहत मांगी जानकारी तो देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आप उत्तर प्रदेश में आरटीआई ऐक्ट (सूचना के अधिकार) के तहत जानकारी हासिल करने की सोच रहे हैं तो सावधानी के साथ कदम बढ़ाएं। अगर राज्य सूचना आयोग की चली तो वह आपको दंडित कर सकता है और आपको उस सरकारी विभाग को मुआवजा देने के लिए कह सकता है, जिससे आपने सूचना मांगी है। इससे भी परेशान करने वाली बात यह है कि आपको किस आधार पर मुआवजा देने को कहा जाएगा, यह भी पूरी तरह से सूचना आयोग की मर्जी पर निर्भर करेगा।

किसानों की तबाही पर यूपी सरकार संजीदा नहीं : रिहाई मंच

लखनऊ : रिहाई मंच ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसलों की बर्बादी से आहत किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या, दिल का दौरा पड़ने व सदमे से हो रही मौतों और मुआवजे के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा है। 11 सूत्रीय सवालों और 14 सूत्रीय मांगों वाले इस पत्र के माध्यम से प्रदेश सरकार की फसलों की बर्बादी की मुआवजा नीति और किसानों की आत्महत्या के बाद प्रदेश सरकार के गैरजिम्मेदाराना कार्यशैली पर सवाल उठाया गया है।

इलाहाबाद हत्याकांड के बाद पूरे यूपी में वकीलों का गुस्सा फूटा, हड़ताल के दौरान तोड़फोड़

इलाहाबाद : यूपी बार कौंसिल द्वारा गुरुवार को प्रदेश भर के वकीलों से हड़ताल पर रहने का आह्वान का मिलाजुला असर रहा। गुरुवार को वकीलों ने बहिष्कार कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। केंद्र तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ इलाहाबाद में वकील की हत्या के विरोध में आज प्रदेश भर में वकीलों की हड़ताल से लोग हलकान देखे गए। 

इस ‘समाजवादी’ मंत्री अवधेश प्रसाद का सामंतवाद तो देखिए!

सेवा में, सम्पादक महोदय, सादर प्रणाम, फैजाबाद से एक खबर है। खबर इस तस्वीर पर आधारित है। तस्वीर में दिख रहे हैं उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद।  इन्हें उनका सरकारी अर्दली मकर संक्रांति के दिन बुधवार को खिचड़ी भोज से निकलने के बाद जूते पहना रहा है।

2017 का विधानसभा चुनाव जातिवादी राजनीति के सहारे नहीं जीता जा सकेगा, अखिलेश यादव को अहसास हो गया

अजय कुमार, लखनऊ

एक वर्ष और बीत गया। समाजवादी सरकार ने करीब पौने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। 2014 सपा को काफी गहरे जख्म दे गया। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने धरती पुत्र मुलायम को हिला कर रख दिया। पार्टी पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। अगर जल्द अखिलेश सरकार ने अपना खोया हुआ विश्वास हासिल नहीं किया तो 2017 की लड़ाई उसके लिये मुश्किल हो सकती है। अखिलेश के पास समय काफी कम है। भले ही लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के पश्चात समाजवादी सरकार ने अपनी नीति बदली ली है, लेकिन संगठन वाले उन्हें अभी भी पूरी आजादी के साथ काम नहीं करने दे रहे हैं। सीएम अखिलेश यादव अब मोदी की तरह विकास की बात करने लगे हैं लेकिन पार्टी में यह बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। मुलायम अभी भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं। निश्चित ही 2015 खत्म होते ही तमाम दलों के नेता चुनावी मोड में आ जायेंगे। भाजपा तो वैसे ही 2017 के विधान सभा चुनावों को लेकर काफी अधीर है, बसपा और कांग्रेस भी उम्मीद है कि समय के साफ रफ्तार पकड़ लेगी। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि कांग्रेस ही नहीं सपा-बसपा भी 2014 में अर्श से फर्श पर आ गये।

पुण्य प्रसून बाजपेयी, सुप्रिय प्रसाद, राहुल कंवल और दीपक शर्मा कल क्यों जा रहे हैं लखनऊ?

