उर्मिलेश-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो कहा वह फैक्ट-चेक में गलत साबित हो रहा है. पर अपने यहां बीते कुछ घंटों के दौरान ट्रंप की गलतबयानी को ही सच बनाकर सत्ता-पक्ष की तरफ से विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने की जोरदार कोशिश हुई!
लेकिन Indian Express ने पडताल की और खबर लिखा कि 21 मिलियन डॉलर की अमेरिकी मदद (USAID) भारतीय चुनावों में मतदाता जागरुकता के लिए नहीं, बांग्लादेश में छात्र-युवाओं के बीच Political & Civic Engagement यानी सत्ता-पलट के लिए निर्धारित हुई थी.
दूसरी तरफ अपने देश के ज्यादातर अखबारों ने ट्रंप की गलतबयानी को ही सच मानकर खबर छाप दिया कि यह रकम भारतीय चुनाव से पहले मतदाता जागरुकता बढाने में लगनी या लगी थी.
बहरहाल, फैक्ट-चेक अब सामने है और ये अच्छी बात है कि सच और झूठ दोनों एक साथ आ गये:
दयाशंकर मिश्रा-
हिंदी अख़बारों में अमेरिकी राष्ट्रपति का झूठ छपा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ज़रूर पढ़ें।
-सच : USAID ने 21 मिलियन डॉलर बांग्लादेश को भेजे। यह रकम शेख़ हसीना के तख़्ता पलट में इस्तेमाल हुई। ‘वोटर टर्न आउट’ के लिए ।
-झूठ : मस्क और ट्रम्प ने कह रहे हैं, पैसा भारत में ख़र्च हो रहा था।


सौमित्र रॉय-
लोकतंत्र लूटने के लिए अमेरिका से भेजा गया 21 मिलियन (181 करोड़ 76 लाख 65 हज़ार 632 और 30 पैसे) असल में बांग्लादेश के लिए थे।

यह पैसा उसी यूएस एड से आया, जिसकी गुलामी जयशंकर और डोवाल का बेटा, पीयूष गोयल और स्मृति ईरानी जैसे संघी किया करते थे।
जब ट्रंप ने यह राज़ खोल दिया तो नारंगी संतरों ने इंडियन एक्सप्रेस को हड्डी डालकर यह खबर छपवा दी।
कहा कि गलती ट्रंप से हुई। उन्हें ढाका और दिल्ली का फर्क नहीं मालूम था।
खबर इंडियन एक्सप्रेस में ही क्यों छपी? क्योंकि भारत में आरएसएस के पाले हुए तमाम इन्फ्लूएंसर और ओपिनियन मेकर्स दौलतमंद हैं।
हिंदी मीडिया तो इन्हीं का गुलाम है। वे तो सिर्फ अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद कर पीएमओ पहुंच जाते हैं, हड्डी बटोरने।
लेकिन अब नारंगी संतरों की यह चाल भी फेल हो गई है।

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