अरविंद उप्रेती साइलेंट रहते थे, लेकिन इतने चुपचाप चले जाएंगे, उम्मीद न थी

Shambhunath Shukla : फेसबुक पर अंबरीष कुमार की पोस्ट से पता चला कि जनसत्ता के दिनों के हमारे साथी अरविंद उप्रेती नहीं रहे। अरविंद साइलेंट रहते थे और इतना ज्यादा कि वे अपने साथ कानपुर में एक ही कालेज में पढ़े थे और साथ-साथ 12 वां किया था। लेकिन इस बात का पता चला इंटरमीडिएट करने के 15 साल बाद जब वे जनसत्ता में नौकरी करने आए और तब बातचीत से मालूम हुआ कि उन्होंने भी इंटरमीडिएट उसी कालेज से उसी साल किया था जिस कालेज से जिस साल मैंने किया था। बस सेक्शन अलग-अलग थे।

अरविंद उप्रेती

जनसत्ता में अपना लंबा साथ रहा और फिर जनसत्ता अपार्टमेंट में रहने के कारण रिटायरी के दिन भी साथ-साथ काटे। मगर कोई इतना साइलेंट चला जाएगा कि उसकी मृत्यु की सूचना भी फेसबुक से मिलेगी यह तो सदमा है। उनके मृत्यु की खबर पाकर सन्न रह गया और लगा कि अरे रोज तो वे नीचे मिल ही जाते थे अक्सर रिक्शे से उतरते हुए या रिक्शे पर बैठते हुए। मैं कहता चलो टहलते हुए चलते हैं पर उन्हें जीवन में पैदल चलना कभी रास नहीं आया। यहां तक कि साथ छोड़ जाते वक्त भी। वे अपने गांव पौड़ी जा रहे थे और रास्ते में ही एक के बाद दूसरा हार्ट अटैक पड़ा और साथ छोड़ गए। कुछ समझ नहीं आ रहा। अश्रुपूरित विदाई दोस्त।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला की फेसबुक वॉल से.



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Comments on “अरविंद उप्रेती साइलेंट रहते थे, लेकिन इतने चुपचाप चले जाएंगे, उम्मीद न थी

  • Main bhi Sann hoon yah sunker… Kafi dino se wey mera phone bhi pick nahi ker rahey thhe… Mujhe gussa to unper kafi ata tha, lekin ker bhi kya sakte.. Inke sath-2 Amit Prakash ji bhi phone nahi pick ker rahey hain… Unse Guzarish hai ki baat karein..
    Kafi dukh ho raha hai ye sunker, ki ab Upreti ji hamare beech nahin hain… Bhagwan Unki Atma ko Shanti De, Pariwar ko Sambal, yahi Dua hai.

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