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असम आंदोलन में जेल जाने वाले प्रसिद्ध पत्रकार प्रदीप दत्ता का निधन!

प्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप दत्ता का निधन हो जाने की जानकारी सामने आई है. वे शिवसागर जिले के अमगुरी हिलोदरी गांव के रहने वाले थे. 85 वर्षीय दत्ता का निधन बीमारी के चलते हुआ है.

उनके आकस्मिक निधन पर पूरे अमगुरी, झांजी और शिवसागर जिले में शोक की लहर पसरी देखी गई. वह दो बार जिला पत्रकार संघ, शिवसागर के अध्यक्ष रह चुके थे. 1939 में जन्में दत्ता ने कॉटन कॉलेज, गुवाहाटी से पियू की डिग्री हासिल की थी.

बाद में उन्हें आईआईटी खड़गपुर में दाखिला मिल गया था. 1961 में उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद जोरहाट क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला में रिसर्च फेलो के रूप में काम किया. सिक्किम माइनिंग में कई वर्षों की सेवा के बाद उन्होंने प्रमोशन न मिलने के कारण इस्तीफा दे दिया था.

दत्ता ने 1979 से 1997 तक दैनिक जन्मभूमि के स्थानीय संवाददाता के रूप में काम किया. इसके बाद 1997 में आमार आसाम से बतौर संवाददाता जुड़ गए. उन्होंने असम ट्रिब्यून में भी कई वर्षों तक संवाददाता के तौर पर काम किया. असम आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी. इस आंदोलन को लेकर उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

वह एएजेयू और एसडीजेए के साथ सक्रिय तौर पर जुड़े थे. पहले उपाध्यक्ष और फिर ऑल असम जर्नलिस्ट यूनियन के सलाहकार के रूप में काम किया. इसके अलावा वे कई पत्रिकाओं में संपादक रहे.

निधन के बाद उन्हें एक आदर्श पत्रकार के रूप में असम सरकार द्वारा पत्रकार पेंशन से सम्मानित किया गया. उनके परिवार में पत्नी नलिनि दत्ता, एक बेटा, एक बेटी, बहू और दामाद हैं.

अंतिम संस्कार से पहले उनके आवास पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. जिसमें अमगुरी स्पोर्ट्स एसोसिएशन, एसडीजेए, एएजेयू, ग्रामीण पत्रकार संघ, अमगुरी विधायक प्रदीप हजारिका के अलावा अमगुरी कॉलेज समेत बड़ी तादाद में लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की.

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