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सियासत

यूपी के स्वास्थ्य विभाग में एजिथ्रोमाइसिन ख़रीद स्कैम : 6.7 रुपये वाली टैबलेट 12 रुपये में फाइनल!

लखनऊ से प्रकाशित अखबार संदेशवाहक में स्वास्थ्य विभाग के घपले घोटाले की मनीष श्रीवास्तव द्वारा लिखित एक अहम खबर पर गौर फरमाइए!

जिस एजिथ्रोमाइसिन दवा को केजीएमयू, दिल्ली एम्स समेत बड़े संस्थान व अन्य राज्य करीब आधी कीमत में खरीदते हैं, उसका ठेका यूपी के स्वास्थ्य विभाग ने कर्नाटक एंटीबायोटिक्स को 12 रुपये प्रति टेबलेट की दर से बिना टेंडर/ईओआई पौने 19 करोड़ में दे डाला। यूपी मेडिकल कार्पोरेशन में पिछले साल तक यही टैबलेट 6.7 रुपये प्रति में खरीदी जा रही थी।

फुलप्रूफ प्लानिंग के तहत पहले से जारी एजिथ्रोमाइसिन खरीद का टेंडर जानबूझकर महीनों तक लटकाया गया। फिर मनमाने तरीके से आकस्मिक खरीद के नाम पर मंहगी दवा खरीद की कलंक कथा लिखी गयी।

गर्दन न फंसे, इसलिए ठेका कर्नाटक के सरकारी उपक्रम को देने का रास्ता चुना गया। जिस कर्नाटक एंटीबायोटिक्स को पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने डिबार किया था, केंद्र ने अधोमानक दवाएं पकड़ीं, उस कम्पनी पर दरियादिली के पीछे कमीशनखोरी का तगड़ा कॉकटेल छिपा होगा। रिस्क/आल्टरनेटिव परचेज में बड़े खेल हुए हैं। खैर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हमेशा की तरह जांच कराने का बयान दिया है।

टेंडर में देरी और महंगी दरों पर खरीदी का विवाद: अजिथ्रोमाइसिन टैबलेट घोटाला?

गरीबों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उठाने वाला उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (यूपीएमएससीएल) फिर से विवादों में घिर गया है। सरकारी अस्पतालों के लिए आवश्यक दवाओं की खरीद में देरी और महंगी दरों पर टेंडर आवंटन का मामला सामने आया है। इस बार मामला अजिथ्रोमाइसिन टैबलेट की खरीद से जुड़ा हुआ है, जहां टेंडर में देरी कर महंगी दरों पर दवा खरीदी गई।

यूपीएमएससीएल ने 8 मार्च 2024 को अजिथ्रोमाइसिन टैबलेट की आपूर्ति के लिए टेंडर निकाला था। टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण सितंबर तक कोई फाइनल निर्णय नहीं लिया गया। बाद में, 13 दिसंबर को नए सिरे से टेंडर मंगवाए गए और 2024 के जनवरी महीने में खरीद को मंजूरी दी गई। इस प्रक्रिया के दौरान, बाजार में उपलब्ध सस्ती दरों के बावजूद, अधिक कीमत पर दवा खरीदी गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कंपनी को यह टेंडर मिला, वह पहले प्रतिबंधित हो चुकी थी। रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला (डीआरडीओ) ने फरवरी 2024 में इस कंपनी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे और इसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। बावजूद इसके, कॉरपोरेशन ने इस कंपनी को ही ठेका दे दिया। विस्तार से पूरी कहानी उपरोक्त न्यूज़ कटिंग में पढ़ें।

यह पहला मौका नहीं है जब दवा खरीद में अनियमितताओं का आरोप लगा हो। यूपीएमएससीएल पहले भी महंगी खरीद और टेंडर प्रक्रिया में देरी के मामलों में फंस चुका है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।

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