Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

सहाराश्री के निधन पर लाइव देते समय विजय राय से हुई मुलाकात.. आखिरी होगी, अब भी यकीन नहीं होता!

दिव्येंदु राय-

संवाददाता से समूह सम्पादक तक सफ़र तय करने वाले देश के वरिष्ठ पत्रकार डॉ० विजय राय जी नहीं रहे। सुबह सोकर उठा ही था तबतक एक ऐसी ख़बर मिली जिसने मुझे पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया। वह ख़बर थी देश के वरिष्ठ पत्रकार डॉ० विजय राय जी के निधन की।

विजय राय जी मूलतः पूर्वांचल के कुशीनगर जिले से ताल्लुकात रखते थे और पत्रकारिता में आने से पहले वह अपने गृह जिले में शिक्षा जगत में योगदान दे चुके थे। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएचडी करने के बावजूद विजय राय जी ने दलित, दमित, शोषित और वंचित वर्ग को उनका हक एवं अधिकार दिलाने के लिए पत्रकारिता की राह अपने जीवन के आखिरी लम्हे तक पकड़े रखा।

इस दरम्यान डॉ० विजय राय जी ने कई संस्थानों में काम किया। सहारा मीडिया समूह में उन्होंने संवाददाता से समूह सम्पादक तक का सफ़र तय करते हुए विशुद्ध पत्रकारिता करके पत्रकारिता धर्म के निर्वहन के साथ – साथ जरूरतमन्दों की हर सम्भव मदद की।

डॉ० विजय राय जी का मऊ जनपद से बहुत पुराना नाता रहा है क्योंकि इनके पिताजी मऊ जिले में कोतवाल रह चुके हैं। स्व० विजय राय जी के दो छोटे भाई हैं जिसमें प्रदीप राय जी देश के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रह चुके हैं वहीं विनय राय जी देश के वरिष्ठ पत्रकार हैं।

डॉ० विजय राय जी हँसमुख, विनम्र, सरल और मिलनसार व्यक्ति थे जो पहली मुलाक़ात में ही अपनी छाप छोड़ देते थे। देश भर में उनको जानने एवं चाहने वाले हज़ारों मीडियाकर्मी हैं।

जब विजय भईया कोई किस्सा सुनाते थे तो प्रवाह ऐसा होता था कि उनके साथ बैठे कई घण्टे हो जाने के बाद ही पता चलता था की इतना समय हो गया है। विजय भईया के ऑफिस में बैठकर समोसा खाते हुए कहानियां सुनना मुझे बहुत अच्छा लगता था। विजय भईया से आखिरी बार स्व० सुब्रत रॉय सहारा के निधन के दरम्यान घाट पर मुलाकात हुई थी। लाइव देते समय अचानक विजय भईया दिख गए थे और मुझे देखकर मुस्कुराने लगे। लाइव खत्म होने के बाद मैं जाकर विजय भईया से मिला लेकिन मुझे इस बात का अंदाजा बिल्कुल नहीं था कि विजय भईया के साथ मेरी यह मुलाकात आख़िरी होकर रह जाएगी।

कुछ महीनों से उनका टाटा मेमोरियल मुंबई में इलाज चल रहा था। आज सुबह नोएडा के अपने आवास में तकरीबन साढ़े चार बजे उन्होंने आख़िरी साँस ली। महादेव से यही प्रार्थना है कि वह डॉ० विजय राय जी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं उनके अपनों को इस अपार कष्ट को सहन करने की ताकत दें। ॐ शान्ति, विनम्र श्रद्धांजलि।


राजेन्द्र द्विवेदी-

राष्ट्रीय सहारा के ग्रुप एडिटर विजय राय जी का आकस्मिक निधन हो गया बेहद नेक दिल इंसान थे दो दशक तक हमें एक दूसरे के सहयोगी रहे अपनी बातों को बड़ी बेबाकी से रखते थे उनका अपना एक अलग अंदाज था उनके निधन से बहुत कष्ट हो रहा है उनके साथ किए गए कार्य एक-एक करके याद आ रहे हैं कैसे और किस तरह से जटिल समस्याओं को भी अपने सरल और स्पष्ट तरीके से हल करते थे ईश्वर उन्हें अपने चरणों में स्थान दें और इस कष्ट को सहने के लिए परिवार जनों को सहनशक्ति की क्षमता दे- ओम शांति


देवकी नंदन मिश्रा-

श्रद्धांजलि विजय बाबू। बुरी खबर है। निजी मित्र और राष्ट्रीय सहारा के समूह संपादक विजय राय जी नहीं रहे। एक बारगी मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है। करीब 15 दिन पहले ही उनकी तबीयत के बारे में छोटे भाई विनय राय से जानकारी ली थी। इधर एक साल से विजय जी कैंसर से पीड़ित थे। बीच में उन्होंने मैसेज किया कि सब ठीक है जल्द मिलेंगे लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।

नोएडा के अपने आवास में आज सुबह साढ़े चार बजे उन्होंने आख़िरी साँस ली। उनका निधन हार्ट अटैक से होना बताया जा रहा है। कीमोथेरेपी के कारण उनका शरीर कमजोर हो गया था। विजय जी बहुत जीवट व्यक्ति थे। स्वभाव से विनम्र विजय राय देवरिया जिले के निवासी थे।

विजय जी के साथ हमने राष्ट्रीय सहारा में करीब बीस साल काम किया। उपेन्द्र राय जी विजय जी को लखनऊ से 2001 में दिल्ली लेकर गये। विजय जी से मेरी पहली मुलाक़ात 1995-96 में देवरिया में उनके घर पर हुई थी उस समय भी वह सहारा में थे और छोटी दीदी जी के साथ काम करते थे। मैं गोरखपुर में क्राइम रिपोर्टर था। एस के करुणाकर जी के साथ हम लोग एक प्रोग्राम में देवरिया गये थे जो सहारा संकल्प का था। विजय जी ने पत्रकारिता पर शोध किया था। जैसे उनका मेरा परिचय हुआ उन्होंने कहा देवकी जी आप बहुत अच्छा लिखते है। उसके बाद मैं लखनऊ आया और विजय जी लखनऊ से दिल्ली चले गये लेकिन उनके साथ हमारा रिश्ता बेहद निजी था।

जब भी मिलते थे बड़ी गर्मजोशी से। सहारा में कई उतार चढ़ाव उन्होंने देखे लेकिन फिर भी सहाराश्री जी से उनका रिश्ता हमेशा बना रहा। बहुत सारी यादें जुड़ी है उनसे। आज मन बहुत दुखी है। श्रद्धांजलि विजय बाबू…

ये भी पढ़ें…

अब अखबारों और टीवी में विजय राय जैसे साफ तबीयत के लोगों का मिलना दुर्लभ है!

मूल खबर…

अंतिम संस्कार की तस्वीरें…

अलविदा विजय राय, आप आम पत्रकारों के पक्षधर थे, बहुत याद आयेंगे! देखें आख़िरी तस्वीरें

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन