बलिया में सिपाही ने की अवैध वसूली की शिकायत तो एसपी ने किया सस्पेंड, आहत सिपाही ने दिया इस्तीफा (देखें वीडियो)

उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के नरही थाने के पिकेट पर हो रही अवैध वसूली की शिकायत करना एक सिपाही को महंगा पड़ गया. एसपी ने शिकायत करने वाले सिपाही को ही सस्पेंड कर दिया. इससे आहत निलम्बित सिपाही ने पुलिस हेड क्वार्टर इलाहाबाद को अपना त्याग पत्र भेज दिया है. उसने जान-माल की सुरक्षा की गुहार भी की है.

उ.प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए कमेटी गठित

लखनऊ : वर्षों बाद उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए गत दिवस लखनऊ में आपसी सहमति हो जाने के बाद पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। 

फिल्मी पर्दे पर उतरेंगे ‘नेता जी – मुलायम सिंह यादव’, कास्टिंग 15 दिन में

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की जिंदगी अब रुपहले पर्दे पर उतरने वाली है. फिल्म में मुलायम के बचपन, उनके जीवन की जद्दोजहद तथा राजनीति संघर्ष को दिखाया जाएगा और वर्ष 1989 में सपा मुखिया द्वारा पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दृश्य के साथ फिल्म समाप्त हो जायेगी. ख़ास बात यह है कि अपने जीवन पर फिल्म बनाने की इजाजत मुलायम सिंह भी दे चुके हैं, जिसका मुहूर्त उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो रहा है. इसमें मुलायम सिंह के बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शरीक होंगे. फिल्म का नाम है, ‘नेता जी – मुलायम सिंह यादव’। निर्देशन डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर विवेक दीक्षित करेंगे और फ़िल्म का निर्माण संदीप शुक्ला और सर्वजीत सिंह करेंगे.

यूपी सरकार से पीड़ित आईएएस एसपी सिंह लड़ाई में उतरे, ‘जन चौपाल’ का बिगुल बजाया

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस सूर्य प्रताप सिंह लगातार सत्ता की ज्यादतियों से आजिज आकर अब लड़ाई के मैदान में उतर चुके हैं। जन-चौपाल के माध्यम से वह सीधे जनता के बीच पहल कदमी करने चल पड़े हैं। उन्होंने बताया है कि शिकोहाबाद में सपा नगर अध्यक्ष दिलीप यादव और उसके गुर्गे हमारे वालंटियर लोगों को धमका रहे हैं और अपने गुंडों की मदद से हमारी ‘जन-चौपाल’ में व्यवधान करने की तैयारी कर रहे हैं। मैं अपने वालंटियर्स से शांतिपूर्वक काम करने की अपील करता हूँ। वह लिखते हैं कि यह सविनय निवेदन ‘जन-जागरण’ अभियान है।

पत्रकारों से यूपी के सूचना सचिव के खिलाफ सड़कों पर उतरने का आह्वान

लखनऊ : मेरे ईमानदार पत्रकार साथियों, मेरी आप से विनम्रता के साथ अपील है, नवनीत सहगल जैसे उत्तर प्रदेश की लूट के साम्राज्य के सरगना के जब मैंने दृष्टान्त मैग्ज़ीन में लगातार बेनकाब किए तो वह मेरी पत्रिका के टाइटल को कैंसिल कराने की कोशिश कर रहे हैं। प्रेस पर छापे डलवाए गए। अपने डिपार्टमेंट के तीन अधिकारियों की कमेटी बनाकर एक फर्जी रिपोर्ट बनवाई और उस प्रेस को दबाव डालकर उससे मेरी पत्रिका की छपाई बंद करवा दी.

महाभ्रष्टाचारी यादव सिंह को बचाने की यूपी सरकार की कोशिश नाकाम, एससी का झटका, सीबीआई जांच पर रोक से इनकार

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के सस्पेंड इंजीनियर-इन-चीफ यादव सिंह मामले में सीबीआई जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया है। अखिलेश सरकार को इससे तगड़ा झटका लगा है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यादव ने पूरी व्यवस्था को अपना दास बना लिया है। पिछली 16 जुलाई को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस एसएन शुक्ला ने सीबीआई जांच कराने के आदेश किए थे। इसके बाद अखिलेश सरकार ने यादव सिंह पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

यूपी का आबकारी मंत्र : खूब पिलाओ-पैसा कमाओ, डीएम बढ़ाएंगे शराब की बिक्री !