मोदी अगर राष्ट्रीय मीडिया को पटाने-ललचाने में लगे हैं तो उधर यूपी में अखिलेश यादव से लेकर आजम खान जैसे लोग नेशनल व रीजनल को पटाने-धमकाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़े हुए हैं. आपको याद होगा मुजफ्फरनगर दंगों के बाद आजतक पर चला एक स्टिंग आपरेशन. दीपक शर्मा और उनकी टीम ने मुजफ्फरनगर के कई अफसरों का स्टिंग किया जिससे पता चला कि इस दंगे को बढ़ाने-भभकाने में यूपी के एक कद्दावर मंत्री का रोल रहा, इसी कारण तुरंत कार्रवाई करने से पुलिस को रोका गया.

यूपी में जंगलराज, यूपी में ‘चोरों’ की सरकार : अब आईपीएस भी सुरक्षित नहीं, अमिताभ ठाकुर के घर भीषण चोरी

उत्तर प्रदेश में जंगलराज का आलम ये हो गया है कि अब जनता तो जनता, अफसर तक सुरक्षित नहीं हैं. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर आज सुबह जब गाजियाबाद से लखनऊ लौटे तो पता चला कि उनके घर में भीषण चोरी हो चुकी है. गोमती नगर स्थित उनके घर में चोरी की ये घटना कोई सामान्य नहीं है. जहां पर अमिताभ ठाकुर का घर है, वहां ढेर सारे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का घर है. मतलब वीआईपी इलाका है. इस इलाके में घुसने और चोरी करने की हिम्मत कोई सामान्य चोर कर ही नहीं सकता.

IPS officer Amitabh Thakur

यूपी में जंगलराज : मंत्री के रिश्तेदार की खबर छापने पर पत्रकार की पिटाई, एफआईआर लिखने से इंकार

तहसील सिकन्दरपुर, बलिया के पत्रकार संजीव कुमार सिंह को कबीना मंत्री रामगोविन्द चैधरी के चचेरे भाई रामबचन यादव और उसके ड्राईबर धर्मेन्द्र के बारे में खबर छापने की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. संजीव ने दुर्गा पुजा के दिन धर्मेन्द्र द्वारा सिकंदरपुर कस्बे में कथित छेड़छाड़ करने पर लोगों द्वारा की गयी पिटाई के बाद पुलिस द्वारा एकतरफा कार्यवाही किये जाने के सम्बन्ध में खबर लिखी थी. इस पर 08 अक्टूबर को रात करीब 07.30 बजे धर्मेन्द्र, छोटक सिंह तथा अन्य लोगों ने समाचार छपने के लिए संजीव को भला-बुरा कहा और लात-घूंसे से मारा.

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने यूपी पुलिस के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे नफीस खान को सलाम कहा

Amitabh Thakur : नफीस खान को सलाम!.. यह पत्र मैंने अमेठी निवासी नफीस खान की सूचना के आधार पर आईजी ज़ोन लखनऊ को लिखा है. आपकी दृष्टि चाहूँगा, यह एक गंभीर प्रकरण है. इस देश को हज़ारों नफीस खान की जरूरत है…

यूपी में सपा राज उर्फ जंगल राज : जान बचाना मुश्किल हो रहा इस तालाब के सिपाही को.. पढ़िए पूरी दास्तान…

उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के राज में एक सूचनाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता अनूप कौशिक के साथ हो रहे अत्याचार की इस लड़ाई को देखें. यह अधिवक्ता सिर्फ इसलिए आज अपनी जिंदगी को बचाए हर सरकारी दफ्तर, आला पुलिस अधिकारियों और राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास की खाक छान रहा है ताकि जनपद अलीगढ़ का एक तालाब बचा सके. इसके इलाके के एक दबंग नेता ने 300 करोड़ की तालाब की भूमि बेचने का कारनामा सरकारी तंत्र की पनाह में किया है. बदले में इस सूचनाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता अनूप कौशिक को मिली है एक गोली, जानलेवा हमले और कई फर्जी मुकदमे.

एडवोकेट अनूप कौशिक

मुख्यमंत्री अखिलेश उवाच- नकल करके सिर्फ बन सकते हैं पत्रकार

बीते हफ्ते शुक्रवार के दिन यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्रकारों पर की गई एक टिप्पणी यूपी के मीडियावालों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. कार्यक्रम अमर उजाला की तरफ से आयोजित था. इसमें प्रदेश के मेधावी छात्रों को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में लैपटॉप दिया. अमर उजाला के इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पत्रकारों को एक टिप्पणी करके भरपूर बेइज्जत किया. लैपटॉप वितरण के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंच से बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों, पढ़ने-लिखने में मन लगाना क्योंकि नकल करके आईएएस तो नहीं बन सकते, हां पत्रकार बन सकते हो.

विज्ञापन देकर यूपी सरकार की किरकिरी रोकने में जुटे मुलायम और अखिलेश

Prashant Mishra : पिछले कुछ अंकों में ‘इण्डिया टुडे’ पत्रिका ने उ.प्र. सरकार की अच्छी खिंचाई कर रखी थी. पिछले महीने “यूपी लोक सेवा आयोग में यादव राज” करके एक अच्छी और जरूरी रिपोर्ट (पीयूष बवेले की) लगाई जिसपर “आज तक” में पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी एक स्टोरी की.

यूपी में जितने सत्ता केंद्र उतने ही अफसरों के गुट, जनता बेचारी रोये फूट-फूट

: यूपी में नाजुक होते नेताओं-नौकरशाहों के रिश्ते से विकास कार्यों और कानून व्यवस्था पर बुरा प्रभाव :  उत्तर प्रदेश की नौकरशाहों और राजनेताओं के रिश्ते भी निराले हैं। वर्षों से दोनों के बीच आंख-मिचौली का खेल चल रहा है। कब कौन कहां किसको पटकनी दे दे, कोई नहीं जानता। वैसे तो यह टकराव कोई खास मायने नहीं रखता है, लेकिन जब इसका असर समाज के किसी हिस्से पर पड़े तो इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। सच्चाई तो यही है कि अब देश, समाज और संविधान के तहत काम करने की कसम खाने वाले नौकरशाह और राजनेता जनता के हितों के बारे में रत्ती भर भी नहीं सोचते हैं। अगर ऐसा न होता तो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा सरकार की तरफ से छह वर्षों में अपने अफसरों को 13 पत्र लिखे जाने के बाद भी हालत जस के तस नहीं रहते।

भाजपा के मीडिया सेल में लागू है ‘बैनर-चैनल वर्णक्रम’ आधारित ‘आरक्षण’!

वृंदावन : बड़ों व ताकतवर का सम्‍मान करना और छोटों व गरीबों को ठेंगे पर रखना अमूमन हर व्‍यवस्‍था की परंपरा होती है. यह उसी तरह का शाश्‍वत सत्‍य है, जैसा कि सूरज के पूरब से निकलने का है. कहावत है कि अगर सांप के दंश में जहर का डर नहीं होता है तो लोग उसे भी पूंछ से पकड़कर नचाकर फेंक देते हैं. भाजपा में भी पत्रकारों को लेकर यही व्‍यवस्‍था लागू है. पहली व्‍यवस्‍था तो यह है कि आप बड़े बैनर और बड़ी एजेंसी के पत्रकार हैं तो उनको पूरी इज्‍जत दी जाती है. छोटे बैनर-एजेंसी के पत्रकारों पर ‘एहसान’ किया जाता है.

भाजपा की वृंदावन कार्यसमिति में पत्रकारों को परोसे गए कीड़े

वृंदावन में आयोजित हुई प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति लखनऊ के पत्रकारों के लिए हाहाकारी साबित हुई. पत्रकारों को खाने में कीड़े परोसे गए तो पीने के पानी तक के लिए उन्‍हें यहां से वहां चक्‍कर लगाना पड़ा. रही सही कसर बिजली ने पूरी कर दी. मीडिया प्रभारी की नेतागिरी करने का शौक इतना भारी पड़ा …

भाजपाइयों ने बनारस में मीडियाकर्मियों से की मारपीट

क्‍या भाजपा कार्यकर्ता भी समाजवादी पार्टी की राह पर चल पड़े हैं? क्‍या उन्‍हें भी सत्‍ता का नशा हो गया है? क्‍या वे भी अब गुंडई करेंगे, पत्रकारों से मारपीट करेंगे? ये सारे सवाल तब खड़े हुए जब बुधवार को बनारस में भाजपा के कार्यकर्ता कवरेज कर रहे पत्रकारों तथा छायाकारों से भिड़ गए, उनसे मारपीट किया.

यूपी सरकार द्वारा अमिताभ ठाकुर को सामाजिक संस्था से सम्बद्ध होने से मनाही

अपने किस्म के एक अनूठे आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को एक सामाजिक संस्था से सम्बद्ध होने और उसकी गतिविधियों में भाग लेने से मना कर दिया है. प्रमुख सचिव गृह नीरज कुमार गुप्ता द्वारा दिए गए आदेश दिनांक 11 अगस्त 2014 के अनुसार अमिताभ ठाकुर को उक्त संस्था से सम्बद्ध होने की अनुमति प्रदान करने का औचित्य नहीं पाया गया.