उत्तर प्रदेश के किसी बिजनेसमैन  को दिन दिन दूनी रात चैगनी कमाई करने का धंधा करना हो तो राज्य का आबकारी विभाग उसके लिये नजीर बन सकता है।कमाई के मामले मंे आबकारी महकमें ने बड़े-बड़े उद्योगपतियों को पछाड़ दिया है।आश्चर्य की बात यह है कि शराब के कारण प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के साथ-साथ अन्य कई सामाजिक बुराइयों की चिंता सरकार में बैठे लोगों को रत्ती भर भी नहीं है।इसी लिये प्रति वर्ष हजारो करोड़ की आमदनी करने वाले महकमें के बड़े अधिकारी इतनी मोटी कमाई के बाद भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।वह  प्रदेश के तमाम जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने जिले में शराब की खपत बढ़ाने को कह रहे हैं।शराब से परिवार बिगड़ते हैं तो बिगड़े।अपराध बढ़ते हैं तो बढ़ा करें लेकिन आबकारी विभाग का इन बातों से कुछ लेना-देना नहीं है।ऐसा लगता है कि  यूपी के जिलाधिकारियों के पास कोई काम नहीं है।इसी लिये उनके कंधों पर शराब बेचने की जिम्मेदारी डाली जा रही है।सरकारी खजाना भरने के चक्कर में आबकारी विभाग के अधिकारी महापुरूषों की उस नसीहत को अनदेखा कर रहे हैं जिसमें वह कहा करते थे,‘ जो राष्ट्र नशे का शिकार होता है,विनाश उसकी तरफ मुंह बाय खड़ा रहता है।’ 

यादव सिंह प्रकरण : यूपी में ‘ठाकुर’ और ‘सिंह’ दहाड़ रहे, मीडिया समेत बाकी बने घुग्घू,!

लखनऊ (उ.प्र.) : आईपीएस अमिताभ ठाकुर हों या आईएएस सूर्य प्रताप सिंह, इन दोनो जुझारू वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों ने उत्तर प्रदेश में वो कर दिखाया है, जो उम्मीद मीडिया और राजनीतिक विपक्ष से, कथित ईमानदार संगठनों से, जुझारू लेखकों और पत्रकारों से की जानी चाहिए थी। उनके साथ साथ इन वर्गों के लोग हैं जरूर, लेकिन पीछे-पीछे, चुप-चुप। उनमें न उतना साहस दिख रहा है, न उतनी इच्छा शक्ति कि वे सत्ता के कोप का सामना कर सकें। मीडिया तो अपनी गंदी आदत के अनुसार हर उसके साथ हो ले रहा है, जो उसे विज्ञापन दे दे। ये कैसी नीचता की पराकाष्ठा है। सीबीआई के शिकंजे में फंसे यादव सिंह प्रकरण में इन सबकी भूमिका ने उनके चेहरे से पर्दा हटा दिया है। खुल्लमखुल्ला ललकार रहे, दहाड़ रहे हैं तो सिर्फ ठाकुर और सिंह…

कथाकार काशीनाथ सिंह को उ.प्र. हिंदी संस्थान का ‘भारत भारती सम्मान’

लखनऊ : उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से आज वर्ष 2014 में प्रकाशित पुस्तकों पर सम्मान एवं पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई। इसके अंतर्गत संस्थान ने सुप्रसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह को भारत-भारती सम्मान, उपन्यासकार मृदुला गर्ग को लोहिया साहित्य सम्मान, विनोद कुमार शुक्ल को हिंदी गौरव सम्मान, डॉ.कृष्ण बिहारी मिश्र को महात्मा गांधी साहित्य सम्मान, प्रो.अभिराज राजेंद्र मिश्र को पं.दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान, डॉ.रामकृष्ण राजपूत को अवंती बाई साहित्य सम्मान, कर्नाटक हिंदी प्रचार समिति, बैंगलूर को राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन सम्मान देने की घोषणा की है। 

यूपी सरकार ने जगेंद्र सिंह के परिवार को 30 लाख क्यों दिए!

टाइम्स ऑफ इंडिया में एक खबर है कि शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह के बेटे ने कहा है कि उसे सीबीआई जांच नहीं करानी क्योंकि उसके पिता कन्फयूज्ड थे और इसी मतिभ्रम के कारण उन्होंने आत्मदाह किया था। उन्हें किसी ने जलाया नहीं और मंत्री एकदम निर्दोष है।

अमिताभ ने गृह सचिव से पूछा – एनआरएचएम, खनन के आरोपी बहाल हो सकते हैं तो वह क्यों नहीं !

लखनऊ : नौकरी से निलंबित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश सरकार से उनका निलंबन समाप्त कर उन्हें बहाल किये जाने की मांग की है. प्रमुख सचिव गृह को भेजे पत्र में उन्होंने कहा है कि 13 जुलाई का आरोप पत्र मिलने के बाद उन्होंने 16 जुलाई को अपना जवाब भेज दिया था जिसमे उन्होंने सभी आरोपों को आधारहीन बताया था. 

दलित अधिकारियों, कर्मचारियों की पदावनति के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जायेगा आइपीएफ – दारापुरी

लखनऊ : पूर्व आईजी एवं आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर सभी विभागों में पदोन्नति पाए दलित अधिकारियों और कर्मचारियों को पदावनत करने के फैसले पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि इससे प्रदेश में लभगग 5000 दलित अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित होंगे. प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ आईपीएफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा.

हमीरपुर के बिंवार गांव में जो घटित हुआ, जान लीजिए

12वीं क्लास में पढ़ रही एक बेटी सुबह 7 बजे गावं में ही कोचिंग जा रही थी। उ. प्र. सरकार के दो रिश्तेदारों ने उसे सरेराह रोककर छींटाकसी की। कपड़े खीचे। बाल पकड़ कर खींचा। बेटी को तरह-तरह से बेइज्जत किया। पास में रहने वाली एक मुस्लिम महिला ने अपनी जान जोखिम में डाल कर बेटी को बचाया। वहां से छूट कर वो किसी तरह घर भागी। पिता और चाचा ने उसकी दुर्दशा देखी और उन गुंडों का पता करने निकल पड़े। उनके पीछे माँ भी उलाहना देने चल दी। इधर भीषण अपमान से आहत बेटी को कोई रास्ता न सूझा। उसने अपने ऊपर किरोसिन डाल कर आग लगा ली। पड़ोसी चिल्लाये, दौड़े तो आग बुझाई। माँ-बाप-चाचा उलटे पांव लौटे और बेटी को लेकर थाने भागे। थानेदार ने वाकया और अभियुक्तों का नाम सुनते ही वहां से भगाया तो वो कोई साधन लेकर मौदहा तहसील और फिर हमीरपुर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के गेट पर पहुंचते पहुंचते बेटी ने दम तोड़ दिया। 

यूपी में एक और पत्रकार पुलिस की साजिश का शिकार, पीजीआई में भर्ती

सहारनपुर (उ.प्र.) : एसओ के खिलाफ खबर लिखना पत्रकार को इतना मंहगा पड़ गया कि उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। दुष्कर्म का मुकदमा कायम होने के बावजूद थानाध्यक्ष ने आरोपी को छोड़ दिया था। पीड़ित पत्रकार की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, उल्टे धमकाया कि नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहना। पुलिस के इशारे पर कस्बे के एक नेता ने पत्रकार पर अटैक कर दिया। उनके दो दांत टूट गए, जबड़े में फ्रैक्चर हो गया, आंख घायल हो गई, खून की दो उल्टियां हुईं। वह पीजीआई में भर्ती हैं।  

यादव प्रकरण : सीबीआई जांच से हड़कंप, सरकार और नौकरशाहों में शह-मात का खेल

उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक बार फिर इतिहास दोहराया जा रहा है। खनन माफिया से मोर्चा लेने के लिये अखिलेश सरकार से भिड़ने वाली आईएएस अधिकारी दुर्गा नागपाल की तर्ज पर ही पीसीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और आईएएस अफसर सूर्य प्रताप सिंह ने भी मोर्चा खोल दिया है। दोनों नौकरशाह तो अखिलेश सरकार का कुछ खास नहीं बिगाड़ पाये हैं लेकिन सरकार ने दोनों के लिये ही मुसीबत खड़ी करते हुए दोनों के निलंबन का तानाबाना बुन दिया। सरकार की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि उक्त अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ जाकर सेवा नियमावली की अवहेलना की है, जबकि नौकरशाह कुछ और ही दलील दे रहे हैं। इन अधिकारियों को लगता है कि उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा कर कुछ गलत नहीं किया। 

पत्रकारों के सम्मान की रक्षा का संघर्ष जारी रहेगा : आईजेए

बिल्थरारोड (उ.प्र.) : पत्रकारों के सम्मान और उनकी रक्षा के लिए इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन सदैव संघर्ष करता रहेगा और मीडियाकर्मियों के हित में चलाये गए हर मिशन में हमें पूरी सफलता भी मिलेगी लेकिन यह तभी संभव है, जब क्षेत्र का हर पत्रकार अपना व्यक्तिगत द्वेष छोड़कर एक हो। 

बिल्थरारोड इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन की बैठक में मौजूद राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी व अन्य पत्रकार

यादव सिंह मामले की सीबीआई जांच यूपी सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोलेगी

डॉ. नूतन ठाकुर : मेरे द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर पीआईएल पर नॉएडा के इंजीनियर यादव सिंह मामले की सीबीआई जाँच के आदेश हो गए. अखिलेश सरकार ने सीबीआई जांच रोकने को एड़ी-चोटी लगा लिया और स्वयं महाधिवक्ता कई दिन इसका विरोध करते रहे पर अंत में कोर्ट ने मेरी प्रार्थना स्वीकार की. यह स्थिति अखिलेश सरकार की वास्तविक भष्ट लोगों के प्रति सहानुभूति को दिखाता है. अब ये जांच यूपी सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोलेगी.

लोहिया के सपनों को तोड़ता मुलायम का नव-समाजवाद

अजीब व्यवस्था है जिसमें कोई गायत्री प्रजापति  या कोई राममूर्ति वर्मा अवैध खनन के आरोप के बावजूद हमारा रहनुमा बना रहता है पर इनके गैर-कानूनी हरकतों के खिलाफ आवाज उठाने वाला आई आई टी से पढ़ा भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी अमिताभ ठाकुर बलात्कार का आरोप झेलता इस बात पर निलंबित हो जाता है कि राज्य छोड़ने के लिए राज्य के पुलिस प्रमुख से इजाजत नहीं ली थी. उत्तर प्रदेश के समाजवादी शासन में लगभग हर दूसरे मंत्री पर हत्या से लेकर बलात्कार, भ्रष्टाचार या अवैध खनन के मुकदमें हैं. पर यादव सिंह फलता –फूलता है और दुर्गा शक्ति नागपाल या अमिताभ ठाकुर सजा के हकदार होते हैं.     

मुलायम को अमिताभ की पहली शह

अमिताभ ठाकुर की मुलायम सिंह यादव को पहली शह। अरबों रुपए के घोटाले में फंसे नॉएडा के इंजीनियर यादव सिंह को मुलायम सिंह और उन के पुत्र अखिलेश यादव लगातार बचाते रहे । पर अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर द्वारा दायर पी आई एल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने यादव सिंह मामले की सीबीआई जांच के आदेश जारी कर दिए । 

अमिताभ-मुलायम प्रकरण : वक्त है, संभल जाइए ‘सरकार’ !

सपा सरकार के साथ यह परेशानी शुरू से ही रही है कि जब-जब उसकी सरकार बनी है, तब-तब प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगड़ने व उनकी ही पार्टी के लोगों के निरंकुश हो जाने के आरोप उस पर लगे हैं। साथ ही ‘अपनों’ को ‘उपकृत’ करने के आरोप भी लगते ही रहे हैं। युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लोगों को उम्मीद थी कि वे हालात को कुछ काबू कर पाएंगे किन्तु दुर्भाग्यवश ऐसा हो न सका और उनका स्वागत भी प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर सिलसिलेवार तरीके से हुई हिंसक घटनाओं ने किया, जिसमें जान-माल का ख़ासा नुकसान हुआ। प्रदेश की स्थिति सुधारने को युवा मुख्यमंत्री ने कई अच्छे प्रयास किए किन्तु उनके अपनों ने ही उनके अच्छे कामों पर पलीता लगाने का काम किया और उन्हें मुसीबत में डाल दिया। 

जगेंद्र के घर वालों को धमका रहे आरोपी, पीएम से गुहार, पूरा परिवार यूपी छोड़ने की फिराक में

शाहजहांपुर (उ.प्र.) : जिंदा जलाकर मारे गए पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार को धमकाया जा रहा है। घटना की सीबीआई जांच करने की मांग करते हुए जगेंद्र के बेटे राहुल ने पिछले दोनो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। तभी से परिवार पर दबाव डाला जा हा है कि वे समझौता कर लें अन्यथा उनके साथ अच्छा न होगा। बताया जा रहा है कि जगेंद्र के दोनो बेटे पिछले कई दिनो से लापता हैं। उनका कोई पता नहीं चल रहा है। जगेन्द्र के पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। 

सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर अमिताभ ठाकुर को राज्य की प्रताड़ना से बचाए

सर्वोच्च न्यायालय से गुहार. यूपी के आईजी अमिताभ ठाकुर के मामले में दखल दीजिए. सरकार की प्रताड़ना से बचायें, वरना सभी जनवादी और लोकतंत्र के नायक कालकोठरी में होंगे. अब जरा भी देरी न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बना देगी. यूपी सरकार से भरोसा उठ रहा है. सुप्रीम कोर्ट से आस है. पूरा मामला देश के लोकतंत्र और कानूनी प्रक्रिया का माखौल उड़ाते साफ दिख रहा है. अब तो हर पत्रकार और अफसर को डर लगने लगा है कि जो यूपी सरकार के खिलाफ आवाज उठायेगा, वो फर्जी मुकदमे झेलेगा, जेल जायेगा. ये देश की सबसे बड़ी अदालत, अब जनता इंसाफ के लिए आप की तरफ टकटकी लगाये बैठी है. दखल दीजिए. 

यूपी, बिहार के व्यापम की तस्वीर तो और अधिक भयावह

जो कुछ “व्यापम” नाम से मध्य प्रदेश में हुआ और जो अन्य प्रदेशों में भी दूसरे नामों, दूसरे प्रकारों, दूसरी सीमा तक हो रहा है वह भयावह है । बिहार में एक बार में ही चौदह सौ अध्यापक स्वयं नौकरी छोड़ ग़ायब हो गये । ये सब अवैध ढंग से नौकरी में आये थे । उत्तर प्रदेश में एक चौथाई प्राइमरी स्कूलों में डुप्लीकेट अध्यापक तैनात हैं (नौकरी किसी के नाम है पढ़ाने कोई और आता है)।

पुलिस बर्बरता और अपराधियों को संरक्षण दे रही यूपी सरकार – रिहाई मंच

 लखनऊ : रिहाई मंच ने बाराबंकी में पत्रकार की मां के साथ थाने में बलात्कार करने के प्रयास में विफल होने के बाद एसओ राय साहब यादव और एसआई अखिलेश राय द्वारा जिंदा जला दिए जाने की घटना को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा बलात्कारी व अपराधी पुलिस अधिकारियों को खुला संरक्षण देने का नतीजा बताया है। मंच ने कानपुर में सपा उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन कानपुर ग्रामीण का बोर्ड लगे मकान के अंदर सेक्स रैकेट के खुलासे और उसमें सपा नेता दीपक गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद सपा के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और नेताओं के फार्म हाउसों तथा रिसार्ट पर छापा मारने की मांग की है।

पत्रकार मुझसे यूपी की खराब कानून व्यवस्था की शिकायत करते हैं : राज्यपाल नाइक

अजय कुमार : उत्तर प्रदेश के 28 वें राज्यपाल राम नाईक को कार्यभार ग्रहण किए एक वर्ष हो चुका है। अब तक उनके कई फैसलों पर विवाद भी हो चुका है। वह कहते हैं, पत्रकारों ने भी मुझसे यूपी की बिगड़ी कानून व्यवस्था की शिकायत की है। मैंने भी कई बार मुख्यमंत्री से कानून व्यवस्था पर शिकायत की है। 

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक से बातचीत करते वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार

जरा सुनो तो सर जी, हमे तो टीवी पर आने का चस्का है, मार ही डालोगे क्या !

हम पर कार्रवाई तो जरूर करें सर जी.. हम तैयार हैं, परन्तु ये तो बता दें कि 2011 के पीसीएस अंतिम परिणाम की संलग्न सूची में कुल चयनित 86 एसडीएम में 54 एक ही जाति के कैसे आ गए ? अनिल यादव पर करम और हम पर सितम, रहने दे अब थोडा सा धरम, सर जी ! हम तो सरकार के एक दीगर कारिन्दा है। हमें तो कभी भी कुचल सकते हो। चलो, हमे तो टीवी पर आने का चस्का है, मार ही डालोगे क्या। 

यूपी में 12 आईपीएस और नौ पीपीएस अफसरों का स्थानांतरण

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने 12 आईपीएस और नौ पीपीएस अफसरों के तबादले किए हैं. इनमें डीजी स्तर के छह आईपीएस अफसर और इतने ही एडीजी स्तर के आईपीएस अधिकारी शामिल हैं. ट्रांसफर किए गए वरिष्ठ आईपीएस अफसरों में दो नाम ऐसे भी शामिल हैं जिन्हें अभी दो दिन पहले तक प्रदेश के डीजीपी पद का दावेदार गिना जाता था. बरेली के एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा को हटा दिया गया है लेकिन उनके स्थान पर उन्हीं समीर सौरभ को लाया गया है जिन्हें अभी कुछ समय पहले ही एसपी सिटी आगरा के पद से एक स्पा सेंटर की संचालिका से लाखों रूपये की वसूली के विवादास्पद मामले में हटाया गया था.

फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी की बीएसपी ने की शिकायत, सात पर रिपोर्ट

बहराइच (उ.प्र.) : फेसबुक पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी लिखने पर पुलिस ने विपुल शाह सहित सात युवकों के खिलाफ आईटी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 153 बी , 295 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। 20 जून को आरोपी के फेसबुक एकाउंट पर यह सामग्री पोस्ट की गई, जिसे छह अन्य युवकों ने पसंद किया या उस पर टिप्पणी की। 

पत्रकार जगेन्द्र की मौत की जांच रिपोर्ट जल्द, दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी : अखिलेश

समाजवादी पार्टी का युवा चेहरा अखिलेश यादव दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव पार्टी अखिलेश को आगे करके ही लड़ने का मन बना रही है। प्रदेश में कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। उनके मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार-दबंगई के आरोप लग रहे हैं। इन मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार …

संविधान के मौलिक अधिकारों का वजूद खतरे में, कसौटी पर नाकारा यूपी सरकार

अभी तक तो यूपी सरकार की किरकिरी कराने वाले चाचा जान ने कल्वे जव्वाद पर हमला बंद  भी नहीं किया था कि उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राम मूर्ति वर्मा का पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड में नामजद होना यूपी सरकार के लिए एक चिंता का सवाल बन गया है । सरकार पत्रकार हत्याकांड में नामजद मंत्री पर कत्तई एक्शन न लेने के मूड में है । अगर नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आकड़ों पर गौर किया जाय तो प्रतिवर्ष जितने पत्रकारों के देश भर में उत्पीड़न के मामले  प्रकाश में आते हैं, उसके 72 % मामले अकेले यूपी के होते हैं, जो राज्य के वजीर ए आलम अखिलेश के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। क्या अखिलेश के अंदर शासन व सत्ता को सुचारु रूप से चल़ाने का म़ाद्दा खत्म हो चुका है? क्या युवा शक्ति के आकलन में कोई सेंध है?